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UP: ये हैं तीन वो शातिर, जो फर्जी कागजों से बेचने चले थे करोड़ों की जमीन; असली मालिक की चालाकी ने पहुंचाए जेल
Fri, 01 May 2026 10:26 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 01 May 2026 10:26 AM IST
सार
आगरा के सदर क्षेत्र में करोड़ों की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेचने की साजिश को असली मालिक ने ही नाकाम कर दिया। खरीदार बनकर जाल बिछाने पर तीन आरोपी पकड़े गए, पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के थाना सदर क्षेत्र में करोड़ों की जमीन के फर्जी दस्तावेज बनवाकर सौदा करने की साजिश नाकाम हो गई। असली मालिक ने खुद खरीदार बनकर जाल बिछाया और चार करोड़ में सौदा तय कर तीन आरोपियों को दबोच लिया। तीनों को पुलिस के हवाले कर प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है। आरोपियों ने इसके लिए फर्जी खतौनी और आधार कार्ड भी बनवा लिए थे।
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रोहता, सदर निवासी मदन मोहन ने बताया कि वह और नानक चंद सगे भाई हैं। दोनों के नाम पर जमीन है। इनमें एक का रोहता में खसरा नंबर 1088 है। 29 अप्रैल को परिचित ब्रोकर रवि कुशवाहा ने बेटे सतपाल को बताया कि आपकी जमीन को कुछ लोग बेचने की फिराक में हैं। जमीन को अपनी बता रहे हैं। उनके पास फर्जी आधार कार्ड भी हैं। इस पर उन्होंने तीनों आरोपियों को जमीन खरीदने के बहाने अपने पास बुला लिया।
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तीनों बुधवार रात 8 बजे उनके पास आए। सभी ने प्रति बीघा 4 करोड़ रुपये कीमत लगाई। 30 लाख रुपये टोकन मनी मांगे। कहा कि बाकी रकम 18 महीने में देनी होगी। इस दौरान आरोपियों ने खतौनी की कॉपी और आधार कार्ड दिखाएं जो उन दानों भाइयों के नाम पर थे। फर्जी तरीके से बनाए गए थे। उन्होंने तीनों आरोपियों को पकड़ लिया।
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि तीन लोग फर्जी तरीके से जमीन का सौदा करने के लिए आए हैं। मौके पर पहुंचकर जांच की गई तो मामला सही निकला। धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की धारा में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों में फरह मथुरा निवासी गजेंद्र चौधरी उर्फ भोला, मलपुरा निवासी किशनवीर और गढ़मुक्खा, कागारौल निवासी ओमवीर हैं।
जन सेवा केंद्र से बनवाए थे फर्जी आधार कार्ड
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि भोला की रोहता स्थित ठाकुरदास की गढ़ी में प्रॉपर्टी डीलर की दुकान है। किशनवीर उसका रिश्तेदार है। वह बोरिंग मशीन चलाने का काम करता है। किशनवीर का ओमवीर के गांव में आना जाना है। इस वजह से दोनों में जान पहचान थी। भोला को लग रहा था कि इस जमीन का मालिक आसानी से सामने नहीं आएगा। इसलिए उसने फर्जी दस्तावेज बनवा लिए। खतौनी को ऑनलाइन निकलवा लिया था। जबकि आधार कार्ड एक जन सेवा केंद्र से बनवाए थे। जमीन की कीमत करोड़ों में है। ये कई दिन से ग्राहकों से बात कर रहे थे। किशनवीर और ओमवीर जमीन के फर्जी मालिक बन गए थे। अब पुलिस जन सेवा केंद्र संचालक की तलाश में लगी है।
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि भोला की रोहता स्थित ठाकुरदास की गढ़ी में प्रॉपर्टी डीलर की दुकान है। किशनवीर उसका रिश्तेदार है। वह बोरिंग मशीन चलाने का काम करता है। किशनवीर का ओमवीर के गांव में आना जाना है। इस वजह से दोनों में जान पहचान थी। भोला को लग रहा था कि इस जमीन का मालिक आसानी से सामने नहीं आएगा। इसलिए उसने फर्जी दस्तावेज बनवा लिए। खतौनी को ऑनलाइन निकलवा लिया था। जबकि आधार कार्ड एक जन सेवा केंद्र से बनवाए थे। जमीन की कीमत करोड़ों में है। ये कई दिन से ग्राहकों से बात कर रहे थे। किशनवीर और ओमवीर जमीन के फर्जी मालिक बन गए थे। अब पुलिस जन सेवा केंद्र संचालक की तलाश में लगी है।
पहले भी आ चुके ऐसे मामले
जमीनों की फर्जी दस्तावेज से खरीद-फरोख्त का यह कोई पहला मामला नहीं है। पूर्व में थाना जगदीशपुरा क्षेत्र में बेशकीमती जमीन को बेचने के लिए एक ही परिवार के पांच लोगों को फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर जेल भेजा गया था। इस मामले में कार्रवाई हुई थी। तत्कालीन एसओ तक को जेल जाना पड़ा था। बाद में जांच में कई और लोग जेल भेजे गए थे। इसके अलावा ताजगंज और सदर क्षेत्र में गिरोह पकड़े गए थे। आरोपी तहसील में कर्मचारियों से सांठगांठ कर दस्तावेज तैयार कर लेते थे। लोगों से रकम लेने के बाद बैनामा कर देते थे। कई लोगों को जेल भी भेजा गया था। अब फिर से फर्जीवाड़ा सामने आया है।
जमीनों की फर्जी दस्तावेज से खरीद-फरोख्त का यह कोई पहला मामला नहीं है। पूर्व में थाना जगदीशपुरा क्षेत्र में बेशकीमती जमीन को बेचने के लिए एक ही परिवार के पांच लोगों को फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर जेल भेजा गया था। इस मामले में कार्रवाई हुई थी। तत्कालीन एसओ तक को जेल जाना पड़ा था। बाद में जांच में कई और लोग जेल भेजे गए थे। इसके अलावा ताजगंज और सदर क्षेत्र में गिरोह पकड़े गए थे। आरोपी तहसील में कर्मचारियों से सांठगांठ कर दस्तावेज तैयार कर लेते थे। लोगों से रकम लेने के बाद बैनामा कर देते थे। कई लोगों को जेल भी भेजा गया था। अब फिर से फर्जीवाड़ा सामने आया है।