{"_id":"d7df0b34f51272aa37788e8f9c534950","slug":"sn-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आधे घंटे में दो नवजात की मौत, हंगामा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
आधे घंटे में दो नवजात की मौत, हंगामा
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 03 Nov 2015 01:55 AM IST
विज्ञापन
एसएन मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग में आधे घंटे के अंतराल में दो नवजात शिशुओं की मौत हो गई। इनके घरवालों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना पर आई पुलिस ने इन लोगों को शांत कराया।
सैंया के लादूखेड़ा निवासी सीमा ने 12 अक्तूबर को सैंया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर बेटे को जन्म दिया था। प्रसव बाद शिशु के नहीं रोने पर उसे एसएन मेडिकल कालेज रेफर किया गया। यहां बाल रोग विभाग के नवजात सघन चिकित्सा यूनिट में वह वेंटिलेटर पर रहा।
सोमवार सुबह आठ बजे उसने दम तोड़ दिया। दूसरा मामला नाई की मंडी निवासी नेहा का है। नेहा ने तकरीबन दस दिन पहले बच्ची को जन्म दिया था। इसका वजन महज 1100 ग्राम था। रक्त में भी संक्रमण था। उसे एक नवंबर को बाल रोग विभाग में भर्ती कराया गया। सुबह साढ़े आठ बजे इसने भी दम तोड़ दिया। आधा घंटे में दो नवजात की मौत पर इनके घरवालों में आक्रोश व्याप्त हो गया। उन्होंने नारेबाजी की। उनका आरोप था कि डाक्टर नवजात को समय पर देखने नहीं आए। शिकायत पर प्राचार्य ने मामले की जांच की।
विज्ञापन
लापरवाही से पहले भी हो चुकी है मौत
- अगस्त में भी तीन नवजात ने दम तोड़ दिया था। तब विद्युत आपूर्ति ठप होने पर नवजात सघन चिकित्सा यूनिट में जीवन रक्षक उपकरण बंद हो गए थे। इसके बाद विभागाध्यक्ष समेत एसआईसी को सस्पेंड कर दिया गया था। हालांकि, बाद में शासन ने उन्हें बहाल कर दिया।
वर्जन
- सैंया के सीएचसी में पैदा हुए नवजात को आक्सीजन की कमी से ब्रेन हेमरेज हो गया था। दूसरे नवजात का वजन कम था और रक्त में संक्रमण था। बेहद नाजुक हालत में दोनों को यहां लाया गया था। इलाज में कोई लापरवाही नहीं की गई। तीन शिफ्ट में डाक्टर राउंड लगाते हैं।
डा. एसके गर्ग, प्राचार्य, एसएन मेडिकल कालेज
विज्ञापन
सैंया के लादूखेड़ा निवासी सीमा ने 12 अक्तूबर को सैंया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर बेटे को जन्म दिया था। प्रसव बाद शिशु के नहीं रोने पर उसे एसएन मेडिकल कालेज रेफर किया गया। यहां बाल रोग विभाग के नवजात सघन चिकित्सा यूनिट में वह वेंटिलेटर पर रहा।
विज्ञापन
सोमवार सुबह आठ बजे उसने दम तोड़ दिया। दूसरा मामला नाई की मंडी निवासी नेहा का है। नेहा ने तकरीबन दस दिन पहले बच्ची को जन्म दिया था। इसका वजन महज 1100 ग्राम था। रक्त में भी संक्रमण था। उसे एक नवंबर को बाल रोग विभाग में भर्ती कराया गया। सुबह साढ़े आठ बजे इसने भी दम तोड़ दिया। आधा घंटे में दो नवजात की मौत पर इनके घरवालों में आक्रोश व्याप्त हो गया। उन्होंने नारेबाजी की। उनका आरोप था कि डाक्टर नवजात को समय पर देखने नहीं आए। शिकायत पर प्राचार्य ने मामले की जांच की।
विज्ञापन
लापरवाही से पहले भी हो चुकी है मौत
- अगस्त में भी तीन नवजात ने दम तोड़ दिया था। तब विद्युत आपूर्ति ठप होने पर नवजात सघन चिकित्सा यूनिट में जीवन रक्षक उपकरण बंद हो गए थे। इसके बाद विभागाध्यक्ष समेत एसआईसी को सस्पेंड कर दिया गया था। हालांकि, बाद में शासन ने उन्हें बहाल कर दिया।
वर्जन
- सैंया के सीएचसी में पैदा हुए नवजात को आक्सीजन की कमी से ब्रेन हेमरेज हो गया था। दूसरे नवजात का वजन कम था और रक्त में संक्रमण था। बेहद नाजुक हालत में दोनों को यहां लाया गया था। इलाज में कोई लापरवाही नहीं की गई। तीन शिफ्ट में डाक्टर राउंड लगाते हैं।
डा. एसके गर्ग, प्राचार्य, एसएन मेडिकल कालेज