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घने कोहरे ने रोकी रेल और सड़क यातायात की रफ्तार

Fri, 02 Dec 2016 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 02 Dec 2016 11:51 PM IST
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Dense fog prevented the rail and road traffic speed
घने कोहरे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
घने कोहरे के कारण ज्यादातर ट्रेनें घंटों की देरी से चल रही हैं। रेल प्रशासन ने 51881/82 ग्वालियर-आगरा पैसेंजर को तीन से पांच दिसंबर तक के लिए निरस्त किया है। स्टेशनों पर यात्री आठ से दस घंटे तक ट्रेनों का इंतजार करने को मजबूर हो गए हैं। बता दें, 30 नवंबर को सीजन का पहला कोहरा छाने के बाद से ही ट्रेनों का ढर्रा पटरी से उतर गया। ज्यादातर ट्रेनें तभी से आठ से 20 घंटे तक की देरी से चल रही हैं। शुक्रवार को भी अप और डाउन की दो दर्जन ट्रेनें अपने निर्धारित समय से आठ से 18 घंटे तक की देरी से चल रही हैं। अनन्या एक्सप्रेस का आगरा फोर्ट पर पहुंचने का समय सुबह 10 बजे है, लेकिन शुक्रवार रात दस बजे गाड़ी कानपुर पहुंची थी। इसी तरह तूफान, शताब्दी, राजधानी, मरुधर, केरला एक्सप्रेस, ताज एक्सप्रेस आदि गाड़ियां भी घंटों की देरी से गंतव्य को पहुंच रही हैं।
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उधर, कोहरे का असर रोडवेज की बस सेवाओं पर भी पड़ा है। सुबह पांच बजे की कई रोडवेज बसों को छह बजे के बाद निकाला जा रहा है। सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी मोहनलाल ने बताया कि ज्यादातर बसें देरी से चल रही हैं। कोहरे के कारण लंबी दूरी की बसों में ज्यादा समस्या आ रही है।
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सर्दी में उखड़ने लगीं सांसें
सांस लेते वक्त सीटी बजना, पसली चलना, बुखार और खांसी। ये निमोनिया के लक्षण हैं। अगर आपके शिशु को ये परेशानी है तो डाक्टर को दिखाने में देर न करें। बीते तीन दिन में एसएन मेडिकल कालेज, जिला अस्पताल और प्राइवेट हास्पिटल की बाल रोग विभाग की ओपीडी में 15 फीसदी बच्चे बढ़े हैं, इसमें सर्वाधिक निमोनिया के हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डा. अरुण जैन बताते हैं कि इस मौसम में जुकाम-खांसी के साथ पसली चल रही है तो ये खतरनाक है। सांस लेने में तकलीफ होने के कारण पसली चलती है। ऐसा ही हाल क्षय एवं वक्ष रोग विभाग का है। यहां 20 प्रतिशत बढ़े मरीजों में सर्वाधिक सांस रोगी हैं। क्षय एवं वक्ष रोग विभाग के डा. जीवी सिंह बताते हैं कि तेज सर्दी से सांस रोगियों की सांस उखड़ती है, पीला बलगम आ रह है और सांस लेने में दिक्कत है तो इन्फेक्शन की संभावना है। दवाएं नहीं ले रहे हैं तो भर्ती करने की नौबत तक रहती है। 
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सांस रोगी इसका रखें ख्याल
- इन्हेलर का इस्तेमाल करें
- गर्म पानी की भाप लें 
- ठंडे पदार्थों से बचें
शिशुओं की करें देखभाल
- कान-शरीर गर्म कपड़ों से अच्छी तरह ढका हो
- ठंडे पानी और ठंडे तरल पदार्थ से बचाएं
- बाहर का खाने से बचाएं, पुराने पर्चे की दवाएं न दें
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