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UP: भाई की मौत पर इंसाफ मांग रहे होमगार्ड ने दे दी जान, पुलिस उत्पीड़न से थे परेशान; एक ही पेड़ पर लगाई फांसी

Mon, 24 Jun 2024 08:36 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 24 Jun 2024 08:36 PM IST
सार

पुलिस की प्रताड़ना से आजिज आकर जिस पेड़ पर छोटे भाई ने फांसी लगाई थी। पेड़ की उसी टहनी से लटककर बड़े भाई ने भी सुसाइड कर लिया। वह भाई के आरोपियों पर कार्रवाई होने से परेशान था। 

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elder brother hanged himself same tree which brother hanged himself In Agra Both fed up with police harassment
आत्महत्या। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में सादाबाद पुलिस के उत्पीड़न से परेशान होकर दो दिन पहले आत्महत्या करने वाले किसान संजय के होमगार्ड भाई प्रमोद ने भी जान दे दी। वह भाई की मौत पर इंसाफ के लिए पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे। पुलिसकर्मियों के खिलाफ भाई को आत्महत्या के लिए उकसाने की तहरीर दी थी। सुनवाई न होने से आहत होकर हाथ में सुसाइड नोट लेकर जान दे दी।

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बरहन के गांव रूपधनु में सोमवार अपराह्न 3 बजे होमगार्ड का शव उसी जगह खेत में पेड़ पर फंदे से लटका मिला, जहां छोटे भाई संजय ने जान दी थी। जानकारी पर मृतक के परिजन और कुछ ही देर में पुलिस पहुंच गई। ग्रामीणों ने बरहन पुलिस पर केस दर्ज नहीं करने के आरोप लगाए। दोनों भाइयों का उत्पीड़न करने वाले विवेचक को घटनास्थल पर बुलाने की मांग की। पुलिस ने शव उठाना चाहा तो ग्रामीण भड़क गए। हंगामा करने लगे। पुलिस से हाथापाई और धक्का-मुक्की हुई।

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किसान संजय ने शनिवार सुबह खुदकुशी की थी, तब भाई प्रमोद ने आरोप लगाया था कि साले के एक लड़की के साथ जाने पर संजय को सादाबाद थाने की पुलिस परेशान कर रही थी। 8 जून को घर में दबिश देकर संजय को पकड़ा, थाने ले जाकर थर्ड डिग्री दी। 10 जून को 50 हजार रुपये रिश्वत लेने के बाद छोड़ा। 11 को सादाबाद पुलिस एक बार फिर आई। इस बार प्रमोद और उनके बेटे को ले गई। उन्हें भी रिश्वत लेने के बाद छोड़ा। पुलिस उत्पीड़न से परेशान होकर संजय ने आत्महत्या की थी।
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काट रहे थे अधिकारियों के चक्कर

पिता चरन सिंह का कहना है कि सादाबाद थाने के पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज कराने की मांग अधिकारियों से की थी। मगर, बरहन पुलिस को तहरीर दी। एसओ सहित अन्य ने सादाबाद में जांच का हवाला देकर टाल दिया। केस दर्ज नहीं किया। प्रमोद तनाव में थे। वह अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक के चक्कर काट रहे थे। 
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उन्होंने बताया कि प्रमोद सोमवार सुबह क्षेत्रीय विधायक डाॅ. धर्मपाल सिंह से मिलने की कहकर घर से निकले थे। दोपहर में 12 बजे घर लौटे, काफी डरे दिख रहे थे। करीब 3 बजे खेत पर बिजली का तार ठीक करने आए कर्मचारी ने प्रमोद का शव फंदे से लटका देखा।

रात तक नहीं उतरने दिया शव

ग्रामीणों ने परिजन को सूचना दी। प्रमोद के हाथ में धागे से कागज भी बंधा था। रात नौ बजे तक शव नहीं उतरने दिया गया। ग्रामीणों की मांग दी थी कि दरोगा हरिओम अग्निहोत्री को बुलाया जाए। उनसे ही शव को उतरवाया जाएगा।

छावनी में बदला रूपधनु गांव

एसीपी एत्मादपुर डॉ. सुकन्या शर्मा ग्रामीणों को समझाने में लगी थीं। बवाल की आशंका पर पीएसी को भी बुला लिया गया। पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया। ग्रामीण शव को नहीं ले जाने दे रहे थे। पुलिस के एक बार प्रयास करने पर धक्का-मुक्की और हाथापाई तक कर दी। विधायक डाॅ. धर्मपाल सिंह ने भी वार्ता की। केस दर्ज कराने का आश्वासन दिया गया है।
 

सादाबाद पुलिस कर रही थी फोन

परिजन ने आरोप लगाया कि घटना के बाद सादाबाद पुलिस के फोन आ रहे थे। प्रमोद को बुलाया जा रहा था। बयान के लिए कह रहे थे। इस पर प्रमोद को लग रहा था कि पुलिस कहीं फंसा नहीं दे। शिकायत करने पर कोई गलती तो नहीं कर दी। आगरा पुलिस भी नहीं सुन रही थी। थक-हारकर वह अधिकारियों के पास भी गया, लेकिन न्याय नहीं मिला। इस कारण बहुत परेशान हो गए। घर से निकलने के बाद आत्महत्या कर ली।
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