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एसपी सिटी ने पलट दी एसपी क्राइम मथुरा की रिपोर्ट
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 03 Sep 2015 02:00 AM IST
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जांच रिपोर्ट -1
एसके समाधिया (सब रजिस्ट्रार) एक भूमाफिया प्रवृत्ति का आपराधी है, जिसने अपर जिलाधिकारी नगर आगरा के आदेश से थाना सिकंदरा में कई अभियोग पंजीकृत कराए हैं। यह स्थिति विभागीय आदेशों के कहीं न कहीं उल्लंघन का प्रकरण लगता है। थाना, समाधिया और एडीएम सिटी के बीच दुरभिसंधि की ओर इंगित करता है।
- अशोक कुमार राय (एसपी क्राइम, मथुरा)
जांच रिपोर्ट - 2
जांच के दौरान एसके समाधिया की राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों से दुरभिसंधि होने, पद का दुरुपयोग करने तथा भूमाफिया प्रवृति का अपराधी होने का कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। अपितु सीओ प्रज्ञान की आख्या के अनुसार शिकायतकर्ता जितेंद्र शर्मा तथाकथित भूमाफिया है और डीएम आगरा के फर्जी हस्ताक्षर करने वालों का सहयोगी है।
- राजेश कुमार सिंह (एसपी सिटी, आगरा)
एक ही रैंक के दो अधिकारियों की एक ही मामले में एक दूसरे से बिल्कुल जुदा रिपोर्ट। एक ने एडीएम सिटी राजेश कुमार श्रीवास्तव को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया तो दूसरे ने क्लीन चिट दे दी। लेकिन सही तो एक ही है। एसपी क्राइम मथुरा एके राय ने रिपोर्ट दी सात जुलाई को, जबकि एसपी सिटी आगरा राजेश कुमार सिंह की रिपोर्ट आई 26 अगस्त को।
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दोनों सिर्फ एडीएम सिटी की भूमिका पर अलग अलग नहीं है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसे सब रजिस्ट्रार एसके समाधिया पर भी दोनों की राय एक दूसरे से बिल्कुल जुदा है। जाहिर है दाल में कहीं न कहीं कुछ काला है।
अशोक कुमार राय ने जांच की डीआईजी लक्ष्मी सिंह के आदेश पर, जबकि राजेश कुमार सिंह को जांच का जिम्मा दिया एसएसपी राजेश डी मोड़क ने। पहले डीआईजी ने जांच कराई। इसके बाद एसएसपी ने। अब पुलिस और प्रशासन के आला अफसर टेंशन में है कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जाए ?
दोनों में से एक रिपोर्ट सही माननी होगी। अगर अशोक कुमार राय को सही मानते हैं तो एसपी सिटी के साथ एडीएम सिटी पर भी आंच आ सकती है। अगर एसपी सिटी की जांच रिपोर्ट सही मानी जाती है तो अशोक कुमार राय पर गाज गिरनी तय है।
उधर, एडीएम सिटी राजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि उनका इस प्रकरण से कोई लेना देना ही नहीं है। उनके सामने जो प्रार्थना पत्र आया, उन्होंने उस पर एफआईआर के आदेश नहीं किए, सिर्फ विधि अनुसार कार्रवाई के लिए लिखा था।
एसपी सिटी की रिपोर्ट नहीं मिली - डीआईजी
डीआईजी लक्ष्मी सिंह का कहना है कि एसपी क्राइम मथुरा की जांच रिपोर्ट उन्हें मिल चुकी है, लेकिन एसपी सिटी आगरा की नहीं। जिसकी भी गलती होगी, उसी पर कार्रवाई होगी।
यह है मामला
- सब रजिस्ट्रार एसके समाधिया पर कोर्ट के आदेश पर 29 केस दर्ज हुए थे। जमीन कब्जाने के आरोप लगे। समाधिया ने भी अपने विपक्षियों के खिलाफ एफआईआर कराई। ये लोग डीआईजी के पास गए और समाधिया की एडीएम सिटी से मिलीभगत के आरोप लगाए। इस पर डीआईजी ने जांच दी एसपी क्राइम मथुरा को। उनकी रिपोर्ट आने के बाद समाधिया पक्ष की शिकायत पर एसएसपी ने जांच कराई एसपी सिटी आगरा से।
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एसके समाधिया (सब रजिस्ट्रार) एक भूमाफिया प्रवृत्ति का आपराधी है, जिसने अपर जिलाधिकारी नगर आगरा के आदेश से थाना सिकंदरा में कई अभियोग पंजीकृत कराए हैं। यह स्थिति विभागीय आदेशों के कहीं न कहीं उल्लंघन का प्रकरण लगता है। थाना, समाधिया और एडीएम सिटी के बीच दुरभिसंधि की ओर इंगित करता है।
- अशोक कुमार राय (एसपी क्राइम, मथुरा)
जांच रिपोर्ट - 2
जांच के दौरान एसके समाधिया की राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों से दुरभिसंधि होने, पद का दुरुपयोग करने तथा भूमाफिया प्रवृति का अपराधी होने का कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। अपितु सीओ प्रज्ञान की आख्या के अनुसार शिकायतकर्ता जितेंद्र शर्मा तथाकथित भूमाफिया है और डीएम आगरा के फर्जी हस्ताक्षर करने वालों का सहयोगी है।
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- राजेश कुमार सिंह (एसपी सिटी, आगरा)
एक ही रैंक के दो अधिकारियों की एक ही मामले में एक दूसरे से बिल्कुल जुदा रिपोर्ट। एक ने एडीएम सिटी राजेश कुमार श्रीवास्तव को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया तो दूसरे ने क्लीन चिट दे दी। लेकिन सही तो एक ही है। एसपी क्राइम मथुरा एके राय ने रिपोर्ट दी सात जुलाई को, जबकि एसपी सिटी आगरा राजेश कुमार सिंह की रिपोर्ट आई 26 अगस्त को।
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दोनों सिर्फ एडीएम सिटी की भूमिका पर अलग अलग नहीं है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसे सब रजिस्ट्रार एसके समाधिया पर भी दोनों की राय एक दूसरे से बिल्कुल जुदा है। जाहिर है दाल में कहीं न कहीं कुछ काला है।
अशोक कुमार राय ने जांच की डीआईजी लक्ष्मी सिंह के आदेश पर, जबकि राजेश कुमार सिंह को जांच का जिम्मा दिया एसएसपी राजेश डी मोड़क ने। पहले डीआईजी ने जांच कराई। इसके बाद एसएसपी ने। अब पुलिस और प्रशासन के आला अफसर टेंशन में है कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जाए ?
दोनों में से एक रिपोर्ट सही माननी होगी। अगर अशोक कुमार राय को सही मानते हैं तो एसपी सिटी के साथ एडीएम सिटी पर भी आंच आ सकती है। अगर एसपी सिटी की जांच रिपोर्ट सही मानी जाती है तो अशोक कुमार राय पर गाज गिरनी तय है।
उधर, एडीएम सिटी राजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि उनका इस प्रकरण से कोई लेना देना ही नहीं है। उनके सामने जो प्रार्थना पत्र आया, उन्होंने उस पर एफआईआर के आदेश नहीं किए, सिर्फ विधि अनुसार कार्रवाई के लिए लिखा था।
एसपी सिटी की रिपोर्ट नहीं मिली - डीआईजी
डीआईजी लक्ष्मी सिंह का कहना है कि एसपी क्राइम मथुरा की जांच रिपोर्ट उन्हें मिल चुकी है, लेकिन एसपी सिटी आगरा की नहीं। जिसकी भी गलती होगी, उसी पर कार्रवाई होगी।
यह है मामला
- सब रजिस्ट्रार एसके समाधिया पर कोर्ट के आदेश पर 29 केस दर्ज हुए थे। जमीन कब्जाने के आरोप लगे। समाधिया ने भी अपने विपक्षियों के खिलाफ एफआईआर कराई। ये लोग डीआईजी के पास गए और समाधिया की एडीएम सिटी से मिलीभगत के आरोप लगाए। इस पर डीआईजी ने जांच दी एसपी क्राइम मथुरा को। उनकी रिपोर्ट आने के बाद समाधिया पक्ष की शिकायत पर एसएसपी ने जांच कराई एसपी सिटी आगरा से।