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प्रज्ञा हॉस्पिटल में औषधि विभाग का छापा, दवा की दुकान का लाइसेंस नहीं दिखा सके संचालक, होगी एफआईआर
Wed, 30 Sep 2020 12:13 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 30 Sep 2020 12:13 AM IST
सार
- स्टोर पर नाम भी नहीं था
- संचालक को दिया नोटिस
- औषधि निरीक्षक बोले, कराई जाएगी एफआईआर
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प्रज्ञा हॉस्पिटल में औषधि विभाग का छापा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
औषधि विभाग ने बोदला-सिकंदरा रोड स्थित प्रज्ञा हॉस्पिटल में छापामार कार्रवाई की। यहां टीम को अवैध मेडिकल स्टोर चलता मिला। अस्पताल संचालक ही दवाएं बेच रहा था। औषधि विभाग की टीम ने दवाएं जब्त करते हुए संचालक को नोटिस दिया है।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत मिली कि प्रज्ञा हॉस्पिटल में बिना बिल के दवाएं दी जाती हैं और मनमानी कीमत वसूली जाती हैं। इस पर औषधि विभाग की टीम ने अस्पताल में छापा मारा। पहली मंजिल पर स्टोर संचालित मिला, यहां कोई नाम भी नहीं लिखा था। मौके पर राहुल पाल मिला, उसने खुद को अस्पताल का मालिक बताया। मेडिकल स्टोर का लाइसेंस मांगा तो वह दिखा नहीं पाया।
ये भी पढ़ें- Dr Yogita Gautam Murder Case: जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, आरोपी डॉक्टर विवेक ने इसलिए की थी हत्या
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दवाओं की खरीद-बिक्री के बिल भी प्रस्तुत नहीं कर सका। स्टोर में गंदगी भी थी। दवाओं की गिनती की गई तो यहां 21 तरह की दवाएं मिलीं, इसमें सबसे ज्यादा इंजेक्शन थे, जो गर्भवती और प्रसव कराने के लिए उपयोग किए जाने वाले थे। औषधि निरीक्षक राजकुमार शर्मा ने बताया कि दवाओं की कीमत 15 से 20 हजार रुपये है, इनको सील कर दिया है। नोटिस दिया है, लाइसेंस ओर दवाओं के बिल नहीं दिखा पाने पर एफआईआर की जाएगी।
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मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत मिली कि प्रज्ञा हॉस्पिटल में बिना बिल के दवाएं दी जाती हैं और मनमानी कीमत वसूली जाती हैं। इस पर औषधि विभाग की टीम ने अस्पताल में छापा मारा। पहली मंजिल पर स्टोर संचालित मिला, यहां कोई नाम भी नहीं लिखा था। मौके पर राहुल पाल मिला, उसने खुद को अस्पताल का मालिक बताया। मेडिकल स्टोर का लाइसेंस मांगा तो वह दिखा नहीं पाया।
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दवाओं की खरीद-बिक्री के बिल भी प्रस्तुत नहीं कर सका। स्टोर में गंदगी भी थी। दवाओं की गिनती की गई तो यहां 21 तरह की दवाएं मिलीं, इसमें सबसे ज्यादा इंजेक्शन थे, जो गर्भवती और प्रसव कराने के लिए उपयोग किए जाने वाले थे। औषधि निरीक्षक राजकुमार शर्मा ने बताया कि दवाओं की कीमत 15 से 20 हजार रुपये है, इनको सील कर दिया है। नोटिस दिया है, लाइसेंस ओर दवाओं के बिल नहीं दिखा पाने पर एफआईआर की जाएगी।
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दवाओं की गुणवत्ता जांचने को नहीं लिए नमूने
औषधि विभाग की टीम ने दवाएं सील कर दी, लेकिन इनमें से किसी दवा और इंजेक्शन का नमूना नहीं लिया है। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता की जानकारी नहीं हो पाएगी। औषधि निरीक्षक का कहना है कि इंजेक्शन में नमूने लायक तरल औषधि नहीं थी, इस कारण नमूना नहीं लिया।
सभी अस्पतालों में चल रहे मेडिकल स्टोर की जांच: आशू शर्मा
जिला आगरा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशू शर्मा का कहना है कि अभी और भी ऐसे कई अस्पताल हैं जिनमें बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर चल रहे हैं और मरीजों से मनमानी कीमत ले रहे हैं। पहले बाग फरजाना स्थित सरकार हॉस्पिटल में भी औषधि विभाग ने अवैध मेडिकल स्टोर पकड़ा था।
औषधि विभाग की टीम ने दवाएं सील कर दी, लेकिन इनमें से किसी दवा और इंजेक्शन का नमूना नहीं लिया है। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता की जानकारी नहीं हो पाएगी। औषधि निरीक्षक का कहना है कि इंजेक्शन में नमूने लायक तरल औषधि नहीं थी, इस कारण नमूना नहीं लिया।
सभी अस्पतालों में चल रहे मेडिकल स्टोर की जांच: आशू शर्मा
जिला आगरा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशू शर्मा का कहना है कि अभी और भी ऐसे कई अस्पताल हैं जिनमें बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर चल रहे हैं और मरीजों से मनमानी कीमत ले रहे हैं। पहले बाग फरजाना स्थित सरकार हॉस्पिटल में भी औषधि विभाग ने अवैध मेडिकल स्टोर पकड़ा था।