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जिले में नहीं मिले सूखे के हालात, शासन को भेजी रिपोर्ट
सार
शासन के आदेश पर जिले में गांव-गांव सूखे के आकलन के लिए सर्वे कराया गया था।इस पर शासन ने आदेश दिए थे कि गहनता से गांव-गांव फसलों का निरीक्षण कर सूखे की रिपोर्ट तैयार की जाए।इसके बाद शासन को जिला प्रशासन की ओर से रिपोर्ट भेज दी गई है।
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विस्तार
मैनपुरी। शासन के आदेश पर जिले में गांव-गांव सूखे के आकलन के लिए सर्वे कराया गया था। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जिले में कहीं भी सूखे के हालात नहीं पाए गए। फसलों में भी कोई खास नुकसान नहीं पाया गया है। जिला स्तरीय टीम ने दस प्रतिशत गांवों के सत्यापन के बाद शासन को अपनी रिपोर्ट भेज दी है।
एक सप्ताह पूर्व शासन ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर सूखे का सर्वे कराने के लिए आदेशित किया था। दरअसल प्रदेश के कई जिलों में कम बारिश होने की सूचना लगातार मिल रही थी। इस पर शासन ने आदेश दिए थे कि गहनता से गांव-गांव फसलों का निरीक्षण कर सूखे की रिपोर्ट तैयार की जाए। इसके लिए तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी, तहसीलदार के साथ ही कृषि विभाग और उद्यान विभाग के कर्मचारियों की टीम बनाई गई थी। राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मदद से टीम ने गांव-गांव फसलों का सर्वे कराया। कुल नौ ब्लॉकों की 549 ग्राम पंचायतों में से कहीं भी सर्वे टीम को सूखे जैसे हालात नहीं मिले थे। ये रिपार्ट तहसीलों से जिला स्तरीय टीम को भेेजी गई थी। जिला स्तरीय टीम ने भी इनमें से दस प्रतिशत गांवों का दोबारा सत्यापन किया, लेकिन जिला स्तरीय टीम को भी कहीं भी सूखे के हालात नहीं मिले। इसके बाद शासन को जिला प्रशासन की ओर से रिपोर्ट भेज दी गई है।
सर्वे के दौरान राजस्व विभाग और कृषि विभाग की टीमों ने पाया कि कम बारिश होने से फसलों में कुछ प्रभाव पड़ा है। ये प्रभाव बमुश्किल एक से दो प्रतिशत के बीच है। हालांकि इसके सही आंकलन के लिए फसल तैयार होने पर उसकी क्रॉप कटिंग कराई जाएगी। क्रॉप कटिंग में उत्पादन से नुकसान का सही आकलन किया जा सकेगा।
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कहीं भी जिले में सूखे जैसे हालात नहीं पाए गए हैं। इसके लिए गांव-गांव फसलों का सर्वे कराया गया है। यही रिपोर्ट शासन को भी भेजी गई है। बारिश कम होने से फसल में अधिकतम एक से दो प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है, जो बहुत कम है। - रामजी मिश्र, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व
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एक सप्ताह पूर्व शासन ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर सूखे का सर्वे कराने के लिए आदेशित किया था। दरअसल प्रदेश के कई जिलों में कम बारिश होने की सूचना लगातार मिल रही थी। इस पर शासन ने आदेश दिए थे कि गहनता से गांव-गांव फसलों का निरीक्षण कर सूखे की रिपोर्ट तैयार की जाए। इसके लिए तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी, तहसीलदार के साथ ही कृषि विभाग और उद्यान विभाग के कर्मचारियों की टीम बनाई गई थी। राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मदद से टीम ने गांव-गांव फसलों का सर्वे कराया। कुल नौ ब्लॉकों की 549 ग्राम पंचायतों में से कहीं भी सर्वे टीम को सूखे जैसे हालात नहीं मिले थे। ये रिपार्ट तहसीलों से जिला स्तरीय टीम को भेेजी गई थी। जिला स्तरीय टीम ने भी इनमें से दस प्रतिशत गांवों का दोबारा सत्यापन किया, लेकिन जिला स्तरीय टीम को भी कहीं भी सूखे के हालात नहीं मिले। इसके बाद शासन को जिला प्रशासन की ओर से रिपोर्ट भेज दी गई है।
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सर्वे के दौरान राजस्व विभाग और कृषि विभाग की टीमों ने पाया कि कम बारिश होने से फसलों में कुछ प्रभाव पड़ा है। ये प्रभाव बमुश्किल एक से दो प्रतिशत के बीच है। हालांकि इसके सही आंकलन के लिए फसल तैयार होने पर उसकी क्रॉप कटिंग कराई जाएगी। क्रॉप कटिंग में उत्पादन से नुकसान का सही आकलन किया जा सकेगा।
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कहीं भी जिले में सूखे जैसे हालात नहीं पाए गए हैं। इसके लिए गांव-गांव फसलों का सर्वे कराया गया है। यही रिपोर्ट शासन को भी भेजी गई है। बारिश कम होने से फसल में अधिकतम एक से दो प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है, जो बहुत कम है। - रामजी मिश्र, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व