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खटीकपाड़ा में लगाई जाती थी पिस्टलों पर मुहर
खटीकपाड़ा में लगाई जाती थी पिस्टलों पर मुहर
Updated Wed, 08 Mar 2017 01:26 AM IST
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खटीकपाड़ा में लगाई जाती थी पिस्टलों पर मुहर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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डुप्लिकेट विदेशी पिस्टलों की फैक्ट्री के मामले में मंगलवार को एक और खुलासा हुआ। पुलिस को पता चला कि निखिल पैराडाइज और पश्चिमपुरी की फैक्ट्रियों में पिस्टल तैयार होने के बाद इन पर नंबर और कंपनी की मुहर खटीकपाड़ा में लगाई जाती थी। यह काम जूता कारीगर राजू कर रहा था। उसे प्रति पिस्टल 1.5 हजार रुपये मिलते थे। पुलिस ने उसके घर से लगभग 2.5 लाख कीमत की भारी भरकम खराद मशीन बरामद की। इसे निकालने के लिए छह मजदूर लगाने पड़े। मकान का लोहे का गेट भी तोड़ना पड़ा।
यह खुलासा तो सोमवार को ही हो गया था कि वेवले, बेराटा, स्टार जैसे ब्रांड की पिस्टलों की हूबहू डुप्लिकेट पिस्टलें शास्त्रीपुरम के निखिल पैराडाइज में तैयार की जा रही थीं। यहां पार्ट्स बनते थे। दूसरी फैक्ट्री पश्चिमपुरी में थे। यहां पार्ट्स को जोड़कर पॉलिश की जाती थी। इसके बाद इन्हें खटीकपाड़ा में जूता कारीगर राजू की फैक्ट्री में भेजा जाता था। वह इन पर नंबर लिखता था और कंपनी की मुहर लगाता था। इसके बाद पिस्टल आर्म्स डीलर को भेजी जाती थी।
पुलिस ने राजू को सोमवार की शाम ही हिरासत में ले लिया था। उससे पूछताछ के बाद मंगलवार सुबह उसके घर एत्माद्दौला थाना पुलिस पहुंची। घर से खराद की बड़ी मशीन मिली। इसे निकालने में तीन घंटे लग गए। इस दौरान वहां भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने बताया कि राजू और लोकेश की कई सालों से दोस्ती है। लोकेश के कहने पर ही उसने यह काम शुरू किया। उधर राजू की पत्नी शीला का कहना है कि लोकेश से उसके पति का एक साल पहले झगड़ा हुआ था, इसलिए उसने उसके पति को फंसाया है।
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1. हरजीत सिंह सरना
लखनऊ का आर्म्स डीलर है। लखनऊ में शस्त्र की तीन दुकानें हैं। नार्थ इंडिया के कई आर्म्स डीलर से रिश्ते हैं। ये लोग प्रति पिस्टल छह से आठ लाख में बेचते थे। हरजीत अपने और उनके ऑर्डर लेकर आगरा के लोकेश को डिमांड और पिस्टल की कैटलॉग भेजता था।
2. लोकेश शर्मा
आवास विकास सेक्टर नौ का निवासी है। मैथमेटिक्स में फर्स्ट डिवीजन एमएससी है। एक्सक्लूसिव क्लासेस नाम से कोचिंग सेंटर है। हरजीत की डिमांड पर पिस्टल की स्लाइड तैयार करता था। उसे प्रति पिस्टल 1.5 लाख मिलते थे।
3. हरबख्श सिंह
दिल्ली के ख्याला का रहने वाला खराद मेकेनिक है। लोकेश इसे पिस्टल की स्लाइड देता था। यह स्लाइड देखकर डाई तैयार करता था। फिर पिस्टल के सारे पार्ट्स बनाता था। इसके बदले इसे प्रति पिस्टल 20 हजार रुपये मिलते थे।
4. राजू सिंह
खटीकपाड़ा का जूता कारीगर है। लोकेश जब पिस्टल को फाइनल टच दे देता था, तब उस पर मुहर लगाने और नंबर लिखने का काम राजू करता था। इसके लिए उसे प्रति पिस्टल 1.5 हजार रुपये दिए जाते थे।
यमुना किनारे करते थे पिस्टलों का परीक्षण
आगरा। डुप्लिकेट पिस्टल को असली जैसा बनाने के लिए तमाम बंदोबस्त किए गए थे। यमुना किनारे फायरिंग रेंज बना ली गई थी। पिस्टल तैयार हो जाने के बाद इसमें परीक्षण किया जाता था। उनकी रेंज देखी जाती थी। यह भी चेक किया जाता था कि खोखे पर निशान असली पिस्टल के पिन जैसा बन रहा है या नहीं। पिस्टल फैक्ट्री से लगभग 200 कारतूस के खोखे मिले थे। इनके बारे में आरोपियों से पूछा तो बताया कि पिस्टलों का परीक्षण करने के लिए फायर किए गए। ये लोग अलग अलग बोर की पिस्टल बनाते थे। आर्म्स डीलर इन्हें सभी तरह के कारतूस मुहैया कराते थे। किसी को शक न हो, इसलिए परीक्षण की जगह बदलते रहते थे। कभी एत्माद्दौला में तो कभी सिकंदरा में। हरजीत सिंह सरना ने पुलिस बताया कि आज तक पिस्टल केबारे में एक भी शिकायत नहीं आई। लोग असली समझकर ले जाते थे। कभी किसी पिस्टल ने धोखा नहीं दिया।
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यह खुलासा तो सोमवार को ही हो गया था कि वेवले, बेराटा, स्टार जैसे ब्रांड की पिस्टलों की हूबहू डुप्लिकेट पिस्टलें शास्त्रीपुरम के निखिल पैराडाइज में तैयार की जा रही थीं। यहां पार्ट्स बनते थे। दूसरी फैक्ट्री पश्चिमपुरी में थे। यहां पार्ट्स को जोड़कर पॉलिश की जाती थी। इसके बाद इन्हें खटीकपाड़ा में जूता कारीगर राजू की फैक्ट्री में भेजा जाता था। वह इन पर नंबर लिखता था और कंपनी की मुहर लगाता था। इसके बाद पिस्टल आर्म्स डीलर को भेजी जाती थी।
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पुलिस ने राजू को सोमवार की शाम ही हिरासत में ले लिया था। उससे पूछताछ के बाद मंगलवार सुबह उसके घर एत्माद्दौला थाना पुलिस पहुंची। घर से खराद की बड़ी मशीन मिली। इसे निकालने में तीन घंटे लग गए। इस दौरान वहां भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने बताया कि राजू और लोकेश की कई सालों से दोस्ती है। लोकेश के कहने पर ही उसने यह काम शुरू किया। उधर राजू की पत्नी शीला का कहना है कि लोकेश से उसके पति का एक साल पहले झगड़ा हुआ था, इसलिए उसने उसके पति को फंसाया है।
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1. हरजीत सिंह सरना
लखनऊ का आर्म्स डीलर है। लखनऊ में शस्त्र की तीन दुकानें हैं। नार्थ इंडिया के कई आर्म्स डीलर से रिश्ते हैं। ये लोग प्रति पिस्टल छह से आठ लाख में बेचते थे। हरजीत अपने और उनके ऑर्डर लेकर आगरा के लोकेश को डिमांड और पिस्टल की कैटलॉग भेजता था।
2. लोकेश शर्मा
आवास विकास सेक्टर नौ का निवासी है। मैथमेटिक्स में फर्स्ट डिवीजन एमएससी है। एक्सक्लूसिव क्लासेस नाम से कोचिंग सेंटर है। हरजीत की डिमांड पर पिस्टल की स्लाइड तैयार करता था। उसे प्रति पिस्टल 1.5 लाख मिलते थे।
3. हरबख्श सिंह
दिल्ली के ख्याला का रहने वाला खराद मेकेनिक है। लोकेश इसे पिस्टल की स्लाइड देता था। यह स्लाइड देखकर डाई तैयार करता था। फिर पिस्टल के सारे पार्ट्स बनाता था। इसके बदले इसे प्रति पिस्टल 20 हजार रुपये मिलते थे।
4. राजू सिंह
खटीकपाड़ा का जूता कारीगर है। लोकेश जब पिस्टल को फाइनल टच दे देता था, तब उस पर मुहर लगाने और नंबर लिखने का काम राजू करता था। इसके लिए उसे प्रति पिस्टल 1.5 हजार रुपये दिए जाते थे।
यमुना किनारे करते थे पिस्टलों का परीक्षण
आगरा। डुप्लिकेट पिस्टल को असली जैसा बनाने के लिए तमाम बंदोबस्त किए गए थे। यमुना किनारे फायरिंग रेंज बना ली गई थी। पिस्टल तैयार हो जाने के बाद इसमें परीक्षण किया जाता था। उनकी रेंज देखी जाती थी। यह भी चेक किया जाता था कि खोखे पर निशान असली पिस्टल के पिन जैसा बन रहा है या नहीं। पिस्टल फैक्ट्री से लगभग 200 कारतूस के खोखे मिले थे। इनके बारे में आरोपियों से पूछा तो बताया कि पिस्टलों का परीक्षण करने के लिए फायर किए गए। ये लोग अलग अलग बोर की पिस्टल बनाते थे। आर्म्स डीलर इन्हें सभी तरह के कारतूस मुहैया कराते थे। किसी को शक न हो, इसलिए परीक्षण की जगह बदलते रहते थे। कभी एत्माद्दौला में तो कभी सिकंदरा में। हरजीत सिंह सरना ने पुलिस बताया कि आज तक पिस्टल केबारे में एक भी शिकायत नहीं आई। लोग असली समझकर ले जाते थे। कभी किसी पिस्टल ने धोखा नहीं दिया।