सब जग होरी जा ब्रज होरा। ब्रज के राजा बलदेव (दाऊजी) के आंगन में हुरंगा की इस अनूठी परंपरा यहां मनाए जा रहे होली उत्सव को शिखर का स्पर्श कराती है। शुक्रवार को भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलदाऊ की नगरी बलदेव में ऐसा ही अद्भुत दृश्य दिखाई दिया। बरसाना, नंदगांव, जन्मभूमि की लठमार होली, गोकुल की छड़ीमार होली, बांकेबिहारी, द्वारिकाधीश मंदिर में होली के बाद शुक्रवार को बलदेव में हुरंगा का आयोजन किया गया।
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दाऊजी मंदिर में धूमधाम से मनाया गया हुरंगा
- फोटो : अमर उजाला
ऐसी होरी मचायी कृष्ण बलराम बिरज आनंद भयौ.., ऐसे खेले हुरंगा कृष्ण-बलराम, गूंज उठे चारों धाम... ब्रज के राजा बलदाऊजी की नगरी बलदेव के हुरंगे में भाभी-देवर की अद्भुत होली खेली गई। देवरों ने रंग डाला तो भाभियों ने कपड़ों के कोड़े बरसाए। इस हुरंगे को देखने मंदिर परिसर में जनसैलाब उमड़ पड़ा। होली गीत, रसिया के साथ नफीरी, ढोल की थाप पर हुरियारे, हुरियारिन के साथ आम लोग भी थिरकते रहे।
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दाऊजी मंदिर में धूमधाम से मनाया गया हुरंगा
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को दाऊबाबा मंदिर के दर्शन खुलते ही बलराम व रेवती मैया की जय-जयकार होने लगी। बलदेवजी को होली खेलने का निमंत्रण समाज गायन के माध्यम से बलराम कुमार होली खेले कूं, भैया खेले होरी फाग... से दिया गया।
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दाऊजी मंदिर में धूमधाम से मनाया गया हुरंगा
- फोटो : अमर उजाला
हुरियारे हुरियारिनों पर टेसू के रंग डालने लगे तो हुरियारिनों ने हुरियारों के कपड़े फाड़ दिए। उन पर कपड़ों के कोड़े बरसाना शुरू कर दिया। इस दौरान मंदिर प्रांगण में हुरियारे रेवती व बलदाऊजी जी के अलग अलग झंडे लेकर परिक्रमा करते हुए मत मारे दृगन की चोट रसिया होरी में मेरे लग जायेगी...होली गीत गाने लगे।
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दाऊजी मंदिर में धूमधाम से मनाया गया हुरंगा
- फोटो : अमर उजाला
हुरियारे नाचते गाते झूमते हुए उत्साह से नजर आ रहे थे। मंदिर प्रांगण में एक गोप पर कई महिलाएं टूट पड़ती थीं, यह देख दर्शक भी आनंदित हुए। पूरा प्रांगण केसरिया सागर में हिलोरे मारता नजर दिख रहा था। हुरियारे और हुरियारिनों की इस होली में आम लोग भी सराबोर हो गए।