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अंधेरगर्दी: झोपड़ियों में हो रही जिंदगी बसर, 125 करोड़ से बने 3640 आशियाने हो रहे खंडहर; जानें पूरा मामला
Tue, 05 Sep 2023 09:39 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 05 Sep 2023 09:39 AM IST
सार
जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) की बेसिक सर्विसेज फॉर अर्बन पूअर (बीएसयूपी) के तहत डूडा को 5 हजार आवास खंडहर हो गए हैं।
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झोंपड़ी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा के नरायच में बेघरों के लिए 125 करोड़ से बने 3640 घर 14 साल में खंडहर हो गए। ठेकेदार ब्लैक लिस्ट हो चुका है। एफआईआर दर्ज है। एडीए व ठेकेदार के बीच ऑर्बिटेशन वाद चल रहा है। जिसमें 35 बार सुनवाई हो चुकी है, लेकिन नतीजा शून्य है।
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जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) की बेसिक सर्विसेज फॉर अर्बन पूअर (बीएसयूपी) के तहत डूडा को 5 हजार आवास बनाने थे। 2009 में नरायच में एडीए ने 4 मंजिल बिल्डिंग में 3640 आवासों का निर्माण शुरू कराया। 140 करोड़ की लागत से बनने वाले इन आवासों में 75 फीसदी कार्य हो चुका था। 2012 में सूबे में सरकार बदली। 2014 में योजना के लिए बजट आना बंद हो गया। 127 करोड़ रुपये मिले, जिसमें 125 करोड़ रुपये खर्च हो गए। बजट नहीं मिलने से काम बंद होने के कारण पिछले 9 साल में आवास जर्जर हो गए। बीम, स्लैब व दीवारों में दरारें आ गईं।
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एडीए ने ठेकेदार फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया। एफआईआर दर्ज कराई। ठेकेदार फर्म ने एडीए के विरुद्ध ऑर्बिटेशन वाद दायर कर दिया। जिसमें 35 बार सुनवाई हो चुकी है। नतीजा नहीं निकलने के कारण आवासों की मरम्मत व अन्य कार्य नहीं होने से आवंटन नहीं हो पा रहा। इधर, तहसील से लेकर कलेक्ट्रेट तक हर माह 20 से 25 लोग आवास आवंटन के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। इनमें कोई झोपड़ी में रह रहा है, तो कोई कच्चे मकान में।
आईआईटी की जांच भी ठंडे बस्ते में
- नरायच में जर्जर आवासों की एडीए ने आईआईटी विशेषज्ञों से जांच कराई। जांच टीम ने आवासों को रहने लायक नहीं बताया। ध्वस्त करने की रिपोर्ट सौंपी। दूसरी संस्तुति इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए की। डीएम के माध्यम से कार्रवाई के लिए फाइल लखनऊ भेजी गई। तीन साल से फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी है।30 हजार से अधिक आवेदन लंबित
- जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत डूडा की रिपोर्ट के अनुसार 30 हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं। अब योजना के लिए बजट नहीं मिल रहा। उधर, दुर्बल आय वर्ग के लिए अन्य योजनाओं में भी आवासों का आवंटन नहीं हो सका है।