चंबल नदी में मिला दुर्लभ जीवों को 'नया जीवन': डॉल्फिन की रहस्य और रोमांच से भरी दुनिया, 35% बढ़ा कुनबा
वर्ष 2021 में डॉल्फिन की आबादी 82 थी, लेकिन 2022 में आबादी घटकर 71 हुई तो वन विभाग का अमला चिंतित हो उठा था। बाढ़ को इसका कारण माना जा रहा था, लेकिन इस साल बाढ़ के बाद भी 25 डॉल्फिन बढ़ने के साथ इनका कुनबा 96 हो गया है।
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आगरा के बाह से अच्छी खबर है कि एशिया की सबसे बड़ी घड़ियाल सेंक्चुअरी में डॉल्फिन की संख्या 35 फीसदी का इजाफा हुआ है। तीन राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में होकर बहने वाली चंबल नदी के 435 किमी क्षेत्र में पिछले साल की 71 के मुकाबले अब 96 डॉल्फिन मिली हैं।
फरवरी में पाली (राजस्थान) से लेकर पचनदा (इटावा) तक 15 दिन चली गणना के आंकड़े जारी होने पर वन विभाग का अमला उत्साहित है। 1996 में आईयूसीएन की लुप्तप्राय जलीय जीवों में डॉल्फिन को शुमार किया गया था। ये भारत, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान में ही बची हैं।
5 अक्तूबर 2009 में डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित कर संरक्षण के लिए चंबल नदी को चुना गया था। वर्ष 2021 में डॉल्फिन की आबादी 82 थी, लेकिन 2022 में आबादी घटकर 71 हुई तो वन विभाग का अमला चिंतित हो उठा था। बाढ़ को इसका कारण माना जा रहा था, लेकिन इस साल बाढ़ के बाद भी 25 डॉल्फिन बढ़ने के साथ इनका कुनबा 96 हो गया है। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि बाह रेंज की गणना में 19 डॉल्फिन मिली थी। जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। चंबल का पानी डॉल्फिन के लिए मुफीद साबित हो रहा है।
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दो साल तक करती हैं बच्चे की देखभाल
रेंजर ने बताया कि मादा डॉल्फिन का गर्भकाल 9 से 11 महीने का होता है। मार्च से अक्तूबर के बीच में बच्चे को जन्म देती है। 2 साल तक बच्चे की देखभाल करती हैं। इनका जीवनकाल 28 साल और औसत लंबाई ढाई मीटर होती है।
जल का बाघ मानी जाती हैं डॉल्फिन
स्थलीय पारितंत्र में जो स्थान बाघ का होता है, जलीय पारितंत्र में डॉल्फिन का भी वही स्थान होता है। रेंजर आके सिंह राठौड़ ने बताया कि डॉल्फिन को चंबल नदी का बाघ माना जाता है। डॉल्फिन की मौजूदगी नदी के पानी की स्वच्छता का सूचक भी मानी जाती है।
सोनार प्रणाली से करती हैं रक्षा और शिकार
डॉल्फिन( सूंस ) की आंखें नहीं होती। ये चमगादड की भांति ध्वनि तरंगों के परावर्तन ( सोनार प्रणाली ) से वस्तुओं और शिकार की पहचान करती है। आक्रमण व बचाव में भी यही प्रणाली मददगार होती है। डॉल्फिन पानी के अंदर रह कर मछलियों की भांति शिकार करती है। बार बार छलांग लगाकर पानी के बाहर आकर सांस लेती हैं। ये 10 से 15 मिनट तक पानी के अंदर रह सकतीं है।