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तोशी सेठ की हत्या को पुलिस ने माना सुसाइड
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Fri, 11 Sep 2015 01:48 AM IST
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- अगर तोशी ने सुसाइड किया तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या क्यों आई?
- एमटेक की छात्रा आत्महत्या करे और सुसाइड नोट न छोड़े, क्या यह बात गले उतरती है?
- अगर तोशी ने सुसाइड किया तो उसकी कनपटी पर चोट का निशान कैसे आया?
- अगर यह सुसाइड केस है, तो वह कुर्सी क्यों नहीं गिरी, जिस पर चढ़कर उसने फंदा लगाया?
- उसके कमरे का गेट खुला था, छात्राओं ने इसे बंद क्यों बताया?
आरबीएस इंजीनियरिंग कालेज में एमटेक की छात्रा तोशी सेठ की गला घोटकर की गई हत्या को पुलिस ने उसके मोबाइल की कॉल और एसएमएस डिटेल के आधार पर सुसाइड मान लिया है। पुलिस का कहना है कि तोशी की दोस्ती काफी दिनों से सूरज नाम के युवक से थी। इसके बाद उसकी नजदीकियां अपनी रिश्तेदारी के एक युवक से हो गई। इसका सूरज को पता चल गया था। पुलिस का मानना है कि इसी से आहत होकर तोशी ने दुपट्टे से फांसी लगाकर जान दे दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पुलिस सच नहीं मान रही है।
इलाहाबाद निवासी तोशी की हत्या छह सितंबर को हुई थी। पुलिस का कहना है कि पांच की रात को उसकी वाराणसी के सूरज से फोन पर 4.5 घंटे बात हुई। छह की दोपहर 12.23 बजे सूरज ने बात की। इसके बाद उसके मोबाइल पर किसी की कॉल रिसीव नहीं हुई। सूरज उसे लगातार कॉल करता रहा। फोन नहीं उठा तो उसने एसएमएस किए। ये एसएमएस रिसीव कर लिए गए हैं।
इसमें उसने कहा है कि वह उसे कुछ नहीं कहेगा। एक मैसेज है, प्लीज फोन उठा लो तोशी, हमारे संबंध पहले जैसे हो जाएंगे। और भी कई मैसेज हैं। एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह का कहना है कि इससे तो यही लगता है कि मामला सुसाइड का है।
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बार-बार बदली कहानी
06 सितंबर : तोशी की लाश हास्टल के कमरा नंबर 122 में पंखे से लटकी मिली।
07 सितंबर : तोशी के शव का पोस्टमार्टम हुआ, उसकी आगरा में ही अंत्येष्टि हुई।
08 सितंबर : पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उसकी हत्या की गई थी।
09 सितंबर : तोशी के मोबाइल की कॉल और एसएमएस डिटेल चेक की गई।
10 सितंबर : पुलिस ने हाईप्रोफाइल घटना को आत्महत्या करार दे दिया।
सारा की तरह पहेली बना मामला
आत्महत्या, हत्या और फिर आत्महत्या
आगरा। पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की पुत्रवधू सारा त्रिपाठी की मौत की तरह ही तोशी सेठ की हत्या का मामला पहेली बनता जा रहा है। सारा की मौत को शुरू में हादसा बताया गया था, बाद में हत्या। लेकिन सच सामने आज तक नहीं आया। आगरा, लखनऊ के फोरेंसिक एक्सपर्ट तक हार गए। इसी तरह तोशी सेठ की मौत को पहले आत्महत्या बताया गया, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हत्या। और अब फिर से आत्महत्या।
पोस्टमार्टम में कोई चूक नहीं हुई : डाक्टर
आगरा। तोशी सेठ की हत्या का खुलासा करने में नाकाम पुलिस ने इसे सुसाइड बता दिया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की बात बिल्कुल स्पष्ट है। यह भी बताया गया है कि तोशी के बाएं कान के पास चोट के निशान थे। जाहिर है उसे हत्या से पहले पीटा गया था। यह एंटी मॉर्टम इंजरी (मृत्यु पूर्व की चोट) है। उसकी मृत्यु का कारण एक्सपिक्सिया (दम घुटना) बताया गया। दम घुटने की वजह गला घोटा जाना (एंटी मॉर्टम स्ट्रेंगुलेशन) बताई गई थी। पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर केसी धाकड़ से पूछा गया कि क्या पीएम में किसी तरह की चूक हुई? कहीं ऐसा तो नहीं कि मामला हैंगिंग (फंदे पर लटकने से गला घुटने) का हो और किसी भूलवश स्ट्रेंगुलेशन लिख दिया गया हो। इस पर उनका कहना था कि पोस्टमार्टम में किसी तरह की कोई चूक नहीं हुई। उन्होंने खुद हर चीज को देखा था। निशान वैसे ही थे, जैसे गला घोटे जाने पर आते हैं।
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- एमटेक की छात्रा आत्महत्या करे और सुसाइड नोट न छोड़े, क्या यह बात गले उतरती है?
- अगर तोशी ने सुसाइड किया तो उसकी कनपटी पर चोट का निशान कैसे आया?
- अगर यह सुसाइड केस है, तो वह कुर्सी क्यों नहीं गिरी, जिस पर चढ़कर उसने फंदा लगाया?
- उसके कमरे का गेट खुला था, छात्राओं ने इसे बंद क्यों बताया?
आरबीएस इंजीनियरिंग कालेज में एमटेक की छात्रा तोशी सेठ की गला घोटकर की गई हत्या को पुलिस ने उसके मोबाइल की कॉल और एसएमएस डिटेल के आधार पर सुसाइड मान लिया है। पुलिस का कहना है कि तोशी की दोस्ती काफी दिनों से सूरज नाम के युवक से थी। इसके बाद उसकी नजदीकियां अपनी रिश्तेदारी के एक युवक से हो गई। इसका सूरज को पता चल गया था। पुलिस का मानना है कि इसी से आहत होकर तोशी ने दुपट्टे से फांसी लगाकर जान दे दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पुलिस सच नहीं मान रही है।
इलाहाबाद निवासी तोशी की हत्या छह सितंबर को हुई थी। पुलिस का कहना है कि पांच की रात को उसकी वाराणसी के सूरज से फोन पर 4.5 घंटे बात हुई। छह की दोपहर 12.23 बजे सूरज ने बात की। इसके बाद उसके मोबाइल पर किसी की कॉल रिसीव नहीं हुई। सूरज उसे लगातार कॉल करता रहा। फोन नहीं उठा तो उसने एसएमएस किए। ये एसएमएस रिसीव कर लिए गए हैं।
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इसमें उसने कहा है कि वह उसे कुछ नहीं कहेगा। एक मैसेज है, प्लीज फोन उठा लो तोशी, हमारे संबंध पहले जैसे हो जाएंगे। और भी कई मैसेज हैं। एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह का कहना है कि इससे तो यही लगता है कि मामला सुसाइड का है।
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बार-बार बदली कहानी
06 सितंबर : तोशी की लाश हास्टल के कमरा नंबर 122 में पंखे से लटकी मिली।
07 सितंबर : तोशी के शव का पोस्टमार्टम हुआ, उसकी आगरा में ही अंत्येष्टि हुई।
08 सितंबर : पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उसकी हत्या की गई थी।
09 सितंबर : तोशी के मोबाइल की कॉल और एसएमएस डिटेल चेक की गई।
10 सितंबर : पुलिस ने हाईप्रोफाइल घटना को आत्महत्या करार दे दिया।
सारा की तरह पहेली बना मामला
आत्महत्या, हत्या और फिर आत्महत्या
आगरा। पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की पुत्रवधू सारा त्रिपाठी की मौत की तरह ही तोशी सेठ की हत्या का मामला पहेली बनता जा रहा है। सारा की मौत को शुरू में हादसा बताया गया था, बाद में हत्या। लेकिन सच सामने आज तक नहीं आया। आगरा, लखनऊ के फोरेंसिक एक्सपर्ट तक हार गए। इसी तरह तोशी सेठ की मौत को पहले आत्महत्या बताया गया, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हत्या। और अब फिर से आत्महत्या।
पोस्टमार्टम में कोई चूक नहीं हुई : डाक्टर
आगरा। तोशी सेठ की हत्या का खुलासा करने में नाकाम पुलिस ने इसे सुसाइड बता दिया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की बात बिल्कुल स्पष्ट है। यह भी बताया गया है कि तोशी के बाएं कान के पास चोट के निशान थे। जाहिर है उसे हत्या से पहले पीटा गया था। यह एंटी मॉर्टम इंजरी (मृत्यु पूर्व की चोट) है। उसकी मृत्यु का कारण एक्सपिक्सिया (दम घुटना) बताया गया। दम घुटने की वजह गला घोटा जाना (एंटी मॉर्टम स्ट्रेंगुलेशन) बताई गई थी। पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर केसी धाकड़ से पूछा गया कि क्या पीएम में किसी तरह की चूक हुई? कहीं ऐसा तो नहीं कि मामला हैंगिंग (फंदे पर लटकने से गला घुटने) का हो और किसी भूलवश स्ट्रेंगुलेशन लिख दिया गया हो। इस पर उनका कहना था कि पोस्टमार्टम में किसी तरह की कोई चूक नहीं हुई। उन्होंने खुद हर चीज को देखा था। निशान वैसे ही थे, जैसे गला घोटे जाने पर आते हैं।