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Agra News: हंस महापुरुष और बुधादित्य योग में मनाया जाएगा धनतेरस
Thu, 16 Oct 2025 11:20 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Thu, 16 Oct 2025 11:20 PM IST
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कासगंज। इस बार धनतेरस का पर्व अत्यंत शुभ योग में मनाया जाएगा। 18 अक्तूबर को हंस महापुरुष राजयोग, बुधादित्य योग और शनि प्रदोष के संयोग में धनतेरस मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ये सभी योग व्यक्ति के जीवन में धन, आरोग्य और समृद्धि के द्वार खोलने वाले माने जाते हैं।
ज्योतिषाचार्य भरतराम गौड़ ने बताया कि धनतेरस का पर्व हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ्य और आरोग्य के देवता तथा भगवान विष्णु का अंशावतार माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और यमराज की पूजा का विधान है। पर्व 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन हंस महापुरुष राजयोग, त्रिग्रही योग, बुधादित्य राजयोग और शनि प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। इससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।
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धनतेरस तिथि व पूजन मुहूर्त
तिथि प्रारंभ- 18 अक्तूबर दोपहर 12:20 बजे
तिथि समाप्ति-19 अक्तूबर दोपहर 1:52 बजे
पूजन मुहूर्त प्रदोष काल- शाम 7:16 बजे से रात 8:20 बजे तक
खरीदारी के शुभ मुहूर्त
अमृत काल-सुबह 8:50 से 10:33 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:01 से 12:48 बजे तक
लाभ, उन्नति चौघड़िया-दोपहर 1:51 से 3:18 बजे तक
धनतेरस पूजन विधि
शाम को स्नान कर साफ कपड़े पहनें।
-पूजन चौकी पर भगवान धन्वंतरि, कुबेर, लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र रखें
-दीपक जलाएं, रोली से तिलक करें और फूल, फल, मिठाई अर्पित करें
-विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और आरती करें
-पूजा के बाद प्रसाद सभी परिजनों में बांटें
धनतेरस पर करें ये शुभ उपाय
-झाड़ू खरीदने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है
-13 दीपक जलाकर घर के हर कोने और मंदिर में रखें, इससे दरिद्रता दूर होती है
-कुबेर यंत्र स्थापित करें, उत्तर दिशा में दीया जलाकर रखें, धन वृद्धि होगी
-पीली कौड़ी, गुंजा व लघु नारियल घर लाएं, देवी लक्ष्मी और कुबेर प्रसन्न होते हैं
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ज्योतिषाचार्य भरतराम गौड़ ने बताया कि धनतेरस का पर्व हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ्य और आरोग्य के देवता तथा भगवान विष्णु का अंशावतार माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और यमराज की पूजा का विधान है। पर्व 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन हंस महापुरुष राजयोग, त्रिग्रही योग, बुधादित्य राजयोग और शनि प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। इससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।
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धनतेरस तिथि व पूजन मुहूर्त
तिथि प्रारंभ- 18 अक्तूबर दोपहर 12:20 बजे
तिथि समाप्ति-19 अक्तूबर दोपहर 1:52 बजे
पूजन मुहूर्त प्रदोष काल- शाम 7:16 बजे से रात 8:20 बजे तक
खरीदारी के शुभ मुहूर्त
अमृत काल-सुबह 8:50 से 10:33 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:01 से 12:48 बजे तक
लाभ, उन्नति चौघड़िया-दोपहर 1:51 से 3:18 बजे तक
धनतेरस पूजन विधि
शाम को स्नान कर साफ कपड़े पहनें।
-पूजन चौकी पर भगवान धन्वंतरि, कुबेर, लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र रखें
-दीपक जलाएं, रोली से तिलक करें और फूल, फल, मिठाई अर्पित करें
-विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और आरती करें
-पूजा के बाद प्रसाद सभी परिजनों में बांटें
धनतेरस पर करें ये शुभ उपाय
-झाड़ू खरीदने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है
-13 दीपक जलाकर घर के हर कोने और मंदिर में रखें, इससे दरिद्रता दूर होती है
-कुबेर यंत्र स्थापित करें, उत्तर दिशा में दीया जलाकर रखें, धन वृद्धि होगी
-पीली कौड़ी, गुंजा व लघु नारियल घर लाएं, देवी लक्ष्मी और कुबेर प्रसन्न होते हैं
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