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नकली खाद फैक्टरी से पांच जिलों में की जाती थी सप्लाई
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करहल रोड पर संचालित एक फैक्टरी में जांच करते डीएम व एसपी
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। जिले में मंगलवार को पकड़ी गई नकली खाद फैक्टरी के तार प्रदेश के पांच जिलों से जुड़े थे। धड़ल्ले से इन जिलों में नकली खाद की आपूर्ति की जा रही थी। प्रशासन को जांच में मिले अभिलेखों में अहम सुराग हाथ लगे हैं। इन बिंदुओं पर कृषि विभाग और जिला प्रशासन जांच कर रहा है।
नगला जुला में संचालित नकली खाद की फैक्टरी केवल मैनपुरी में ही नहीं आसपास के अन्य जिलों में भी आपूर्ति कर रही थी। प्रशासन की जांच में ये बात सामने आई है। जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने बताया कि जांच में प्रशासन ने सभी अभिलेख, कैश बुक, बिल वाउचर आदि जब्त कर लिए हैं।
इससे साफ पता चल रहा है कि मैनपुरी के अलावा हरदोई, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, एटा में भी नकली खाद का कारोबार किया जा रहा था। इन जिलों में भी नकली खाद बनाने का अनुमान लगाया जा रहा है। मौके से बरामद सभी अभिलेख विभाग ने जब्त कर लिए हैं, जिनकी गहनता से जांच की जा रही है।
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सूत्रों के अनुसार जल्द ही प्रदेश भर में नकली खाद के रैकेट का खुलासा हो सकता है। हालांकि प्रशासन इस बारे में अभी कुछ भी कहने से बच रहा है। जल्द ही प्रशासन गैर जनपदों में भी संबंधित जिलेे के अधिकारियों के सहयोग से छापेमारी कर सकता है।
दो लाख की सैंड से बनती थी 20 लाख की खाद
नकली खाद फैक्टरी में 42 टन सिलिका सैंड से लदा हुआ ट्रक बरामद हुआ था। कृषि विभाग के अनुसार इसकी कीमत दो लाख रुपये है, लेकिन जो खाद यहां बनाई जा रही थी, उसमें इसी सिलिका सैंड और नमक का मिश्रण किया जा रहा था। इस दो लाख रुपये की सैंड से लगभग 20 लाख रुपये की नकली खाद बन जाती थी।
कहीं डमी तो नहीं है संचालक
प्रारंभिक जांच में बरनाहल निवासी कृष्णवीर का नाम नकली खाद फैक्टरी संचालित करने में सामने आया है। हालांकि प्रशासन को अभी इस पर भी संशय है। क्यों कि मौके पर मौजूद मिले सामान और अभिलेखों से ये साफ है कि ये कारोबार किसी बड़े व्यक्ति का है या उसके संरक्षण में चल रहा है। प्रशासन हर पहलू की गहनता से जांच कर रहा है।
फैक्टरी में नकली खाद बनाई जा रही थी, कृषि विभाग से फर्म का भी कोई लाइसेंस नहीं लिया गया था। मामले की जांच की जा रही है। नकली खाद बनाने वाले कार्रवाई से बच नहीं सकेंगे।
डॉ. गगनदीप सिंह, जिला कृृषि अधिकारी।
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नगला जुला में संचालित नकली खाद की फैक्टरी केवल मैनपुरी में ही नहीं आसपास के अन्य जिलों में भी आपूर्ति कर रही थी। प्रशासन की जांच में ये बात सामने आई है। जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने बताया कि जांच में प्रशासन ने सभी अभिलेख, कैश बुक, बिल वाउचर आदि जब्त कर लिए हैं।
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इससे साफ पता चल रहा है कि मैनपुरी के अलावा हरदोई, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, एटा में भी नकली खाद का कारोबार किया जा रहा था। इन जिलों में भी नकली खाद बनाने का अनुमान लगाया जा रहा है। मौके से बरामद सभी अभिलेख विभाग ने जब्त कर लिए हैं, जिनकी गहनता से जांच की जा रही है।
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सूत्रों के अनुसार जल्द ही प्रदेश भर में नकली खाद के रैकेट का खुलासा हो सकता है। हालांकि प्रशासन इस बारे में अभी कुछ भी कहने से बच रहा है। जल्द ही प्रशासन गैर जनपदों में भी संबंधित जिलेे के अधिकारियों के सहयोग से छापेमारी कर सकता है।
दो लाख की सैंड से बनती थी 20 लाख की खाद
नकली खाद फैक्टरी में 42 टन सिलिका सैंड से लदा हुआ ट्रक बरामद हुआ था। कृषि विभाग के अनुसार इसकी कीमत दो लाख रुपये है, लेकिन जो खाद यहां बनाई जा रही थी, उसमें इसी सिलिका सैंड और नमक का मिश्रण किया जा रहा था। इस दो लाख रुपये की सैंड से लगभग 20 लाख रुपये की नकली खाद बन जाती थी।
कहीं डमी तो नहीं है संचालक
प्रारंभिक जांच में बरनाहल निवासी कृष्णवीर का नाम नकली खाद फैक्टरी संचालित करने में सामने आया है। हालांकि प्रशासन को अभी इस पर भी संशय है। क्यों कि मौके पर मौजूद मिले सामान और अभिलेखों से ये साफ है कि ये कारोबार किसी बड़े व्यक्ति का है या उसके संरक्षण में चल रहा है। प्रशासन हर पहलू की गहनता से जांच कर रहा है।
फैक्टरी में नकली खाद बनाई जा रही थी, कृषि विभाग से फर्म का भी कोई लाइसेंस नहीं लिया गया था। मामले की जांच की जा रही है। नकली खाद बनाने वाले कार्रवाई से बच नहीं सकेंगे।
डॉ. गगनदीप सिंह, जिला कृृषि अधिकारी।