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Agra News: करोड़ों की कोठी में अकेली बुजुर्ग महिला, कब हुई मौत किसी को पता नहीं, अब मिला कंकाल
Sat, 18 Feb 2023 07:19 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 18 Feb 2023 07:19 AM IST
सार
घर में कमरे में कंकाल मिला था। वह फर्श पर पड़ा हुआ था। कमरे में बेड भी था। इससे आशंका है कि वह काम से उठी होंगी। इस दौरान ही गिर गईं और मौत हो गई।
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कंकाल (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
आगरा के नॉर्थ विजय नगर काॅलोनी में करोड़ों की कोठी में अकेली रहने वाली वृद्धा की कब मौत हो गई, किसी को पता ही नहीं चला। गाजियाबाद से जब उनका भाई लंबे समय बाद मिलने आया तब जानकारी हो सकी। उसने बताया कि 65 वर्षीय निर्मल देवी काफी होनहार थीं। उन्होंने डाॅक्टरेट की डिग्री हासिल कर रखी थी। उनके पिता गोपाल की खराद की फैक्टरी थी। काम अच्छा चलता था। पिता की 20 साल पहले और मां की ढाई साल पहले मौत के बाद निर्मल एकाकी जीवनी जी रही थीं। उन्होंने अपने सौतेले भाइयों और बहन से दूरी बना रखी थी। इस कारण वो अपनों के लिए भी पराई बन गई थीं। यही वजह थी कि उनकी मौत का पता तब चला जब उनकी लाश कंकाल में बदल गई।
निर्मल देवी कोठी नंबर 67 में रहती थीं। उनसे मिलने के लिए बृहस्पतिवार को उनके भाई रणवीर सिंह आए थे। वह लोनी, गाजियाबाद के रहने वाले हैं। दरवाजा नहीं खुलने पर उन्होंने पुलिस को बताया था। घर में निर्मल का कंकाल मिला था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि पिता गोपाल की फाउंड्रीनगर में खराद की फैक्टरी थी। उन्होंने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी स्वरूप देवी से उनके अलावा भाई सुरेंद्र, सुरेंशचंद, सूरजभान और बहन प्रवेश थीं। बचपन में मां की मौत हो गई। इस कारण पिता ने होशियारी देवी से दूसरी शादी कर ली। उनके साथ नार्थ विजयनगर काॅलोनी में रहने लगे। वो गाजियाबाद में रहने चले गए।
पिता के दूसरी पत्नी से एक बेटी निर्मल थीं। वह पढ़ने में काफी होशियार थीं। उन्होंने पीएचडी कर ली। इसके बाद शादी नहीं की। पिता जब तक थे, तब तक वो घर आते थे। लेकिन, 20 साल पहले उनकी मौत हो गई। इस पर आना जाना बंद कर दिया। होशियारी देवी की मौत के बाद बहन की चिंता सताने लगी। वह मिलने आते थे, लेकिन वो दरवाजा नहीं खोलती थीं। इस कारण लौट जाते थे।
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निर्मल देवी कोठी नंबर 67 में रहती थीं। उनसे मिलने के लिए बृहस्पतिवार को उनके भाई रणवीर सिंह आए थे। वह लोनी, गाजियाबाद के रहने वाले हैं। दरवाजा नहीं खुलने पर उन्होंने पुलिस को बताया था। घर में निर्मल का कंकाल मिला था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि पिता गोपाल की फाउंड्रीनगर में खराद की फैक्टरी थी। उन्होंने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी स्वरूप देवी से उनके अलावा भाई सुरेंद्र, सुरेंशचंद, सूरजभान और बहन प्रवेश थीं। बचपन में मां की मौत हो गई। इस कारण पिता ने होशियारी देवी से दूसरी शादी कर ली। उनके साथ नार्थ विजयनगर काॅलोनी में रहने लगे। वो गाजियाबाद में रहने चले गए।
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पिता के दूसरी पत्नी से एक बेटी निर्मल थीं। वह पढ़ने में काफी होशियार थीं। उन्होंने पीएचडी कर ली। इसके बाद शादी नहीं की। पिता जब तक थे, तब तक वो घर आते थे। लेकिन, 20 साल पहले उनकी मौत हो गई। इस पर आना जाना बंद कर दिया। होशियारी देवी की मौत के बाद बहन की चिंता सताने लगी। वह मिलने आते थे, लेकिन वो दरवाजा नहीं खोलती थीं। इस कारण लौट जाते थे।
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