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60 लाख बचाने के लिए हुअा सतेंद्र का मर्डर
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
Updated Tue, 23 Feb 2016 01:48 AM IST
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मैनपुरी के दबंग कालेज संचालक ओमेंद्र यादव ने विश्वविद्यालय के वरिष्ठ परीक्षा सहायक सतेंद्र सिंह की हत्या क्यों की? पुलिस जांच के दौरान सबसे ज्यादा फोकस इसी सवाल पर किया गया। अभी तक की तफ्तीश में यह पाया गया है कि उसने 60 लाख रुपये के लिए अपने हाथ सतेंद्र के खून से रंगे। यह रकम पांच कालेजों की फीस की थी, जो उसने दबा रखी थी। वह विश्वविद्यालय में फीस जमा किए बगैर ही इन कालेजों की लाग इन आईडी खुलवाना चाहता था।
हालांकि सही जानकारी उससे पूछताछ हो जाने के बाद ही सामने आएगी। लेकिन अभी तक की पड़ताल के बारे में पुलिस सूत्रों ने बताया कि उसने पहले सतेंद्र को खरीदना चाहा। उसे लालच देकर कहा कि कुछ पैसा लेकर कोड दे दो, जिससे उसके कालेजों की लाग इन आईडी खुल जाए और परीक्षा हो सके। लेकिन सतेंद्र राजी नहीं हुआ। इसके बाद ओमेंद्र ने फर्जीवाड़ा किया। 39 लाख का फर्जी ड्राफ्ट बनाकर सतेंद्र को पकड़ाया, लेकिन उनकी पारखी नजरों ने फर्जीवाड़ा पकड़ लिया। फीस जमा करने का काम सतेंद्र के ही पास था।
असली-फर्जी ड्राफ्ट में फर्क करना उसके लिए चुटकियों का खेल था। जैसे ही सतेंद्र ने ओमेंद्र के मुंह पर फर्जी ड्राफ्ट देकर मारा, वह तिलमिला गया। यह बात 22 जनवरी की है। इसके बाद वह लगातार सतेंद्र पर दबाव बनाता रहा, लेकिन बात नहीं बनी। अब उसने दबंगई का तरीका अपनाया।
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बात दस फरवरी की है। वह एक महिला को लेकर स्कार्पियो गाड़ी से सतेंद्र के शाहगंज के ग्यासपुरा स्थित आवास पर पहुंचा। उससे कहा कि फीस लिए बगैर कोड दे दे। सतेंद्र ने मना किया। इस पर उसे धमकी दी, ‘तुझे प्यार से समझा रहा हूं, तो तेरी समझ मेें नहीं आ रहा, तेरा किडनैप करके समझाऊंगा, तो अच्छी तरह से समझ जाएगा’। सतेंद्र के परिवार ने यह धमकी सुनी। सतेंद्र के घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में वह घर में जाता हुआ और फिर बाहर आता हुआ नजर आया। इसके बाद 12 फरवरी को वह विश्वविद्यालय पहुंच गया।
कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें सिर्फ इतना मालूम है कि हत्या से पहले कमरा नंबर 32 (सतेंद्र का ऑफिस) में सतेंद्र का किसी के साथ विवाद हुआ था। माना जा रहा है कि वह ओमेंद्र ही था। उसके मोबाइल की लोकेशन वहीं ही मिली है। इसके बाद रात 7:15 बजे जब सतेंद्र स्कूटर से घर के लिए चला तो रास्ते में उसे ओमेंद्र ने रोक लिया।
इसका कोई चश्मदीद नहीं है, लेकिन ओमेंद्र के मोबाइल की लोकेशन के आधार पर पुलिस ऐसा मान रही है। सतेंद्र का स्कूटर खड़ा मिला था। उसका हेलमेट इस पर रखा था। इससे माना जा रहा है कि ओमेंद्र ने पहले सतेंद्र के साथ इत्मिनान से बात की होगी। उसने उसकी बात नहीं मानी, इसलिए उसके सीने में गोली उतार दी।
हां, इसने ही मारा है...
सतेंद्र के परिवार ने ओमेंद्र यादव को सीसीटीवी फुटेज में देखा है। इसके बाद अमर उजाला में प्रकाशित उसका फोटो देखा। इसके बाद उन्होंने कहा कि पुलिस ने सही केस खोला है। उसने ही हत्या की है। वे लोग कोर्ट में गवाही के लिए तैयार हैं।
वर्जन
सतेंद्र की हत्या में ओमेंद्र के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिल गए हैं। उसे बी वारंट पर हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी। इससे तस्वीर और साफ हो जाएगी - अनुराग वत्स ( सीओ हरीपर्वत एवं जांच अधिकारी )
सतेंद्र हत्याकांड
-- 12 फरवरी : रात 7:15 बजे पालीवाल पार्क में सतेंद्र की हत्या की गई।
-- 12 फरवरी : रात नौ बजे सतेंद्र के परिवार ने ओमेंद्र यादव पर शक जताया।
-- 15 फरवरी : पुलिस को ओमेंद्र यादव के खिलाफ साक्ष्य मिल गए।
-- 17 फरवरी : ओमेंद्र की तलाश में पुलिस ने दबिश देना शुरू किया।
-- 18 फरवरी : ओमेंद्र को लिखा पढ़ी में वांटेड घोषित किया गया।
-- 21 फरवरी : विश्वविद्यालय कर्मचारियों ने आंदोलन को तेज करने की तैयारी की।
-- 22 फरवरी : ओमेंद्र ने पुराने मामले में मैनपुरी कोर्ट में सरेंडर कर दिया।
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हालांकि सही जानकारी उससे पूछताछ हो जाने के बाद ही सामने आएगी। लेकिन अभी तक की पड़ताल के बारे में पुलिस सूत्रों ने बताया कि उसने पहले सतेंद्र को खरीदना चाहा। उसे लालच देकर कहा कि कुछ पैसा लेकर कोड दे दो, जिससे उसके कालेजों की लाग इन आईडी खुल जाए और परीक्षा हो सके। लेकिन सतेंद्र राजी नहीं हुआ। इसके बाद ओमेंद्र ने फर्जीवाड़ा किया। 39 लाख का फर्जी ड्राफ्ट बनाकर सतेंद्र को पकड़ाया, लेकिन उनकी पारखी नजरों ने फर्जीवाड़ा पकड़ लिया। फीस जमा करने का काम सतेंद्र के ही पास था।
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असली-फर्जी ड्राफ्ट में फर्क करना उसके लिए चुटकियों का खेल था। जैसे ही सतेंद्र ने ओमेंद्र के मुंह पर फर्जी ड्राफ्ट देकर मारा, वह तिलमिला गया। यह बात 22 जनवरी की है। इसके बाद वह लगातार सतेंद्र पर दबाव बनाता रहा, लेकिन बात नहीं बनी। अब उसने दबंगई का तरीका अपनाया।
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बात दस फरवरी की है। वह एक महिला को लेकर स्कार्पियो गाड़ी से सतेंद्र के शाहगंज के ग्यासपुरा स्थित आवास पर पहुंचा। उससे कहा कि फीस लिए बगैर कोड दे दे। सतेंद्र ने मना किया। इस पर उसे धमकी दी, ‘तुझे प्यार से समझा रहा हूं, तो तेरी समझ मेें नहीं आ रहा, तेरा किडनैप करके समझाऊंगा, तो अच्छी तरह से समझ जाएगा’। सतेंद्र के परिवार ने यह धमकी सुनी। सतेंद्र के घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में वह घर में जाता हुआ और फिर बाहर आता हुआ नजर आया। इसके बाद 12 फरवरी को वह विश्वविद्यालय पहुंच गया।
कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें सिर्फ इतना मालूम है कि हत्या से पहले कमरा नंबर 32 (सतेंद्र का ऑफिस) में सतेंद्र का किसी के साथ विवाद हुआ था। माना जा रहा है कि वह ओमेंद्र ही था। उसके मोबाइल की लोकेशन वहीं ही मिली है। इसके बाद रात 7:15 बजे जब सतेंद्र स्कूटर से घर के लिए चला तो रास्ते में उसे ओमेंद्र ने रोक लिया।
इसका कोई चश्मदीद नहीं है, लेकिन ओमेंद्र के मोबाइल की लोकेशन के आधार पर पुलिस ऐसा मान रही है। सतेंद्र का स्कूटर खड़ा मिला था। उसका हेलमेट इस पर रखा था। इससे माना जा रहा है कि ओमेंद्र ने पहले सतेंद्र के साथ इत्मिनान से बात की होगी। उसने उसकी बात नहीं मानी, इसलिए उसके सीने में गोली उतार दी।
हां, इसने ही मारा है...
सतेंद्र के परिवार ने ओमेंद्र यादव को सीसीटीवी फुटेज में देखा है। इसके बाद अमर उजाला में प्रकाशित उसका फोटो देखा। इसके बाद उन्होंने कहा कि पुलिस ने सही केस खोला है। उसने ही हत्या की है। वे लोग कोर्ट में गवाही के लिए तैयार हैं।
वर्जन
सतेंद्र की हत्या में ओमेंद्र के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिल गए हैं। उसे बी वारंट पर हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी। इससे तस्वीर और साफ हो जाएगी - अनुराग वत्स ( सीओ हरीपर्वत एवं जांच अधिकारी )
सतेंद्र हत्याकांड
-- 12 फरवरी : रात 7:15 बजे पालीवाल पार्क में सतेंद्र की हत्या की गई।
-- 12 फरवरी : रात नौ बजे सतेंद्र के परिवार ने ओमेंद्र यादव पर शक जताया।
-- 15 फरवरी : पुलिस को ओमेंद्र यादव के खिलाफ साक्ष्य मिल गए।
-- 17 फरवरी : ओमेंद्र की तलाश में पुलिस ने दबिश देना शुरू किया।
-- 18 फरवरी : ओमेंद्र को लिखा पढ़ी में वांटेड घोषित किया गया।
-- 21 फरवरी : विश्वविद्यालय कर्मचारियों ने आंदोलन को तेज करने की तैयारी की।
-- 22 फरवरी : ओमेंद्र ने पुराने मामले में मैनपुरी कोर्ट में सरेंडर कर दिया।