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UP: असमय बंद हो रहा मासिक धर्म महिलाओं के लिए खतरनाक, पैदा कर रहा कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह सहित कई बीमारियां
Sun, 29 Oct 2023 02:22 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Sun, 29 Oct 2023 02:22 PM IST
सार
आगरा में डॉक्टरों ने कहा कि असमय बंद हो रहा मासिक धर्म महिलाओं के लिए खतरनाक है। यह कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह सहित कई बीमारियां पैदा कर रहा है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में फतेहाबाद रोड स्थित होटल में इंडियन मीनोपॉज सोसाइटी ने एक कार्यक्रम आयोजित किया। कॉन्फ्रेंस में चिकित्सकों ने बताया कि असमय बंद हो रहा मासिक धर्म महिलाओं को बीमार बना रहा है। 22 फीसदी महिलाओं में यह सही उम्र में बंद नहीं हो रही है। ऐसी महिलाओं में कैंसर-हृदय रोग, हड्डी रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और डिप्रेशन का तीन गुना खतरा बढ़ा है।
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सोसाइटी की राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरुग्राम की डॉ. पुष्पा सेठी ने बताया कि भारत में मासिक धर्म (माहवारी) बंद होने की सही उम्र 47.7 साल है। दुनिया की बात करें तो 51 साल है। लेकिन देश में 19 फीसदी महिलाओं में 47.7 साल से पहले बंद हो रही है। इसमें से तीन से पांच फीसदी की उम्र तो 40 साल से कम है। करीब तीन फीसदी में सही उम्र में ही बंद हो रही है। जल्दी माहवारी बंद होने को महिलाएं सामान्य समझती हैं और चिकित्सकों को नहीं दिखातीं। देर से माहवारी बंद होने पर जरूर महिलाएं गंभीरता से लेती हैं।
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कॉन्फ्रेंस चेयरपर्सन डॉ. रिचा सिंह ने बताया कि असमय मासिक धर्म बंद होने से एस्ट्रोजन हार्मोंस बनना बंद होने लगते हैं। अधिक उम्र तक माहवारी से स्तन और बच्चेदानी के मुख का कैंसर का खतरा रहता है। गुजरात की डॉ. बीनल शाह और हैदराबाद की डॉ. जमुना देवी ने बताया कि मोटापा, सर्दी-गर्मी अधिक लगना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन की भी परेशानी होने लगती है।
डॉ. अनुपमा शर्मा ने बताया कि असमय माहवारी बंद होने के लिए जन्मजात, बिगड़ा खानपान-दिनचर्या भी वजहें हैं। अध्यक्ष डॉ. आरती गुप्ता ने बताया कि सही उम्र में मासिक धर्म बंद न होने से मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप की परेशानी भी बन रही है।
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डॉ. सविता त्यागी ने बताया कि दवा, योग, व्यायाम और पौष्टिक आहार से असमय माहवारी बंद होने की परेशानी ठीक किया जा सकता है। कॉन्फ्रेंस में डॉ. सरोज सिंह, डॉ. शिखा सिंह, डॉ. सुभाषिनी गुप्ता, डॉ. रुचिका गर्ग, डॉ. संगीता चतुर्वेदी, डॉ. प्रतिभा दीक्षित, डॉ. नीलम रावत, डॉ. सीमा सिंह, डॉ. प्रिया सरीन, डॉ. अंजलि वोहरा, डॉ. मोनिका कोहली आदि ने भी व्याख्यान दिए।