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लावारिस में किया अंतिम संस्कार, मानवाधिकार आयोग से गुहार, परिवार ने उठाए ये सवाल

Thu, 02 Jul 2020 02:25 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 02 Jul 2020 02:25 PM IST
सार

पीड़ित का आरोप, लापरवाही पर चुप्पी साधे है स्वास्थ्य विभाग, नहीं हुई कोई कार्रवाई 
 

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Family Complaints Human Rights Commission Case Of Old Man Cremated In Unclaimed
मृतक मुन्नालाल का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में चारसू गेट के मुन्नालाल के शव का लावारिस में अंतिम संस्कार करने के मामले में मानवाधिकार आयोग से कार्रवाई की गुहार लगाई गई है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनको एसएन मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भर्ती कराया था। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होने के बावजूद अंतिम संस्कार से पहले परिवार को जानकारी नहीं दी गई। स्वास्थ्य विभाग में शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। 
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मृतक के भतीजे सोनू माहौर का कहना है कि नाम-पता होने के बावजूद परिवार को चाचा की मौत के बारे में नहीं बताया गया। विगत 23 मई को मुख्य चिकित्सा अधिकारी से शिकायत की थी।
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लापरवाही: लावारिस में कर दिया वृद्ध का अंतिम संस्कार, 24 दिन बाद परिजनों को पता चला
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एक दिन बयान के लिए बुलाया गया लेकिन उसके बाद अब तक कुछ नहीं हुआ है। चाचा मुन्नालाल ही घर में कमाने वाले थे। सोनू ने बताया कि उन्होंने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की है। 
 

यह था मामला 
चारसू गेट, घटिया निवासी 65 वर्षीय मुन्नालाल को बुखार, खांसी, जुकाम और सांस लेने में तकलीफ पर 25 अप्रैल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भतीजे सोनू के मुताबिक, कोरोना की आशंका पर उन्हें भर्ती किया गया। बाद में जानकारी दी गई कि उन्हें सिकंदरा स्थित क्वारंटीन सेंटर भेज दिया है।

18 मई को एसएन से जानकारी हुई कि मुन्नालाल की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव थी। पांच मई को उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम गृह पहुंचने पर सिपाही ने एक फोटो से पहचान कराई। तब तक चाचा का लावारिस में अंतिम संस्कार किया जा चुका था। 

परिवार के सवाल 
. कोरोना रिपोर्ट निगेटिव थी तो मौत कैसे हुई? 
. मरीज का ब्यौरा अस्पताल में होता है, फिर मौत पर जानकारी क्यों नहीं दी? 
. पुलिस ने घर पर आकर पूछताछ क्यों नहीं की? 

किसी भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार सम्मान पूर्वक और परिवार की मौजूदगी में होना चाहिए। अगर, किसी व्यक्ति के परिजन नहीं मिल रहे हैं तो भी नियमानुसार 72 घंटे तक इंतजार करना चाहिए। परिजनों की जानकारी होते हुए भी अंतिम संस्कार कर दिया जाता है तो मानवाधिकारों का हनन है। दोषी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। -नरेश पारस, मानवाधिकार कार्यकर्ता
 
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