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साहित्य सागर में हिंदी पर चर्चाः छोटी-छोटी बोली व भाषाओं को समाहित कर हिंदी हुई व्यापक
Thu, 22 Oct 2020 11:03 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 22 Oct 2020 11:03 AM IST
सार
भाषा सुरक्षित रहेगी तो संस्कृति भी सुरक्षित रहेगी। हिंदी भाषा पर फिलहाल कोई संकट नहीं है। हम पूरे विश्व से जुड़ रहे हैं। हमारी हिंदी भाषा को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता है। आज 50 देशों में हिंदी पढ़ाई जाती है। विदेशों में भी हिंदी का परचम पहरा रहा है। यह रोजगार भी दे रही है।
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सामाजिक सरोकार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमर उजाला और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो-90.4- आगरा की आवाज की ओर से बुधवार को ‘साहित्य सागर’ कार्यक्रम की कड़ी में ‘हिंदी की दशा एवं दिशा’ विषय पर परिचर्चा कराई गई। इसमें लखनऊ और मणिपुर के विश्वविद्यालयों से विशेषज्ञ जुड़े और अपनी राय रखी। इसका रेडियो पर प्रचारण किया गया। लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध विद्यांत पीजी कॉलेज, लखनऊ के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार कर्ण ने कहा कि हिंदी को बढ़ाने में बोलियों व उप बोलियों और उप भाषाओं का बड़ा योगदान है। छोटी-छोटी बोली व भाषाओं को समाहित कर हिंदी व्यापक हुई है।
उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य का विशाल भंडार है। साहित्य के सागर में जो डुबकी लगाता है, वह अनेक बहुमूल्य रत्नों को प्राप्त करता है। हिंदी में कामकाज करने वाले बढ़े हैं। विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो के निदेशक प्रो. लवकुश मिश्रा निर्देशन में कार्यक्रम संपन्न हुआ। सामुदायिक रेडियो की प्रोग्राम एग्जक्यूटिव पूजा सक्सेना ने संचालन किया। इंजीनियरिंग असिस्टेंट तरुण श्रीवास्तव ने सहयोग दिया।
हिंदी भाषा पर कोई संकट नहीं : प्रो. पीआर
माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के पूर्व चेयरमैन व लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. पीआर पॉल ने कहा कि हमारी भाषा व संस्कृति अक्षुण है। हिंदी विभिन्न बोलियों का समुच्चय है। भाषा सुरक्षित रहेगी तो संस्कृति भी सुरक्षित रहेगी। हिंदी भाषा पर फिलहाल कोई संकट नहीं है। हम पूरे विश्व से जुड़ रहे हैं। हमारी हिंदी भाषा को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता है। आज 50 देशों में हिंदी पढ़ाई जाती है। विदेशों में भी हिंदी का परचम पहरा रहा है। यह रोजगार भी दे रही है।
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उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य का विशाल भंडार है। साहित्य के सागर में जो डुबकी लगाता है, वह अनेक बहुमूल्य रत्नों को प्राप्त करता है। हिंदी में कामकाज करने वाले बढ़े हैं। विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो के निदेशक प्रो. लवकुश मिश्रा निर्देशन में कार्यक्रम संपन्न हुआ। सामुदायिक रेडियो की प्रोग्राम एग्जक्यूटिव पूजा सक्सेना ने संचालन किया। इंजीनियरिंग असिस्टेंट तरुण श्रीवास्तव ने सहयोग दिया।
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हिंदी भाषा पर कोई संकट नहीं : प्रो. पीआर
माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के पूर्व चेयरमैन व लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. पीआर पॉल ने कहा कि हमारी भाषा व संस्कृति अक्षुण है। हिंदी विभिन्न बोलियों का समुच्चय है। भाषा सुरक्षित रहेगी तो संस्कृति भी सुरक्षित रहेगी। हिंदी भाषा पर फिलहाल कोई संकट नहीं है। हम पूरे विश्व से जुड़ रहे हैं। हमारी हिंदी भाषा को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता है। आज 50 देशों में हिंदी पढ़ाई जाती है। विदेशों में भी हिंदी का परचम पहरा रहा है। यह रोजगार भी दे रही है।
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सामुदायिक रेडियो और अमर उजाला के साथ साहित्य सागर पर चर्चा करने वाले विद्घान
- फोटो : अमर उजाला
हिंदी स्पीकिंग कोर्स भी चल रहा: प्रो. यशवंत सिंह
मणिपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत सिंह का कहना है कि गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी का प्रसार तेजी से हो रहा है। पूर्वोत्तर के राज्यों में हिंदी स्पीकिंग कोर्स भी चलाया जा रहा है। पूर्वोत्तर के छात्र पूरे देश को समझने और नौकरी पाने के लिए हिंदी पढ़ रहे हैं। हिंदी में रोजगार बढ़ेगा और तकनीकी में इसका चलन और बढ़ने से प्रसार भी बढ़ेगा।
मणिपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत सिंह का कहना है कि गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी का प्रसार तेजी से हो रहा है। पूर्वोत्तर के राज्यों में हिंदी स्पीकिंग कोर्स भी चलाया जा रहा है। पूर्वोत्तर के छात्र पूरे देश को समझने और नौकरी पाने के लिए हिंदी पढ़ रहे हैं। हिंदी में रोजगार बढ़ेगा और तकनीकी में इसका चलन और बढ़ने से प्रसार भी बढ़ेगा।