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Agra News: ठंड में नहीं डिगी आस्था, श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी
Fri, 13 Dec 2024 01:17 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Fri, 13 Dec 2024 01:17 AM IST
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- बृहस्पतिवार को 7 डिग्री तापमान रहा, ठंडी हवा भी चल रही थी
- भगवान वराह के मोक्ष दिवस पर महामंडेलश्वर व भक्तों ने गंगा में किया स्नान
- हरि की पौड़ी पर गंगास्नान करने के लिए दोपहर तक उमड़ी थी श्रद्धालुओं भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
सोरोंजी। भगवान वराह के मोक्ष दिवस व मार्गशीर्ष द्वादशी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। हालांकि तापमान 7 डिग्री था और ठंडी हवा भी चल रही थी, इसके बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था नहीं डिगी, हर हर गंगे और जय वराह का जयकारा लगाते गंगा में डुबकी लगाए। परंपरा के अनुसार श्रीवराह मंदिर के पास बने वराहघाट पर सबसे पहले भगवान वराह मंदिर के महामंडलेश्वर आशुतोषानंद गिरि, महंत विदेहानंद गिरि, स्वामी प्रकाशानंद गिरि ने स्नान किया। महंथ गाजे-बाजे के साथ मंदिर परिसर से अपने शिष्यों के साथ गंगा स्नान के लिए घाट पर पहुंचे।
महामंडलेश्वर व महंत के गंगा में डुबकी लगाते ही भगवान वराह की जय जयकार होने लगी, भगवान वराह का स्मरण करते हुए अन्य श्रद्धालुओं ने भी गंगा में डुबकी लगाना शुरू कर दिया। वराह घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर गंगा स्नान किया और पुण्य लाभ अर्जित किया। मेला देखने पहुंचे अन्य श्रद्धालुओं ने वराह घाट के अलावा अन्य घाटों पर गंगा में स्नान करके पुण्य लाभ अर्जित किया।
दोपहर तक गंगा स्नान का सिलसिला चलता रहा। अन्य प्रांतों से आने वाले श्रद्धालुओं ने गंगाघाट पर पहुंचकर स्नान किया। वहीं गंगाघाटों पर धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने वराह मंदिर में पहुंचकर भगवान वराह के दर्शन किए व आरती उतारी।
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संतों ने लुटाया खजाना, तो भक्तों में दिखी खजाना लूटने की होड़
सोरोंजी। वराह घाट पर गंगा स्नान के बाद वराह मंदिर के महंत व महामंडलेश्वर ने भगवान वराह की विश्राम छतरी के नीचे खड़े होकर श्रद्धालुओं की तरफ खजाना रूपी सिक्के उछाले। संतों द्वारा उछाले जा रहे सिक्के को पाने की लोगों में होड़ मची थी। श्रद्धालुओं में मान्यता है कि यह सिक्के अपने गल्ले या तिजोरी में रखने पर धन की वृद्धि होती है।
श्रद्धालु प्राप्त सिक्कों को माथे से लगाकर भगवान वराह की जय बोलते हुए रख रहे थे। महामंडलेश्वर आशुतोषानंद गिरि ने बताया कि प्राचीन काल मे मुगल शासनकाल में विध्वंश हुए इस मंदिर का नेपाल नरेश ने जीर्णोद्धार कराया था। नेपाल नरेश इस महापर्व पर चांदी सोने के सिक्के की वर्षा करते थे तभी से यह परंपरा चली आ रही है।फोटो संख्या 22, 23,26 प्रेषित है-
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- भगवान वराह के मोक्ष दिवस पर महामंडेलश्वर व भक्तों ने गंगा में किया स्नान
- हरि की पौड़ी पर गंगास्नान करने के लिए दोपहर तक उमड़ी थी श्रद्धालुओं भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
सोरोंजी। भगवान वराह के मोक्ष दिवस व मार्गशीर्ष द्वादशी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। हालांकि तापमान 7 डिग्री था और ठंडी हवा भी चल रही थी, इसके बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था नहीं डिगी, हर हर गंगे और जय वराह का जयकारा लगाते गंगा में डुबकी लगाए। परंपरा के अनुसार श्रीवराह मंदिर के पास बने वराहघाट पर सबसे पहले भगवान वराह मंदिर के महामंडलेश्वर आशुतोषानंद गिरि, महंत विदेहानंद गिरि, स्वामी प्रकाशानंद गिरि ने स्नान किया। महंथ गाजे-बाजे के साथ मंदिर परिसर से अपने शिष्यों के साथ गंगा स्नान के लिए घाट पर पहुंचे।
महामंडलेश्वर व महंत के गंगा में डुबकी लगाते ही भगवान वराह की जय जयकार होने लगी, भगवान वराह का स्मरण करते हुए अन्य श्रद्धालुओं ने भी गंगा में डुबकी लगाना शुरू कर दिया। वराह घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर गंगा स्नान किया और पुण्य लाभ अर्जित किया। मेला देखने पहुंचे अन्य श्रद्धालुओं ने वराह घाट के अलावा अन्य घाटों पर गंगा में स्नान करके पुण्य लाभ अर्जित किया।
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दोपहर तक गंगा स्नान का सिलसिला चलता रहा। अन्य प्रांतों से आने वाले श्रद्धालुओं ने गंगाघाट पर पहुंचकर स्नान किया। वहीं गंगाघाटों पर धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने वराह मंदिर में पहुंचकर भगवान वराह के दर्शन किए व आरती उतारी।
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संतों ने लुटाया खजाना, तो भक्तों में दिखी खजाना लूटने की होड़
सोरोंजी। वराह घाट पर गंगा स्नान के बाद वराह मंदिर के महंत व महामंडलेश्वर ने भगवान वराह की विश्राम छतरी के नीचे खड़े होकर श्रद्धालुओं की तरफ खजाना रूपी सिक्के उछाले। संतों द्वारा उछाले जा रहे सिक्के को पाने की लोगों में होड़ मची थी। श्रद्धालुओं में मान्यता है कि यह सिक्के अपने गल्ले या तिजोरी में रखने पर धन की वृद्धि होती है।
श्रद्धालु प्राप्त सिक्कों को माथे से लगाकर भगवान वराह की जय बोलते हुए रख रहे थे। महामंडलेश्वर आशुतोषानंद गिरि ने बताया कि प्राचीन काल मे मुगल शासनकाल में विध्वंश हुए इस मंदिर का नेपाल नरेश ने जीर्णोद्धार कराया था। नेपाल नरेश इस महापर्व पर चांदी सोने के सिक्के की वर्षा करते थे तभी से यह परंपरा चली आ रही है।फोटो संख्या 22, 23,26 प्रेषित है-