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डिप्टी सीएम ने कहा-पत्रकारों को खुद तय करनी होगी सीमा रेखा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Thu, 31 May 2018 02:11 PM IST
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उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश्ा शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
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हिंदी पत्रकारिता दिवस पर होटल पीएल पैलेस में आयोजित संगोष्ठी में उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और वह स्वतंत्र है। बदलाव के इस दौर में पत्रकारों को अपनी सीमा स्वयं तय करनी होगी।
पत्रकारिता के इतिहास पर चर्चा करते हुए डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि भारत पत्रकारिता आदि काल से चल रही है और नैतिक मूल्यों को कायम रखा है।
कहीं माना जाता है कि हिंदी पत्रकारिता का प्रारंभ 1826 हुआ तो ऐसे भी उदाहरण है कि 1780 में कलकत्ता गजेटियर प्रकाशित हुआ था। भारतेंदु हरिश्चंद्र और राजा रायमोहन राय ने पत्रकारिता को सामाजिक जागरूकता माध्यम से बनाया।
उन्होंने कहा कि अंग्रेज तमंचे की बजाय लेखन से अधिक डरते थे। भारत में लाइव टेलीकास्ट की तकनीकी महाभारत काल से है बस उसका रूप अलग था। आज के डब्लूडब्लूडब्लू के जवाब में नारद जी का नारायण..नारायण..नारायण था।
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पत्रकारिता के इतिहास पर चर्चा करते हुए डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि भारत पत्रकारिता आदि काल से चल रही है और नैतिक मूल्यों को कायम रखा है।
कहीं माना जाता है कि हिंदी पत्रकारिता का प्रारंभ 1826 हुआ तो ऐसे भी उदाहरण है कि 1780 में कलकत्ता गजेटियर प्रकाशित हुआ था। भारतेंदु हरिश्चंद्र और राजा रायमोहन राय ने पत्रकारिता को सामाजिक जागरूकता माध्यम से बनाया।
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उन्होंने कहा कि अंग्रेज तमंचे की बजाय लेखन से अधिक डरते थे। भारत में लाइव टेलीकास्ट की तकनीकी महाभारत काल से है बस उसका रूप अलग था। आज के डब्लूडब्लूडब्लू के जवाब में नारद जी का नारायण..नारायण..नारायण था।
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मंचासीन भ्ााजपा नेता
- फोटो : अमर उजाला
डिप्टी सीएम ने अखबारों में आ रहे बदलाव पर संस्मरण सुनाया। उन्होंने कहा कि वह गृहस्थ जीवन में काफी देर से आए हैं लेकिन इस बीच चौधरी बाबूलाल से कहा कि आपका तो बाल विवाह हुआ होगा?
दस वर्ष की उम्र में शादी हो गई होगी और 18-20 तक पिता बन गए होंगे। इस हाल में बैठे ठहाके लगाने लगे। बाद में मुद्दे पर आते हुए उन्होंने कहा कि मैं सुबह जागने पर सबसे पहले अपनी अम्मा (मां) का चेहरा देखता था।
कभी अम्मा घर से बाहर होती थीं तो एक अखबार आता है जिसके पहले पेज किसी न किसी देवी देवता की तस्वीर होती थी उसका दीदार करता था। एक दिन अखबार को माथे से लगाया तो उनके छोटे से भतीजे ने हल्ला मचा दिया कि चाचा क्या कर रहे हैं। घर से लोग एकत्र हो गए और उनको डांट पड़ी वे समझ नहीं पाए माजरा क्या है।
जब उन्हें अखबार दिखाया गया तो उस पर देवी देवता की तस्वीर एक फिल्म अभिनेत्री की कम वस्त्रों वाली फोटो थी। हैरत हुई कल तक जहां धार्मिक चित्र होते थे वहां अचानक फिल्म अभिनेत्रियों को फोटो आने लगे।
दस वर्ष की उम्र में शादी हो गई होगी और 18-20 तक पिता बन गए होंगे। इस हाल में बैठे ठहाके लगाने लगे। बाद में मुद्दे पर आते हुए उन्होंने कहा कि मैं सुबह जागने पर सबसे पहले अपनी अम्मा (मां) का चेहरा देखता था।
कभी अम्मा घर से बाहर होती थीं तो एक अखबार आता है जिसके पहले पेज किसी न किसी देवी देवता की तस्वीर होती थी उसका दीदार करता था। एक दिन अखबार को माथे से लगाया तो उनके छोटे से भतीजे ने हल्ला मचा दिया कि चाचा क्या कर रहे हैं। घर से लोग एकत्र हो गए और उनको डांट पड़ी वे समझ नहीं पाए माजरा क्या है।
जब उन्हें अखबार दिखाया गया तो उस पर देवी देवता की तस्वीर एक फिल्म अभिनेत्री की कम वस्त्रों वाली फोटो थी। हैरत हुई कल तक जहां धार्मिक चित्र होते थे वहां अचानक फिल्म अभिनेत्रियों को फोटो आने लगे।