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दिल्ली का गैंग कर लेता था एटीएम कार्ड की क्लोनिंग
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 06 Apr 2015 01:44 AM IST
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शहर में एटीएम कार्ड की क्लोनिंग करने वाला गिरोह सक्रिय है। थाना शाहगंज पुलिस ने ऐसे ही गिरोह के तीन सदस्यों को पकड़ने में सफलता हासिल की है। पकड़े गए शातिरों में मास्टरमाइंड भी है।
एसएसपी राजेश डी मोदक ने बताया कि चार अप्रैल को अर्जुन नगर तिराहा स्थित केनरा बैंक के एटीएम के बाहर दिल्ली नंबर की आई 10 कार खड़ी थी। एटीएम के अंदर तीन संदिग्ध व्यक्ति थे। उनके सिर पर कैप और मुंह पर मास्क बंधे थे। एक ने एटीएम के सीसीटीवी कैमरे को ढक रखा था। थाना शाहगंज पुलिस ने तीनों को पकड़ लिया। इनमें सुगीत वर्मा निवासी जाफराबाद नई दिल्ली, सुमित कुमार और मो. शकील निवासी फाजलपुर थाना मंडावली दिल्ली हैं। सुगीत बी फार्मा कर चुका है। उसने ही एटीएम हैक करने के लिए चायना से साफ्टवेयर आनलाइन मंगवाया था। इसकी मदद से ही क्लोन तैयार करता है। सुमित इंटर और शकील हाईस्कूल पास है। पूछताछ में सुगीत ने बताया कि उनका गैंग एटीएम कार्ड की क्लोनिंग करता है। दिल्ली से वारदात करने यहां आते हैं। कई वारदात को अंजाम देेकर लोगों के खातों से लाखों रुपये निकाल चुके हैं। उनके पास से पांच कैमरे, तीन चार्जर, पांच क्लोन कार्ड, दो बैटरी, पांच मास्क, एक ग्लब्स, फर्जी वोटर कार्ड और पेन कार्ड, 45,000 रुपये मिले हैं।
ऐसे होती है क्लोनिंग
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य सुनसान इलाकों के एटीएम में आने वाले लोगों को निशाना बनाते हैं। एटीएम मशीन के कार्ड स्वैपिंग स्लॉट पर विशेष मैग्नेटिक डिवाइस (स्कीमर) लगा दी जाती है। चिप के आकार की यह डिवाइस एटीएम कार्ड के बारकोड और चिप की जानकारी कापी कर लेती है। इस डिवाइस में कार्ड का ब्लूप्रिंट तैयार हो जाता है। फिर विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से एटीएम का क्लोन तैयार किया जाता है। इसमें लैपटॉप और एमआरएस 6.6 मशीन का इस्तेमाल करते हैं।
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पिन चोरी करने के लिए खुफिया कैमरा
गिरोह के सदस्य सीसीटीवी कैमरे को एटीएम केबिन की छत पर ऐसी जगह लगाते हैं, जिससे लोग पिन नंबर डालें तो यह फुटेज में आ जाए। यह कैमरा मोबाइल की बैटरी से चलता है। बैटरी को कार में लगी डिवाइस से रिचार्ज कर लेते हैं। कैमरे में लगी चिप में डाटा भी स्टोर होता है। सीसीटीवी लगाते वक्त एटीएम केबिन में लगे कैमरे को ढक लिया जाता था। ये सब काम रात के समय में करते थे।
इन बैंकों के एटीएम थे निशाने पर
केनरा बैंक, एक्सिस बैंक अर्जुन नगर, यस बैंक संजय प्लेस, आईसीआईसीआई बैंक साईं की तकिया, कारपोरेशन बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक सदर बाजार से अब तक लाखों की रकम निकाल चुके है। मथुरा में भी कई एटीएम में वारदात कर चुके हैं। दरअसल, कई बैंकों में गार्ड मौजूद नहीं रहता है। इस कारण वे आसानी से वारदात करते हैं।
गूगल से सीखे क्लोनिंग के गुर
आरोपी सुगीत वर्मा दिल्ली मेें होटल में नौकरी करता था। पुलिस ने बताया कि कौन सी डिवाइस कार्ड स्कैन करती है? कौन सा कैमरा पिन देखने में मददगार हो सकता है? कौन सी मशीन क्लोनिंग कार्ड तैयार कर सकती हैं? इन्हें किस तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इस सबकी जानकारी उसने गूगल पर सर्च करके जानकारी थी। इसी कारण वह क्लोनिंग करने का काम खुद ही करता था। उसके साथी डिवाइस और कैमरा लगाते थे।
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एसएसपी राजेश डी मोदक ने बताया कि चार अप्रैल को अर्जुन नगर तिराहा स्थित केनरा बैंक के एटीएम के बाहर दिल्ली नंबर की आई 10 कार खड़ी थी। एटीएम के अंदर तीन संदिग्ध व्यक्ति थे। उनके सिर पर कैप और मुंह पर मास्क बंधे थे। एक ने एटीएम के सीसीटीवी कैमरे को ढक रखा था। थाना शाहगंज पुलिस ने तीनों को पकड़ लिया। इनमें सुगीत वर्मा निवासी जाफराबाद नई दिल्ली, सुमित कुमार और मो. शकील निवासी फाजलपुर थाना मंडावली दिल्ली हैं। सुगीत बी फार्मा कर चुका है। उसने ही एटीएम हैक करने के लिए चायना से साफ्टवेयर आनलाइन मंगवाया था। इसकी मदद से ही क्लोन तैयार करता है। सुमित इंटर और शकील हाईस्कूल पास है। पूछताछ में सुगीत ने बताया कि उनका गैंग एटीएम कार्ड की क्लोनिंग करता है। दिल्ली से वारदात करने यहां आते हैं। कई वारदात को अंजाम देेकर लोगों के खातों से लाखों रुपये निकाल चुके हैं। उनके पास से पांच कैमरे, तीन चार्जर, पांच क्लोन कार्ड, दो बैटरी, पांच मास्क, एक ग्लब्स, फर्जी वोटर कार्ड और पेन कार्ड, 45,000 रुपये मिले हैं।
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ऐसे होती है क्लोनिंग
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य सुनसान इलाकों के एटीएम में आने वाले लोगों को निशाना बनाते हैं। एटीएम मशीन के कार्ड स्वैपिंग स्लॉट पर विशेष मैग्नेटिक डिवाइस (स्कीमर) लगा दी जाती है। चिप के आकार की यह डिवाइस एटीएम कार्ड के बारकोड और चिप की जानकारी कापी कर लेती है। इस डिवाइस में कार्ड का ब्लूप्रिंट तैयार हो जाता है। फिर विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से एटीएम का क्लोन तैयार किया जाता है। इसमें लैपटॉप और एमआरएस 6.6 मशीन का इस्तेमाल करते हैं।
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पिन चोरी करने के लिए खुफिया कैमरा
गिरोह के सदस्य सीसीटीवी कैमरे को एटीएम केबिन की छत पर ऐसी जगह लगाते हैं, जिससे लोग पिन नंबर डालें तो यह फुटेज में आ जाए। यह कैमरा मोबाइल की बैटरी से चलता है। बैटरी को कार में लगी डिवाइस से रिचार्ज कर लेते हैं। कैमरे में लगी चिप में डाटा भी स्टोर होता है। सीसीटीवी लगाते वक्त एटीएम केबिन में लगे कैमरे को ढक लिया जाता था। ये सब काम रात के समय में करते थे।
इन बैंकों के एटीएम थे निशाने पर
केनरा बैंक, एक्सिस बैंक अर्जुन नगर, यस बैंक संजय प्लेस, आईसीआईसीआई बैंक साईं की तकिया, कारपोरेशन बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक सदर बाजार से अब तक लाखों की रकम निकाल चुके है। मथुरा में भी कई एटीएम में वारदात कर चुके हैं। दरअसल, कई बैंकों में गार्ड मौजूद नहीं रहता है। इस कारण वे आसानी से वारदात करते हैं।
गूगल से सीखे क्लोनिंग के गुर
आरोपी सुगीत वर्मा दिल्ली मेें होटल में नौकरी करता था। पुलिस ने बताया कि कौन सी डिवाइस कार्ड स्कैन करती है? कौन सा कैमरा पिन देखने में मददगार हो सकता है? कौन सी मशीन क्लोनिंग कार्ड तैयार कर सकती हैं? इन्हें किस तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इस सबकी जानकारी उसने गूगल पर सर्च करके जानकारी थी। इसी कारण वह क्लोनिंग करने का काम खुद ही करता था। उसके साथी डिवाइस और कैमरा लगाते थे।