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गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भाजपा सांसद व एससी आयोग अध्यक्ष ने किया कोर्ट में समर्पण
Thu, 14 Nov 2019 10:22 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 14 Nov 2019 10:22 AM IST
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रामशंकर कठेरिया
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एससपी आयोग के चेयरमेन व इटावा के सांसद राम शंकर कठेरिया ने 2009, 2010, 2011 के तीन मामलों में बुधवार को स्पेशल जज (एमपी/ एमएलए) उमाकांत जिंदल की कोर्ट में सरेंडर (समर्पण) कर दिया।
लंबे समय से तारीख पर गैर हाजिर चलने के कारण उनके गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। इस बार कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें मुचलके दाखिल होने तक लगभग ढाई घंटे बैठाए रखा। इसके बाद इस शर्त पर वारंट वापस लेकर छोड़ा कि वह मुकदमों की हर तारीख पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होंगे।
प्रो. कठेरिया दोपहर साढ़े बारह बजे कोर्ट पहुंचे। उनका केस तुरंत ही सुनवाई पर आ गया। जज ने कहा, आप मुचलके स्वीकृत होने और आदेश जारी तक कोर्ट से बाहर नहीं जाएंगे।
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लंबे समय से तारीख पर गैर हाजिर चलने के कारण उनके गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। इस बार कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें मुचलके दाखिल होने तक लगभग ढाई घंटे बैठाए रखा। इसके बाद इस शर्त पर वारंट वापस लेकर छोड़ा कि वह मुकदमों की हर तारीख पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होंगे।
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प्रो. कठेरिया दोपहर साढ़े बारह बजे कोर्ट पहुंचे। उनका केस तुरंत ही सुनवाई पर आ गया। जज ने कहा, आप मुचलके स्वीकृत होने और आदेश जारी तक कोर्ट से बाहर नहीं जाएंगे।
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सहायक जिला शासीय अधिवक्ता (एडीजीसी) ताराचंद यादव ने बताया कि दोपहर तीन बजे आदेश जारी किया गया। कठेरिया ने कोर्ट में यह लिखकर दिया है कि वह भविष्य में हर तारीख पर हाजिर होंगे।
कठेरिया इटावा से पहले आगरा के दो बार सांसद रहे हैं। वह डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के संस्थान कन्हैयालाल माणिक लाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
कठेरिया इटावा से पहले आगरा के दो बार सांसद रहे हैं। वह डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के संस्थान कन्हैयालाल माणिक लाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
छह और भाजपाइयों ने किया समपर्ण
इन तीन मामलों में छह और भाजपाइयों ने भी कठेरिया के साथ ही सरेंडर किया। इन्हें भी ढाई घंटे बिठाए रखा गया। बाद में सशर्त छोड़ा। ये आरोपी गजराज सिंह, सुमित कटियार, मोहन सिंह चाहर, अनिल चौधरी, महेन्द्र सिंह सिकरवार और मनोज राजौरा हैं।
ये हैं मामले
1. 26 सितंबर 2009 को हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग लेकर राजामंडी स्टेशन पर ट्रेन रोकी। आरपीएफ ने केस दर्ज कराया था।
2. 17 मार्च 2010 को शहीद नगर में दूसरे समुदाय के प्रति आपत्तिजनक और भड़काऊ शब्द बोलने का आरोप। इसके बाद बवाल होने
पर फायरिंग करने का आरोप।
3. 28 जनवरी 2011 को बगैर अनुमति कलक्ट्रेट का घेराव कर जाम लगाया। मांग थी 2010 में बरहन में उनके खिलाफ दर्ज जाम
लगाने का मुकदमा वापस लिए जाने की।
इन तीन मामलों में छह और भाजपाइयों ने भी कठेरिया के साथ ही सरेंडर किया। इन्हें भी ढाई घंटे बिठाए रखा गया। बाद में सशर्त छोड़ा। ये आरोपी गजराज सिंह, सुमित कटियार, मोहन सिंह चाहर, अनिल चौधरी, महेन्द्र सिंह सिकरवार और मनोज राजौरा हैं।
ये हैं मामले
1. 26 सितंबर 2009 को हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग लेकर राजामंडी स्टेशन पर ट्रेन रोकी। आरपीएफ ने केस दर्ज कराया था।
2. 17 मार्च 2010 को शहीद नगर में दूसरे समुदाय के प्रति आपत्तिजनक और भड़काऊ शब्द बोलने का आरोप। इसके बाद बवाल होने
पर फायरिंग करने का आरोप।
3. 28 जनवरी 2011 को बगैर अनुमति कलक्ट्रेट का घेराव कर जाम लगाया। मांग थी 2010 में बरहन में उनके खिलाफ दर्ज जाम
लगाने का मुकदमा वापस लिए जाने की।