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चिंतन का विषय: एक माह में आठ गर्भवती महिलाओं तो 14 शिशुओं ने तोड़ा दम, सरकारी योजनाएं कैसें चढ़ेंगी परवान ?

Thu, 01 Jun 2023 01:34 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 01 Jun 2023 01:34 PM IST
सार

आगरा में एक माह में आठ गर्भवती महिलाओं तो 14 शिशुओं की मौत हो गई। इससे स्वास्थ्य विभाग की व्यस्थाएं बदहाल नजर आ रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि सरकारी योजनाएं कैसें परवान चढ़ेंगी ?
 

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Eight pregnant women and fourteen babies died in a month in Agra
एसएन मेडिकल कालेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव के दौरान गर्भवतियों की मौत का सिलसिला नहीं थम रहा। अप्रैल माह में आठ गर्भवतियों ने दम तोड़ दिया। ये स्थिति तब है जब शत-प्रतिशत प्रसव सिजेरियन कराने के आदेश हैं। वहीं इसी माह में 14 शिशुओं की भी मौत ने चिंता में डाल दिया है।

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जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल की अध्यक्षता में बुधवार को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में यह खुलासा हुआ। अप्रैल माह में फतेहपुर सीकरी में दो, एसएन मेडिकल कॉलेज में चार, अकोला और जैतपुर में एक-एक गर्भवती की मृत्यु हो गई। डीएम ने इस पर नाराजगी जाहिर की। बताया गया कि मातृ मृत्यु के संभावित कारण खून की कमी, हार्ट फेल होना आदि रहे। एसएन मेडिकल कॉलेज में अप्रैल माह में 14 शिशुओं की भी मौत हुई। डीएम ने इस संबंध में एसएन मेडिकल कॉलेज प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा।
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डीएम ने दिए कार्रवाई के आदेश

आयुष्मान कार्ड बनाने की धीमी प्रगति पर भी डीएम ने कार्रवाई के आदेश दिए हैं। साथ ही बैठक से स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक के गैरहाजिर रहने पर वेतन काटने का आदेश दिया। 15 ब्लॉकों की समीक्षा में आयुष्मान, नसबंदी, मातृ वंदना, कायाकल्प व अन्य स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं में खराब प्रदर्शन पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया। बैठक में सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव, डॉ. संजीव वर्मन, यूनिसेफ के अरविंद शर्मा आदि मौजूद रहे।


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आशाओं के खिलाफ होगी एफआईआर

जिले में आशाओं की संख्या बढ़ी है, लेकिन सिजेरियन प्रसव कम हुए। आशाओं पर निजी अस्पतालों में प्रसव कराने के आरोप लगे। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने ऐसी आशाओं को चिह्नित कर उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

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