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कानपुर विश्वविद्यालय की तर्ज पर यहां भी बनाए जाएंगे परीक्षा केंद्र
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आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर परीक्षाएं कराने के लिए छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर की तर्ज पर केंद्र बनाए जाएंगे। पहले चरण में कॉलेजों की जियो टैगिंग कराई जाएगी। उपलब्ध संसाधनों और दूरी को देखते हुए केंद्रों का निर्धारण किया जाएगा। प्रभारी कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने रविवार को विश्वविद्यालय के चार शिक्षकों को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में परीक्षा केंद्र निर्धारण की व्यवस्था देखने के लिए बुलाया। इनके साथ बैठक भी की।
कानपुर विश्वविद्यालय में परीक्षा केंद्र निर्धारण का काम साफ्टवेयर के माध्यम से किया जाता है। पहले कॉलेजों की जियो टैगिंग कराई जाती है। परीक्षा केंद्र निर्धारण में व्यक्ति विशेष का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। कॉलेजों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी केंद्र निर्धारण का आधार होती है। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परीक्षा में केंद्र बनाने के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। जियो टैगिंग के दौरान कॉलेजों की ओर से कक्ष संख्या, फर्नीचर आदि के संबंध में दी गई जानकारियों को टीम बनाकर सत्यापन करा लिया जाता है। इसके बाद परीक्षा केंद्रों का निर्धारण साफ्टवेयर के माध्यम से बोर्ड स्तर से ही किया जाता है।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि कानपुर विश्वविद्यालय की परीक्षा केंद्र निर्धारण प्रक्रिया को समझने के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. अजय तनेजा, डीन एकेडमिक प्रो. संजीव कुमार, डीन फैकल्टी प्रो. वीके सारस्वत और प्रो. संजय चौधरी गए थे।
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बैठक में प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि सॉफ्टवेयर के माध्यम से परीक्षा केंद्र निर्धारित करने पर केंद्र दूर बनाने की शिकायतें नहीं आएंगी। आमतौर कॉलेजों की ओर से आपत्ति दर्ज कराई जाती है कि उनके यहां के छात्र-छात्राओं का केंद्र 50 से 60 किलोमीटर दूर बना दिया गया है। उसी आधार पर केंद्र बदलवाने का प्रयास किया जाता है। जियो टैगिंग होने से इस समस्या का समाधान भी ऑनलाइन ही किया जा सकेगा।
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कानपुर विश्वविद्यालय में परीक्षा केंद्र निर्धारण का काम साफ्टवेयर के माध्यम से किया जाता है। पहले कॉलेजों की जियो टैगिंग कराई जाती है। परीक्षा केंद्र निर्धारण में व्यक्ति विशेष का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। कॉलेजों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी केंद्र निर्धारण का आधार होती है। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परीक्षा में केंद्र बनाने के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। जियो टैगिंग के दौरान कॉलेजों की ओर से कक्ष संख्या, फर्नीचर आदि के संबंध में दी गई जानकारियों को टीम बनाकर सत्यापन करा लिया जाता है। इसके बाद परीक्षा केंद्रों का निर्धारण साफ्टवेयर के माध्यम से बोर्ड स्तर से ही किया जाता है।
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विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि कानपुर विश्वविद्यालय की परीक्षा केंद्र निर्धारण प्रक्रिया को समझने के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. अजय तनेजा, डीन एकेडमिक प्रो. संजीव कुमार, डीन फैकल्टी प्रो. वीके सारस्वत और प्रो. संजय चौधरी गए थे।
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बैठक में प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि सॉफ्टवेयर के माध्यम से परीक्षा केंद्र निर्धारित करने पर केंद्र दूर बनाने की शिकायतें नहीं आएंगी। आमतौर कॉलेजों की ओर से आपत्ति दर्ज कराई जाती है कि उनके यहां के छात्र-छात्राओं का केंद्र 50 से 60 किलोमीटर दूर बना दिया गया है। उसी आधार पर केंद्र बदलवाने का प्रयास किया जाता है। जियो टैगिंग होने से इस समस्या का समाधान भी ऑनलाइन ही किया जा सकेगा।