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अपनों के बीच आज भी अमर हैं वीर शहीद
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े23एमएनपी-28-अपने मित्र के साथ शहीद हेमचरन का फाइल फोटो
- फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। देश की खातिर अपनों को छोड़कर देश की सीमा पर गए वीर शहीद भले ही वापस अपने गांव न लौट पाए हों। लेकिन अपनों के बीच आज भी उनकी वीरता की चर्चा होती है। किसी की मां अपने लाडले को याद कर भावुक हो जाती है तो किसी की पत्नी और भाई वीर शहीद की यादों में खो जाते हैं।
मैनपुरी ब्लाक क्षेत्र के ग्राम अंजनी निवासी सिपाही प्रवीन कुमार ने कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते हुए तीन जून 1999 को शहादत पाई थी। शहीद प्रवीन का बेटा अमित बताता है कि उसके पिता ने बचपन में उससे कहा था कि बेटा कभी किसी को कष्ट मत देना। हमेशा गरीबों की मदद करना। पिता का वह संदेश आज भी मुझे याद है। जब भी कोई जरूरतमंद मेरे पास मदद के लिए आता है तो मैं उसकी मदद अवश्य करता हूं।
कारगिल युद्ध के दौरान तीन जुलाई 1999 को किशनी के गांव दिवनपुर साहिनी निवासी अमरुद्दीन शहीद हो गए थे। शहीद की पत्नी मोमना बेगम का कहना है कि पति ही शहादत पर मुझे गर्व है। पति हमेशा कहते थे कि मानव जीवन में अनेक कठिनाइयां आती हैं। मानव अकेला आया है और उसे जाना भी अकेला पड़ता है। जीवन में कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। पति की इसी प्रेरणा से मैं अपने बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव कार्य कर रही हूं।
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शहीद हेमचरन की याद में दोस्त राजकुमार की भर आती हैं आंखें
औंछा क्षेत्र के ग्राम नगला आंध्रा निवासी हेमचरण कारगिल की लड़ाई में 23 जुलाई 1999 को शहीद हो गए थे। पड़रिया चौराहा निवासी उनके मित्र राजकुमार बताते हैं कि हेमचरण बचपन से ही बहादुर थे। हमेशा वह सेना में जाने की बात कहा करते थे। राजकुमार बताते हैं कि हेमचरन जब भी छुट्टी आते थे तो उससे अवश्य मिलते थे। वे बताते हैं कि हेमचरन बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे। वह सेना में भर्ती हो गए और मैं शिक्षामित्र बन गया। हेमचरन की याद में राजकुमार की आखें भर आती हैं।
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मैनपुरी ब्लाक क्षेत्र के ग्राम अंजनी निवासी सिपाही प्रवीन कुमार ने कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते हुए तीन जून 1999 को शहादत पाई थी। शहीद प्रवीन का बेटा अमित बताता है कि उसके पिता ने बचपन में उससे कहा था कि बेटा कभी किसी को कष्ट मत देना। हमेशा गरीबों की मदद करना। पिता का वह संदेश आज भी मुझे याद है। जब भी कोई जरूरतमंद मेरे पास मदद के लिए आता है तो मैं उसकी मदद अवश्य करता हूं।
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कारगिल युद्ध के दौरान तीन जुलाई 1999 को किशनी के गांव दिवनपुर साहिनी निवासी अमरुद्दीन शहीद हो गए थे। शहीद की पत्नी मोमना बेगम का कहना है कि पति ही शहादत पर मुझे गर्व है। पति हमेशा कहते थे कि मानव जीवन में अनेक कठिनाइयां आती हैं। मानव अकेला आया है और उसे जाना भी अकेला पड़ता है। जीवन में कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। पति की इसी प्रेरणा से मैं अपने बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव कार्य कर रही हूं।
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शहीद हेमचरन की याद में दोस्त राजकुमार की भर आती हैं आंखें
औंछा क्षेत्र के ग्राम नगला आंध्रा निवासी हेमचरण कारगिल की लड़ाई में 23 जुलाई 1999 को शहीद हो गए थे। पड़रिया चौराहा निवासी उनके मित्र राजकुमार बताते हैं कि हेमचरण बचपन से ही बहादुर थे। हमेशा वह सेना में जाने की बात कहा करते थे। राजकुमार बताते हैं कि हेमचरन जब भी छुट्टी आते थे तो उससे अवश्य मिलते थे। वे बताते हैं कि हेमचरन बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे। वह सेना में भर्ती हो गए और मैं शिक्षामित्र बन गया। हेमचरन की याद में राजकुमार की आखें भर आती हैं।