आगरा: प्लेटलेट्स 20 हजार से कम... फिर भी बिना जंबो पैक के स्वस्थ हो गए डेंगू मरीज
आगरा मंडल में जब डेंगू का प्रकोप फैला था, तब जंबो पैक के लिए मारामारी मच गई थी। इस दौरान एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कई मरीज ऐसे थे, जिनकी प्लेटलेट्स 20 हजार से कम थी। उन्हें जंबो पैक की जरूरत भी नहीं पड़ी और ठीक हो गए।
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आगरा में बीते ढाई महीने में ब्लड बैंकों में जंबो पैक के लिए मारामारी रही। 80 हजार प्लेटलेट्स तक के मरीजों को भी जंबो पैक लगाया गया। एसएन मेडिकल कॉलेज में 20 हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर भी जंबो पैक की जरूरत नहीं पड़ी। मरीज ठीक भी हो गए।
एसएन मेडिकल कॉलेज के डेंगू वार्ड प्रभारी डॉ. मृदुल चतुर्वेदी ने बताया कि डेंगू वार्ड में 425 मरीज भर्ती हुए। इनमें से करीब 209 मरीजों को जंबो पैक लगाया गया। यह गंभीर हाल में भर्ती हुए थे। मुंह, नाक व गुदा से खून आने लगा था।
112 मरीज ऐसे भी रहे, जिनकी प्लेटलेट्स 20 हजार से नीचे आ गई थीं। इनमें रक्तस्राव नहीं हुआ था। ऐसे में फ्लूड मैनेजमेंट से हालत को संभाला गया। जंबो पैक की जरूरत नहीं पड़ी। ये मरीज छह से सात दिन में पूरी तरह से ठीक हो गए और घर भेज दिए गए।
बच्चों के डेंगू वार्ड के प्रभारी डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि बुखार की पैरासीटामोल गोली, आईबी फ्लूड मैनेजमेंट और बेहतर देखरेख से डेंगू के अधिकांश मरीज ठीक हो गए।
मरीज की सीबीसी (कंपलीट ब्लड काउंट) की रोजाना जांच, ईसीजी, रक्तचाप की जांच कर मरीज की हालत पर 24 घंटे निगरानी रखी गई। बेहद जरूरत पर इक्का-दुक्का एंटीबायोटिक भी इस्तेमाल की गईं। मरीज की हालत बिगड़ने की आशंका पर उनको जंबो पैक और फिर प्लाज्मा चढ़ाया गया।
फिरोजाबाद से आए गंभीर मामले
एसएन कॉलेज में आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी, एटा, इटावा, हाथरस, कासगंज, औरैया, शिकोहाबाद, फर्रुखाबाद और अलीगढ़ से भी मरीज भर्ती हुए। इनमें फिरोजाबाद के मरीजों की हालत ज्यादा खराब मिली। इन मरीजों में रक्तस्राव होने के साथ ही लिवर, किडनी प्रभावित दिखी। फेफड़ों में पानी भी भरा मिला। इन मरीजों में 255 वयस्क और 170 बच्चे रहे।
मरीज की हालत के अनुसार इलाज
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि डेंगू से निपटने के लिए पैथोलॉजी, मेडिसिन, बाल रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम बनाई गई। इससे गंभीर मरीजों का इलाज आसान हो गया। जरूरत पर अन्य विशेषज्ञों की भी मदद ली गई। मरीज की हालत की निगरानी करने के बाद जंबो पैक, प्लाज्मा भी दिया गया। इससे हमारे यहां ठीक होने की दर बेहतर रही।
80 हजार प्लेटलेट्स पर भी जंबो पैक
लोकहितम ब्लड बैंक के निदेशक अखिलेश अग्रवाल ने कहा कि जंबो पैक के लिए ऐसी भी डिमांड आईं, जिनकी 80 हजार प्लेटलेट्स थीं। तीमारदार डोनर लाकर जंबो पैक भी लेकर गए। सितंबर और अक्तूबर में मामले अधिक बढ़ने पर ज्यादा मांग रही।
एहतियातन भी जंबो पैक चढ़ाया गया
अध्यक्ष आईएमए डॉ. राजीव उपाध्याय ने बताया कि रक्तस्राव होने पर मरीजों को जंबो पैक दिया। कई बार 60-80 हजार प्लेटलेट्स पर भी एहतियातन जंबो पैक मरीजों को चढ़ाया गया। कई बार तीमारदारों ने भी पहल की।
दस हजार प्लेटलेट्स की है गाइड लाइन
एसएन कॉलेज की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. नीतू चौहान ने बताया कि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार 10 हजार प्लेटलेट्स से कम होने पर मरीज को जंबो पैक लगाया जाना है। नाक, मुंह व अन्य स्थानों से रक्तस्राव होने पर प्लेटलेट्स की यह संख्या मायने नहीं रखती। ऐसी स्थिति में प्लेटलेट्स ज्यादा होने पर भी जंबो पैक लगाया जाता है।