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धौलपुर के गैंग से मुठभेड़ में शहीद हुए थे सिपाही अजय

Tue, 18 Apr 2017 01:19 AM IST
धौलपुर के गैंग से मुठभेड़ में शहीद हुए थे सिपाही अजय
धौलपुर के गैंग से मुठभेड़ में शहीद हुए थे सिपाही अजय Updated Tue, 18 Apr 2017 01:19 AM IST
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धौलपुर के गैंग से मुठभेड़ में शहीद हुए थे सिपाही अजय - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
शमसाबाद में पांच अप्रैल की देर शाम थाना के पास सिपाही अजय यादव की हत्या कर उसकी सरकारी पिस्टल लूट लिए जाने की वारदात धौलपुर ( राजस्थान ) के राजाखेड़ा के रंगदारों के गिरोह ने की थी। घटना में शामिल तीनों अपराधी रंजीत ठाकुर, योगेश उर्फ खन्ना और देवी सिंह उर्फ देवा मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिए गए हैं। अजय से लुटी पिस्टल बरामद हो गई है। पुलिस का दावा है कि अजय ने इन्हें पकड़ने की कोशिश की थी जिस पर इन्होंने उसे घेर लिया था। अजय ने रक्षा में गोली चलाई थी जो योगेश के बाएं हाथ के पंजे पर लगी। यह देख  देवा ने अपने पिस्टल से अजय के सीने पर सटाकर गोली मार दी थी।
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इस खुलासे से यह भी साफ हो गया कि अजय बदमाशों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए थे। इससे पहले घटना को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे। उन्हें शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग लेकर उनके परिवार को अनशन तक करना पड़ा था। पुलिस लाइन में सोमवार शाम खुलासे से संबंधित प्रेस कांफ्रेंस में एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह ने उन्हें शहीद ही कहा। इससे पहले डीजीपी जावीद अहमद ने उनके परिवार को फोन पर आश्वासन दिया था कि अजय को शहीद का दर्जा दिया जाएगा। बता दें, अजय यादव मैनपुर के किशनी के चांदा गांव के रहने वाले थे। वह शमसाबाद थाने पर तैनात थे। पांच अप्रैल को शमसाबाद के पास लगे मेले से लौटते समय थाना के पास उनकी हत्या कर दी गई थी। बकौल एसएसपी, पुलिस को हुलिए के आधार पर अपराधियों के नाम पते पहले ही मिल गए थे। आईजी सुजीत पांडे ने तीनों पर 15-15 हजार ईनाम घोषित कर दिया था। खुलासे में शामिल टीम को डीजीपी ने 50 हजार का ईनाम देने की घोषणा की है। गिरफ्तार अपराधियों पर लूट और चौथ वसूली समेत संगीन धाराओं के 14 केस दर्ज हैं।
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मोबाइल की लोकेशन से पकड़े गए सिपाही के हत्यारे
आगरा। सिपाही अजय यादव की हत्या के खुलासे में सर्विलांस सेल की भूमिका अहम रही। पुलिस ने ऐसे मोबाइल फोन की डिटेल निकाली जिनकी लोकेशन अजय के मोबाइल के साथ बदल रही थी। दरअसल अजय ने बदमाशों का पीछा किया काफी दूर तक किया था। इस दौरान उसने अपने मोबाइल से फोन करके पुलिस से मदद भी मांगी थी। इससे पुलिस को सटीक समय भी मिल गया। इस दौरान की लोकेशन निकलवाई गई तो बदमाशों के मोबाइल नंबर मिल गए।
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पुलिस सूत्रों ने बताया कि मोबाइल नंबर के जरिए पुलिस ने उनकी पूरी कुंडली तैयार कर ली। उनके फोटो हासिल कर लिए। वारदात कई दुकानदारों के सामने हुई थी। अजय की बाइक पर उसका एक मुखबिर भी बैठा था। पुलिस ने फोटो इन सभी को दिखलाए, तो इन्होंने पहचान लिया। अब सिर्फ गिरफ्तारी का काम रह गया था। एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि बदमाशों को सोमवार दोपहर 1:30 बजे निबोहरा-शमसाबाद रोड पर तिवरिया के पास से मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया।

.32 बोर की पिस्टल से मारी थी गोली
अजय को गोली .32 बोर की पिस्टल से मारी गई थी। बदमाशों के पास तमंचा भी था। अजय को गोली लगने के बाद उनका नाइन एमएम का पिस्टल लूटा गया था। पुलिस ने बदमाशों से दोनों पिस्टल और तमंचा बरामद कर लिया है। बदमाशों की अपाचे बाइक भी बरामद की गई है।

तो बच सकती थी अजय की जान
अजय ने बदमाशों को बाइक पर देखने के बाद पुलिस को फोन किया था। लेकिन पुलिस थोड़ा देरी से पहुंची। तब तक पूरा घटनाक्रम हो चुका था। अगर पुलिस तुरंत ही पहुंच जाती तो अजय को बदमाशों से अकेले भिड़ने की नौबत ही न आती। उनकी जान बच सकती थी।

निलंबित सिपाही हो सकते हैं बहाल
पुलिस सूत्रों का कहना है कि अजय की हत्या के खुलासे के बाद अब अफसरों का रुख उसके साथी सिपाहियों पर नरम पड़ सकता है। अजय के परिवारीजनों ने उनकी बहाली की मांग की है। उन्होंने अजय की हत्या के बाद सीओ फतेहाबाद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। बगावत पर उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

सीओ फतेहाबाद की जान में जान आई
वारदात के खुलासे से सबसे ज्यादा राहत सीओ फतेहाबाद एके सिंह महसूस कर रहे हैं। ऐसा उनका चेहरा देखकर लग रहा था। अजय यादव के परिवार ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके चलते डीजीपी तक ने उनके खिलाफ  जांच के आदेश दे दिए थे। वह बड़ी टेंशन में बताए जा रहे थे।

पैगोरिया स्वीट्स से मांगी थी रंगदारी
सिपाही की हत्या में पकड़े गए बदमाश चौथ वसूली के लिए बदनाम हैं। इन्होंने फतेहाबाद के पैगोरिया स्वीट्स के मालिक से चौथ मांगी थी। दहशत के लिए फायरिंग भी की थी। इसके अलावा और भी कई व्यापारियों से चौथ वसूली कर चुके हैं। इन्होंने बाइक लूट की भी कई वारदात की हैं। इन पर फतेहाबाद, शमसाबादा, पिनाहट, इरादत नगर, बसई अरेला, खेरागढ़ मेें केस दर्ज हैं।


सिपाही की हत्या में शामिल अपराधियों के साथियों और मददगारों पर भी कार्रवाई की जाएगी। इस गिरोह पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत महसूस हुई तो आरोपियों को रिमांड पर लिया जाएगा - डा. प्रीतिंदर सिंह ( एसएसपी )
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