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UP: नकली दवा के कारोबार पर सबसे बड़ा एक्शन, तीन हजार थोक लाइसेंस की जांच शुरू; ब्रांडेड दवाओं में भी बड़ा खेल
Sat, 25 Jul 2026 09:50 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 25 Jul 2026 09:50 AM IST
सार
नकली, एक्सपायरी और सरकारी दवाओं की तस्करी के खुलासे के बाद आगरा में 3,000 थोक दवा लाइसेंसों की जांच शुरू की गई है। शुरुआती जांच में बिल, स्टॉक और लाइसेंस संबंधी कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं।
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नकली दवा रैकेट पर छापा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त ने बंद मेडिकल फर्म और निरस्त लाइसेंस से सैंपल, एक्सपायर, सरकारी और नकली दवाओं की तस्करी का खेल पकड़ा है। ये अंतरराज्यीय सिंडिकेट है। ऐसे में आगरा में थोक दवाओं के लाइसेंस की जांच की जा रही है। अभी तक जांच में दवाओं की खरीद-बिक्री के बिल में गड़बड़ी मिली है। बिल और स्टॉक में भी अंतर पाया गया है।
आगरा में दवाओं का अंतरराज्यीय सिंडिकेट पकड़ा था। यहां पर सरकारी और ब्रांडेड कंपनी के नाम की नकली दवाओं की कई राज्यों में तस्करी पकड़ी। सैंपल और एक्सपायर दवाओं की रीलेवलिंग कर इनको भी खपाते थे। इसमें जांच करने पर पाया कि बंद फर्म और निरस्त लाइसेंस के नाम पर ये तस्करी का खेल चल रहा था। यहां तक कि लाइसेंस निरस्त होने के बाद सगे-संबंधियों के नाम से नए लाइसेंस लेकर फिर से तस्करी शुरू कर दी जाती। ऐसे में आगरा में 3 हजार थोक लाइसेंस की जांच की जा रही है।
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इसमें अभी तक 200 से अधिक का सत्यापन हो गया है। इनमें भारी गड़बड़ी भी पकड़ी गई है। दवाओं की खरीद-बिक्री के बिल में अंतर, फर्म बंद थी, लेकिन लाइसेंस से कारोबार चल रहा था। स्टॉक रजिस्टर और भंडारण में भी अंतर पाया गया। इन सभी की रिपोर्ट बनाई जा रही है। सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि नकली, सरकारी, सैंपल-एक्सपायर दवाओं की रीलेवलिंग कर कई राज्यों में अवैध कारोबार पकड़ में आने के बाद जिले में करीब तीन हजार थोक लाइसेंस की जांच हो रही है। इसमें गड़बड़ी मिलने पर पहले चरण में 58 के लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। चरणबद्ध जांच करते हुए गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
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इन बिंदुओं पर हो रही है जांच:
फर्म-संचालक का नाम, लाइसेंस का नंबर, जीएसटी नंबर।
दवाओं का कारोबार, खरीद-बिक्री के बिल। फर्म खुलती है कि नहीं।
गोदाम का पता, स्टॉक रजिस्टर, दवाएं कहां से खरीदते-कहां बेचते।
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कई राज्यों में है नकली दवाओं की तस्करी
एफएसडीए की टीम ने देहरादून में नकली दवाओं की फैक्टरी और कच्चा माल पकड़ा है। यहां ब्रांडेड कंपनी की नकली दवाएं तैयार की जाती थीं। इससे आगरा के भी तार जोड़े जा रहे हैं। आगरा में पकड़े गए सिंडिकेट के उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, पुडुचेरी, चेन्नई तक दवाओं की तस्करी करते थे। अभी जांच चल रही है।
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आगरा में दवाओं का अंतरराज्यीय सिंडिकेट पकड़ा था। यहां पर सरकारी और ब्रांडेड कंपनी के नाम की नकली दवाओं की कई राज्यों में तस्करी पकड़ी। सैंपल और एक्सपायर दवाओं की रीलेवलिंग कर इनको भी खपाते थे। इसमें जांच करने पर पाया कि बंद फर्म और निरस्त लाइसेंस के नाम पर ये तस्करी का खेल चल रहा था। यहां तक कि लाइसेंस निरस्त होने के बाद सगे-संबंधियों के नाम से नए लाइसेंस लेकर फिर से तस्करी शुरू कर दी जाती। ऐसे में आगरा में 3 हजार थोक लाइसेंस की जांच की जा रही है।
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इसमें अभी तक 200 से अधिक का सत्यापन हो गया है। इनमें भारी गड़बड़ी भी पकड़ी गई है। दवाओं की खरीद-बिक्री के बिल में अंतर, फर्म बंद थी, लेकिन लाइसेंस से कारोबार चल रहा था। स्टॉक रजिस्टर और भंडारण में भी अंतर पाया गया। इन सभी की रिपोर्ट बनाई जा रही है। सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि नकली, सरकारी, सैंपल-एक्सपायर दवाओं की रीलेवलिंग कर कई राज्यों में अवैध कारोबार पकड़ में आने के बाद जिले में करीब तीन हजार थोक लाइसेंस की जांच हो रही है। इसमें गड़बड़ी मिलने पर पहले चरण में 58 के लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। चरणबद्ध जांच करते हुए गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
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गोदाम का पता, स्टॉक रजिस्टर, दवाएं कहां से खरीदते-कहां बेचते।
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कई राज्यों में है नकली दवाओं की तस्करी
एफएसडीए की टीम ने देहरादून में नकली दवाओं की फैक्टरी और कच्चा माल पकड़ा है। यहां ब्रांडेड कंपनी की नकली दवाएं तैयार की जाती थीं। इससे आगरा के भी तार जोड़े जा रहे हैं। आगरा में पकड़े गए सिंडिकेट के उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, पुडुचेरी, चेन्नई तक दवाओं की तस्करी करते थे। अभी जांच चल रही है।