{"_id":"639d916aca35453f172508c1","slug":"epidemic-like-corona-had-come-150-years-ago-municipality-had-got-vaccine-agra","type":"story","status":"publish","title_hn":"यादें: 150 साल पहले भी आई थी कोरोना की तरह महामारी, नगर पालिका ने लगवाई थी वैक्सीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यादें: 150 साल पहले भी आई थी कोरोना की तरह महामारी, नगर पालिका ने लगवाई थी वैक्सीन
Sat, 17 Dec 2022 03:22 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमित कुलश्रेष्ठ, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 17 Dec 2022 03:22 PM IST
सार
आगरा म्यूनिसिपलिटी के लिए बुखार, मलेरिया, न्यूमोनिया, कॉलरा, चेचक और प्लेग मुसीबत बनकर आया। वर्ष 1905 के आगरा गजेटियर में दर्ज है कि सबसे पहले चेचक महामारी बनकर आया। आगरा म्यूनिसिपलिटी ने साल 1872 में टीकाकरण शुरू कराया।
विज्ञापन
नगर निगम की इमारत
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना महामारी के दौरान दो साल में सरकारी आंकड़ों में 37140 लोग संक्रमित हुए, जिनमें से 467 लोगों की मौत हुई, लेकिन ताजनगरी में 150 साल पहले जब पहली महामारी 1872 में चेचक के रूप में आई तो सालभर में 1177 लोगों की मौत हुई। तब आगरा नगर पालिका ने वैक्सीन लगवाने की शुरूआत की।
चेचक की महामारी रोकने के लिए पूरे जिले के लोगों को वैक्सीन लगाने में 32 साल का समय लग गया। वर्ष 1872 से शुरू हुआ वैक्सीनेशन 1904 तक चला। असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट वैक्सीनेशन के साथ 20 वैक्सीनेटरों की टीम ने टीके लगाए। वैक्सीन के प्रति डर को देखते हुए वर्ष 1890 में वैक्सीन को अनिवार्य करने का कानून बनाया गया।
आगरा म्यूनिसिपलिटी के लिए बुखार, मलेरिया, न्यूमोनिया, कॉलरा, चेचक और प्लेग मुसीबत बनकर आया। वर्ष 1905 के आगरा गजेटियर में दर्ज है कि सबसे पहले चेचक महामारी बनकर आया। आगरा म्यूनिसिपलिटी ने साल 1872 में टीकाकरण शुरू कराया। वर्ष 1884 तक 15,100 लोगों को हर साल टीके लगवाए गए। वर्ष 1885 से 1904 के बीच 34300 लोगों के औसत से वैक्सीन लगाई गई। आगरा म्यूनिसिपलिटी ने वर्ष 1890 में एक्ट बनने के बाद वैक्सीन लगाने में तेजी दिखाई। 32 साल में पूरे टीकाकरण के बाद चेचक से होने वाली मौतें 162 तक रह गईं। शहरी क्षेत्र के बाद गांव में 15 वैक्सीनेटरों की ड्यूटी लगाई गई। इस वैक्सीनेशन पर 3500 रुपये का खर्च उस वक्त आया था। केवल चेचक नहीं, बल्कि कॉलरा भी 1878 से 1897 के बीच आगरा म्यूनिसिपलिटी के लिए परेशानी लेकर आया। हर साल जुलाई अगस्त में मानसून के दौरान यह खतरनाक महामारी बनने लगी।
विज्ञापन
चेचक के बाद वर्ष 1900 में प्लेग का पहला मामला आगरा शहर में आया। इस साल प्लेग से दो मौत हुई, पर वर्ष 1904 के दिसंबर में मथुरा से प्लेग फैला और यह आगरा में इस कदर तक महामारी बन गया कि हर सप्ताह 2000 लोगों की मौत इससे होने लगीं। वर्ष 1905, 1934 और 1935 में प्लेग बेहद खतरनाक रहा। शहर में म्यूनिसिपलिटी के कर्मचारियों और गांव में पटवारियों की ड्यूटी इस महामारी को रोकने में लगी थी।
विज्ञापन
चेचक की महामारी रोकने के लिए पूरे जिले के लोगों को वैक्सीन लगाने में 32 साल का समय लग गया। वर्ष 1872 से शुरू हुआ वैक्सीनेशन 1904 तक चला। असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट वैक्सीनेशन के साथ 20 वैक्सीनेटरों की टीम ने टीके लगाए। वैक्सीन के प्रति डर को देखते हुए वर्ष 1890 में वैक्सीन को अनिवार्य करने का कानून बनाया गया।
विज्ञापन
आगरा म्यूनिसिपलिटी के लिए बुखार, मलेरिया, न्यूमोनिया, कॉलरा, चेचक और प्लेग मुसीबत बनकर आया। वर्ष 1905 के आगरा गजेटियर में दर्ज है कि सबसे पहले चेचक महामारी बनकर आया। आगरा म्यूनिसिपलिटी ने साल 1872 में टीकाकरण शुरू कराया। वर्ष 1884 तक 15,100 लोगों को हर साल टीके लगवाए गए। वर्ष 1885 से 1904 के बीच 34300 लोगों के औसत से वैक्सीन लगाई गई। आगरा म्यूनिसिपलिटी ने वर्ष 1890 में एक्ट बनने के बाद वैक्सीन लगाने में तेजी दिखाई। 32 साल में पूरे टीकाकरण के बाद चेचक से होने वाली मौतें 162 तक रह गईं। शहरी क्षेत्र के बाद गांव में 15 वैक्सीनेटरों की ड्यूटी लगाई गई। इस वैक्सीनेशन पर 3500 रुपये का खर्च उस वक्त आया था। केवल चेचक नहीं, बल्कि कॉलरा भी 1878 से 1897 के बीच आगरा म्यूनिसिपलिटी के लिए परेशानी लेकर आया। हर साल जुलाई अगस्त में मानसून के दौरान यह खतरनाक महामारी बनने लगी।
विज्ञापन