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Infertility: खुद को टीबी है या फिर घर में इसका कोई मरीज, लापरवाही से कोख रह जाएगी सूनी; ये कहते हैं चिकित्सक

Mon, 18 Sep 2023 10:23 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 18 Sep 2023 10:23 AM IST
सार

बांझपन एक बड़ी समस्या है। इसे लेकर इंडियन एसोसिएशन ऑफ गाइनेकोलॉजिकल एडोस्कोपिस्ट की कार्यशाला में डॉक्टरों ने व्याख्यान दिए। साफ शब्दों में कहा कि टीबी बांझपन दे रही है।  

 

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Doctors lectures at Indian Association of Gynecological Endoscopists workshop on infertility
डॉ. दिव्येश शुक्ला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

खुद को टीबी है या फिर घर में इसका कोई मरीज। ऐसी स्थिति में करीब 10 फीसदी महिलाओं की कोख सूनी हो रही है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ गाइनेकोलॉजिकल एडोस्कोपिस्ट की कार्यशाला में डॉक्टरों ने इसे महिलाओं में बांझपन की वजह माना है। अंतिम दिन चिकित्सकों ने स्त्री रोग की बीमारियां, उसकी वजह, इलाज और बचाव पर व्याख्यान दिया।
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दिल्ली एम्स के स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जेबी शर्मा ने कहा कि टीबी के कीटाणु के कारण फैलोपियन ट्यूब बंद हो जाता है, माहवारी अनियमित होने लगती है। इससे महिलाएं बांझपन का शिकार हो जाती हैं। 8 से 10 फीसदी मामलों में ये देखा गया है। इनमें टीबी के लक्षण भी नहीं दिखते। कार्यशाला में डॉ. कमलेश टंडन, डॉ. जयदीप मल्होत्रा, डॉ. अनुपम गुप्ता, डॉ. पूनम यादव, डॉ. शिखा सिंह, डॉ. रिचा सिंह, डॉ. गार्गी गुप्ता, डॉ. सविता त्यागी, डॉ. स्मिता टंडन, डॉ. रेखा रानी आदि मौजूद रहीं।
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मधुमेह से बढ़ रहे सिजेरियन के मामले
संयोजक डॉ. अमित टंडन ने कहा कि महिलाओं के मधुमेह होने के कारण गर्भस्थ शिशु का वजन 4 किलो तक मिल रहा है। इससे सिजेरियन के मामले बढ़ते हैं। ऑब्स एंड गाइनी सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. सुषमा गुप्ता ने कहा कि 2.45 से 3.50 किलो वजनी नवजात स्वस्थ होता है। 5 फीसदी गर्भवती महिलाओं में शुगर का स्तर अनियंत्रित होने पर सिजेरियन करना पड़ता है। व्यायाम न करने और खराब फिटनेस से भी सिजेरियन बढ़े हैं।

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दो बच्चों से अधिक पर न मिले लाभ
4 लाख से अधिक नसबंदी करने वाली पद्मश्री डॉ. ऊषा शर्मा का कहना है हर साल ऑस्ट्रेलिया की आबादी के बराबर देश की जनसंख्या बढ़ रही है। ऐसे में सरकार को दो बच्चों से अधिक होने पर वोट डालने, प्रमोशन और सरकारी योजनाओं से वंचित करने का कानून लाना चाहिए। मुस्लिम महिलाएं भी अब नसबंदी के लिए जागरूक हो रही हैं। जम्मू-कश्मीर में वो 1000 से अधिक मुस्लिम महिलाओं की नसबंदी कर चुकी हैं।
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