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आगरा: गाय को बचाने की कोशिश में बस पलटी, दादी-पोती की मौत, कई घायल
Sun, 13 Jan 2019 02:36 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 13 Jan 2019 02:36 PM IST
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हादसे के बाद धक्का देकर बस हटाते स्थानीय लोग
- फोटो : अमर उजाला
आगरा में खुले घूम रहे पशुओं की वजह से एक और दर्दनाक हादसा हो गया। शंकरगढ़ की पुलिया पर सिटी बस पलट गई। उसमें सवार दादी-पोती की मौत हो गई। पांच लोग घायल हो गए। बस के सामने गाय आ गई थी। ड्राइवर ने उससे बचाने की कोशिश की तो बस पहले डिवाइडर पर चढ़ी और फिर खंभे से टकराकर पलट गई।
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बस किरावली से शहर में आ रही थी। इसमें 40-50 सवारियां थीं। शंकरगढ़ की पुलिया पर डिवाइडर पर कुछ चारा रखा था। गायों के लिए कुछ लोग इसे रख गए थे। बस के आने से ठीक पहले एक गाय चारा खाने के लिए डिवाइडर पर अचानक से आई। उसे देख ड्राइवर घबरा गया। उसे टक्कर लगने का खतरा था।
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ड्राइवर ने तेजी से स्टेयरिंग घुमाई। बस बिजली की तेजी से डिवाइडर पर चढ़ गई। वहां सड़क पर काफी कूड़ा पड़ा था। बस डिवाइडर से उतरी तो खंभे से टकरा गई। कूड़े के कारण पलट गई। हाहाकार मच गया। घायलों को लेकर राहगीर अस्पताल पहुंचे।
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दादी पोती की मौत
घटनास्थल पर पुलिस और स्थानीय लोग
- फोटो : अमर उजाला
अस्पताल में लड़ामदा निवासी महेश चंद की पत्नी ऊषा देवी ( 50), पौत्री प्रिया ( 13) को डॉक्टरों ने मृत बताया। प्रिया की मां ओमवती घायल हो गई। उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। हादसे में चार और लोग घायल हुए। इनमें वामन का नगला, किरावली के परमानंद और उनकी पत्नी वीरमती शामिल हैं।
तेज थी बस की रफ्तार
बस में सवार लोगों ने बताया कि शहर में आबादी के बीच भी ड्राइवर बस को काफी तेज रफ्तार से चला रहा था। बस के सामने गाय आई तो वह संतुलन नहीं बना पाया। अगर रफ्तार कम होती तो शायद वह ब्रेक मारकर बस को रोक पाता। वहीं, शंकरगढ़ की पुलिया पर दिनभर गायों का झुंड लगा रहता है। यहां लोग गायों को खिलाने के लिए खाने का सामान और चारा रख जाते हैं।
तेज थी बस की रफ्तार
बस में सवार लोगों ने बताया कि शहर में आबादी के बीच भी ड्राइवर बस को काफी तेज रफ्तार से चला रहा था। बस के सामने गाय आई तो वह संतुलन नहीं बना पाया। अगर रफ्तार कम होती तो शायद वह ब्रेक मारकर बस को रोक पाता। वहीं, शंकरगढ़ की पुलिया पर दिनभर गायों का झुंड लगा रहता है। यहां लोग गायों को खिलाने के लिए खाने का सामान और चारा रख जाते हैं।