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... न समझो किसी हमवतन को गैर
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 15 Feb 2015 02:01 AM IST
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‘तुम अगर चाहते हो मुल्क की खैर, न समझो किसी हमवतन को गैर।’ होटल ग्रांड में फाउंडेशन ऑफ सार्क राइटर्स एंड लिटरेचर की ओर से आयोजित सार्क लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन शनिवार को शांति-सौहार्द और नारी सशक्तिकरण का मुद्दा छाया रहा। भारतीय साहित्यकार अहमद खान ने शायर अल्ताफ हुसैन आली को राष्ट्रीय एकता की प्रतिमूर्ति बताते हुए उनकी कुछ लाइनें सुनाई, ‘यही है इबादत, यही दीनो ईमां, कि काम आए दुनिया में दुनिया के इंसा।’
पाकिस्तान के मोहम्मद जमील कलंदर ने विश्वशांति पर कहा कि मानव सबसे खतरनाक प्राणी है। इसे नैतिक, आध्यात्मिक और वैधानिक रूप से प्रशिक्षित, संस्कारित कर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शांति-सुरक्षा को कायम रखा जा सकता है। बांग्लादेश की सेलिना हुसैन ने ‘पीस एज आई सी ईट’ विषय पर बोलते हुए कहा कि उनकी नजर में शांति तभी है, जब हर व्यक्ति सुरक्षित हो और उसके पास भर पेट भोजन हो। वह समाज-देश के विकास में सकारात्मक भूमिका निभाता हो। पाकिस्तान की फरहीन चौधरी ने असुरक्षा की भावना को कुछ यूं बया कि ‘रात काली रास्ता सुनसान है, दिल में अंदेशे नजर हैरान है।’ भारत, पाक, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, मालदीव के सवा सौ से अधिक कवि और साहित्यकार फेस्टिवल में हिस्सा ले रहे हैं।
साहित्यकारों ने 14 शोधपत्र पढ़ें
पाकिस्तान के डॉ. कमालुद्दीन जमरो, मोहम्मद जमील कलंदर, फरहीन चौधरी, डॉ. मोहम्मद अब्दुल कयूम ताहिर, श्रीलंका के डॉ. प्रणीथ, कमला विजरत्ने, बांग्लादेश रहीमा अफरूज मुन्नी, सेलिना हुसैन, नेपाल के अभी सुबैदी, प्रो. केशव सिगदेल, भारत के परवेज नजीर, इंदिरा बबेलापती, अहमद खान, अलाउद्दीन खान ने शोधपत्र पढ़ा।
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‘हम प्यार की बस्ती को बसाने में लगे हैं’
शनिवार दोपहर बाद दो सत्र कविता के हुए। इसमें कवियों ने हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बांग्ला, नेपाली, अफगानी आदि अलग-अलग भाषाओं के जरिए भावना के माध्यम से देशों में आपसी भाईचारा और शांति बरकरार रखने का संदेश दिया। भारत सीताकांत महापात्र, डॉ. आनंद कुमार, प्रो. यशोधरा मिश्रा, डॉ. रेखा कक्कड़, तरन्नुम रियाज, नेपाल के प्रो. अभी सुबैदी, निर्मल थापा, अफगानिस्तान के आर्यन अरुण आदि ने काव्य पाठ किया। भारत की रमा वर्मा ने सुनाया कि ‘हिंसा और नफरतें तो समस्या का हल नहीं, हम प्यार की बस्ती को बसाने में लगे हैं।’
जब मैं था तब हरि नहीं...
सूरसदन प्रेक्षागृह में बिखरी सांस्कृतिक छटा
आगरा। शनिवार शाम को सूरसदन प्रेक्षागृह में सार्क देशों की सांस्कृतिक छटा देखने को मिली। बांग्लादेश की साहित्यकार और टीवी सिंगर झरना रहमान ने बांग्ला गीत की मिठास से श्रोताओं को रूबरू कराया। सुरेंद्र सिंह, पुखराज सिंह और कुलवंत सिंह जोधपुरी ने ‘जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मै नाहि...’ आदि कबीर वाणी सुनाई। पाकिस्तान के मलंगों ने नृत्य की प्रस्तुति दी। आगरा की कवयित्री डॉ. शशि तिवारी ने भी गायन किया। संचालन पाकिस्तान की फरहीन चौधरी ने किया।
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पाकिस्तान के मोहम्मद जमील कलंदर ने विश्वशांति पर कहा कि मानव सबसे खतरनाक प्राणी है। इसे नैतिक, आध्यात्मिक और वैधानिक रूप से प्रशिक्षित, संस्कारित कर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शांति-सुरक्षा को कायम रखा जा सकता है। बांग्लादेश की सेलिना हुसैन ने ‘पीस एज आई सी ईट’ विषय पर बोलते हुए कहा कि उनकी नजर में शांति तभी है, जब हर व्यक्ति सुरक्षित हो और उसके पास भर पेट भोजन हो। वह समाज-देश के विकास में सकारात्मक भूमिका निभाता हो। पाकिस्तान की फरहीन चौधरी ने असुरक्षा की भावना को कुछ यूं बया कि ‘रात काली रास्ता सुनसान है, दिल में अंदेशे नजर हैरान है।’ भारत, पाक, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, मालदीव के सवा सौ से अधिक कवि और साहित्यकार फेस्टिवल में हिस्सा ले रहे हैं।
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साहित्यकारों ने 14 शोधपत्र पढ़ें
पाकिस्तान के डॉ. कमालुद्दीन जमरो, मोहम्मद जमील कलंदर, फरहीन चौधरी, डॉ. मोहम्मद अब्दुल कयूम ताहिर, श्रीलंका के डॉ. प्रणीथ, कमला विजरत्ने, बांग्लादेश रहीमा अफरूज मुन्नी, सेलिना हुसैन, नेपाल के अभी सुबैदी, प्रो. केशव सिगदेल, भारत के परवेज नजीर, इंदिरा बबेलापती, अहमद खान, अलाउद्दीन खान ने शोधपत्र पढ़ा।
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‘हम प्यार की बस्ती को बसाने में लगे हैं’
शनिवार दोपहर बाद दो सत्र कविता के हुए। इसमें कवियों ने हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बांग्ला, नेपाली, अफगानी आदि अलग-अलग भाषाओं के जरिए भावना के माध्यम से देशों में आपसी भाईचारा और शांति बरकरार रखने का संदेश दिया। भारत सीताकांत महापात्र, डॉ. आनंद कुमार, प्रो. यशोधरा मिश्रा, डॉ. रेखा कक्कड़, तरन्नुम रियाज, नेपाल के प्रो. अभी सुबैदी, निर्मल थापा, अफगानिस्तान के आर्यन अरुण आदि ने काव्य पाठ किया। भारत की रमा वर्मा ने सुनाया कि ‘हिंसा और नफरतें तो समस्या का हल नहीं, हम प्यार की बस्ती को बसाने में लगे हैं।’
जब मैं था तब हरि नहीं...
सूरसदन प्रेक्षागृह में बिखरी सांस्कृतिक छटा
आगरा। शनिवार शाम को सूरसदन प्रेक्षागृह में सार्क देशों की सांस्कृतिक छटा देखने को मिली। बांग्लादेश की साहित्यकार और टीवी सिंगर झरना रहमान ने बांग्ला गीत की मिठास से श्रोताओं को रूबरू कराया। सुरेंद्र सिंह, पुखराज सिंह और कुलवंत सिंह जोधपुरी ने ‘जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मै नाहि...’ आदि कबीर वाणी सुनाई। पाकिस्तान के मलंगों ने नृत्य की प्रस्तुति दी। आगरा की कवयित्री डॉ. शशि तिवारी ने भी गायन किया। संचालन पाकिस्तान की फरहीन चौधरी ने किया।