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फिजीशियन के इलाज से हृदय रोगी की मौत, यूपीएमसी ने सुनाई ये सजा
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 12 Dec 2017 08:52 AM IST
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यूपी के आगरा में मरीज के इलाज में लापरवाही बरतने पर उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल (यूपीएमसी) ने एक डाक्टर का लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित कर दिया है। इस दौरान उनकी प्रैक्टिस पूरी तरह से पाबंद रहेगी। ऐसा करने पर यूपीएमसी ने एसएसपी को उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
संत नगर, दयालबाग निवासी राजेश गुप्ता ने अपने पिता आरपी गुप्ता को हृदय संबंधी बीमारी पर 2014 अगस्त में कमला नगर के डॉ. आशीष गर्ग (यूपीएमसी नंबर 74907) को दिखाया था। आरोप है कि डॉक्टर ने उनके पिता को बीएम हॉस्पिटल में रैफर कर दिया।
ये हॉस्पिटल डा. आशीष अग्रवाल का है। अगले दिन उनके पिता की मौत हो गई। इन्होंने डॉ. आशीष गर्ग पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल में शिकायत की।
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संत नगर, दयालबाग निवासी राजेश गुप्ता ने अपने पिता आरपी गुप्ता को हृदय संबंधी बीमारी पर 2014 अगस्त में कमला नगर के डॉ. आशीष गर्ग (यूपीएमसी नंबर 74907) को दिखाया था। आरोप है कि डॉक्टर ने उनके पिता को बीएम हॉस्पिटल में रैफर कर दिया।
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ये हॉस्पिटल डा. आशीष अग्रवाल का है। अगले दिन उनके पिता की मौत हो गई। इन्होंने डॉ. आशीष गर्ग पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल में शिकायत की।
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कहा कि ये हृदय रोग विशेषज्ञ न होते हुए भी पिता का इलाज किया। इसको संज्ञान में लेते यूपीएमसी की एथिक्स कमेटी के पास पहुंचा। यहां पीड़ित के साथ डॉ. आशीष अग्रवाल और डॉ. आशीष गर्ग के बयान भी दर्ज हुए।
डॉ. आशीष अग्रवाल ने बयान में कहा कि इनका इलाज डॉ. आशीष गर्ग ने किया है। इस पर आशीष गर्ग के प्रमाणपत्र जांचे गए तो वह हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं पाए गए। वह यूक्रेन से एमडी हैं। मतलब फिजीशियन हैं।
डॉ. आशीष अग्रवाल ने बयान में कहा कि इनका इलाज डॉ. आशीष गर्ग ने किया है। इस पर आशीष गर्ग के प्रमाणपत्र जांचे गए तो वह हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं पाए गए। वह यूक्रेन से एमडी हैं। मतलब फिजीशियन हैं।
डाक्टर ने दी ये सफाई
यूपीएमसी ने माना कि मरीज और डाक्टर के बीच बेहतर संवाद नहीं हुआ और इलाज में कोताही बरती गई है। इस पर यूपीएमसीआई ने डॉ. आशीष गर्ग के लाइसेंस को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया है।
इधर, डा. आशीष गर्ग का कहना है कि मरीज की उम्र करीब 85 साल थी, इनको हार्टअटैक आया था। परिजनों को एंजियोग्राफी कराने के लिए कहा था, लेकिन कराई नहीं। सीएमओ डा. मुकेश वत्स का कहना है कि लाइसेंस निलंबित की अवधि तक चिकित्सक प्रैक्टिस करते हुए पाए गए तो कार्रवाई की जाएगी।
इधर, डा. आशीष गर्ग का कहना है कि मरीज की उम्र करीब 85 साल थी, इनको हार्टअटैक आया था। परिजनों को एंजियोग्राफी कराने के लिए कहा था, लेकिन कराई नहीं। सीएमओ डा. मुकेश वत्स का कहना है कि लाइसेंस निलंबित की अवधि तक चिकित्सक प्रैक्टिस करते हुए पाए गए तो कार्रवाई की जाएगी।