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Deepti Sharma: एक जोड़ी कपड़ों से लेकर विश्व कप विजेता तक...दीप्ति के संघर्ष की कहानी, जो उन्होंने खुद बताई
Sat, 29 Nov 2025 10:27 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 29 Nov 2025 10:27 AM IST
सार
एक जोड़ी कपड़ों से वर्ल्ड कप तक दीप्ति शर्मा ने संघर्ष के किस्से सुनाए। उन्होंने बताया कि बचपन में घर के कांच भी तोड़े, जिसके लिए मां की डांट भी खाई। उन्होंने कहा कि आगरा ने ही हिम्मत दी है।
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लखनऊ में पुलिस हेड क्वार्टर में क्रिकेटर दीप्ति शर्मा व डीजीपी राजीव कृष्ण।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
विश्व कप विजेता स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने शुक्रवार को शहर में आयोजित भव्य सम्मान समारोह में अपने संघर्ष भरे दिनों को याद कर सभी को भावुक कर दिया।
अतुल ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज और डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन आगरा की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में दीप्ति ने खुलकर बताया कि बचपन में उनके पास केवल एक जोड़ी कपड़े हुआ करते थे। क्रिकेट खेलकर लौटने के बाद वे उन कपड़ों को अगले दिन की प्रैक्टिस के लिए खुद ही धोकर सुखाया करती थीं।
दीप्ति ने कहा कि आगरा में जन्म लेना और एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ी होना उनकी ताकत है, जहां लड़की होने के बावजूद हमेशा प्रोत्साहन मिला। उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया कि मैंने पड़ोस के नहीं, लेकिन घर के कांच ज़रूर तोड़े हैं, और इस पर मां की डांट भी खाई है।
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उन्होंने कहा कि उनके जीवन का सबसे सुनहरा पल महिला विश्व कप जीतना है। दीप्ति बोलीं मुझे दुनिया का कोई भी गेंदबाज़ कठिन नहीं लगता। बल्कि कठिन गेंदबाज़ को खेलना ही मुझे सबसे ज़्यादा मजा देता है। सम्मान समारोह में माता-पिता और भाइयों के बीच सम्मान पाकर दीप्ति ने गर्व की अनुभूति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहर का यह सम्मान उनके लिए बेहद खास है और आगरा हमेशा उनकी प्रेरणा का स्रोत रहा है।
दीप्ति ने शानदार आयोजन के लिए अतुल ग्रुप और डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन आगरा का आभार जताया और कहा कि शहर का यह प्यार उनके क्रिकेट कॅरिअर को और मजबूती देता है।
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अतुल ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज और डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन आगरा की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में दीप्ति ने खुलकर बताया कि बचपन में उनके पास केवल एक जोड़ी कपड़े हुआ करते थे। क्रिकेट खेलकर लौटने के बाद वे उन कपड़ों को अगले दिन की प्रैक्टिस के लिए खुद ही धोकर सुखाया करती थीं।
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दीप्ति ने कहा कि आगरा में जन्म लेना और एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ी होना उनकी ताकत है, जहां लड़की होने के बावजूद हमेशा प्रोत्साहन मिला। उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया कि मैंने पड़ोस के नहीं, लेकिन घर के कांच ज़रूर तोड़े हैं, और इस पर मां की डांट भी खाई है।
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उन्होंने कहा कि उनके जीवन का सबसे सुनहरा पल महिला विश्व कप जीतना है। दीप्ति बोलीं मुझे दुनिया का कोई भी गेंदबाज़ कठिन नहीं लगता। बल्कि कठिन गेंदबाज़ को खेलना ही मुझे सबसे ज़्यादा मजा देता है। सम्मान समारोह में माता-पिता और भाइयों के बीच सम्मान पाकर दीप्ति ने गर्व की अनुभूति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहर का यह सम्मान उनके लिए बेहद खास है और आगरा हमेशा उनकी प्रेरणा का स्रोत रहा है।
दीप्ति ने शानदार आयोजन के लिए अतुल ग्रुप और डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन आगरा का आभार जताया और कहा कि शहर का यह प्यार उनके क्रिकेट कॅरिअर को और मजबूती देता है।