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एकदम फिल्मी है राकेश-मुकेश के रंगा-बिल्ला बनने की कहानी

Mon, 22 May 2017 02:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा Updated Mon, 22 May 2017 02:58 PM IST
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story of rakesh mukesh is same as film in mathura
राकेश रंगा - फोटो : अमर उजाला
रंगा और बिल्ला क्राइम की दुनिया में कुख्यात नाम रहा है। ये दो खूंखार अपराधी थे जिन्होंने दिल्ली से एक सैन्य अफसर के बच्चों का अपहरण करके उनकी हत्या कर दी थी। एक करोड़ की फिरौती मांगी गई थी। विदेशों तक मामला गूंजा था। दोनों को फांसी भी हुई थी। 
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जरायम की दुनिया में नाम का खौफ फैलाने वाले तमाम बदमाशों ने अपने नाम रंगा बिल्ला रख लिए थे। राकेश और मुकेश को भी उसके साथियों और मुहल्ले वालों ने यह नाम दे दिया था। बालस्वरूप चतुर्वेदी के बेटे राकेश और मुकेश बचपन से ही दोस्ताना व्यवहार में रहते थे। जहां भी जाते हमेशा साथ। 
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लोग भी कहने लगे थे कि दोनों भाइयों की जोड़ी है। जैसे-जैसे दोनों बड़े हुए इन्होंने क्राइम की दुनिया में दस्तक दे दी। मारपीट, लोगों को धमकाना और मकान पर कब्जा कर लेना पेशा बन गया था। उस वक्त रंगा और बिल्ला नाम के दो बदमाशों के नाम क्राइम की दुनिया में गूंज रहे थे। 
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स्थिति यह थी कि जो भी गलत काम करता था उसे रंगा और बिल्ला कह दिया जाता था। राकेश और मुकेश भी क्राइम करने लगे थे लिहाजा उनका नाम भी रंगा बिल्ला पड़ गया। रंगा और बिल्ला हर वारदात में साथ रहे हैं। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक हत्या और लूट की वारदातें भी दोनों ने साथ मिलकर की हैं। बारह मुकदमे दर्ज हैं वह दोनों पर ही हैं।
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