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रिपोर्ट दर्ज होने तक अंतिम संस्कार न करने पर अड़े
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2015 02:03 AM IST
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जयपुर हाउस निवासी बिल्डर प्रदीप बंसल की मौत मामले में उनके घरवाले बुधवार को रिपोर्ट लिखे जाने तक अन्त्येष्टि न करने पर अड़ गए। वे पुत्रवधू के मायके वालों को मौत का जिम्मेदार ठहराते उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग कर रहे थे। अंतत: बंसल की पत्नी-बेटे की पैरोल की अवधि से विवश हो ढाई घंटे बाद शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। दहेज हत्या मामले में जेल में बंद रहे प्रदीप ने मंगलवार शाम इलाज के दौरान एसएन मेडिकल कालेज में दम तोड़ा था।
प्रदीप बंसल के बड़े बेटे पुनीत बंसल की पत्नी आकांक्षा की 11 अगस्त की रात हुई मौत मामले में उसके मायकेवालों ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मामले मेें प्रदीप, उनकी पत्नी अलका, बेटे पुनीत सहित पांच जेल में बंद थे। जेल में प्रदीप की हालत बिगड़ गई। सोमवार शाम उन्हें जेल से एसएन इमरजेंसी लाया गया। उनकी बहन अनुपम बंसल ने आरोप लगाया कि आकांक्षा के मायकेवालों ने इलाज नहीं होने दिया जिससे प्रदीप की मौत हुई। उन्होंने थाना एमएम गेट मेें तहरीर दी। मुकदमा दर्ज न होने पर वे बुधवार को डीआईजी लक्ष्मी सिंह से भी मिलीं। डीआईजी ने जांच के बाद कार्रवाई के आदेश दिए।
प्रदीप के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें इसलिए जिला जज राजीव लोचन मेहरोत्रा ने उनकी पत्नी और बेटों को उनके प्रार्थना पर दोपहर तीन बजे से रात नौ बजे तक का पैरोल मंजूर किया। प्रदीप का शव पोस्टमार्टम के बाद घर लाया गया तो कोहराम के बीच परिवारीजन दी गई तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने की मांग करने लगे। बाद में प्रदीप की पत्नी और बेटों की पैरोल के समय को देखते हुए परिवार वालों ने अंतिम संस्कार तो कर दिया पर रिपोर्ट दर्ज करने की मंाग के साथ वे गुरुवार को एसएसपी आफिस पर धरना शुरू कर सकते हैं।
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प्रदीप बंसल के बड़े बेटे पुनीत बंसल की पत्नी आकांक्षा की 11 अगस्त की रात हुई मौत मामले में उसके मायकेवालों ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मामले मेें प्रदीप, उनकी पत्नी अलका, बेटे पुनीत सहित पांच जेल में बंद थे। जेल में प्रदीप की हालत बिगड़ गई। सोमवार शाम उन्हें जेल से एसएन इमरजेंसी लाया गया। उनकी बहन अनुपम बंसल ने आरोप लगाया कि आकांक्षा के मायकेवालों ने इलाज नहीं होने दिया जिससे प्रदीप की मौत हुई। उन्होंने थाना एमएम गेट मेें तहरीर दी। मुकदमा दर्ज न होने पर वे बुधवार को डीआईजी लक्ष्मी सिंह से भी मिलीं। डीआईजी ने जांच के बाद कार्रवाई के आदेश दिए।
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प्रदीप के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें इसलिए जिला जज राजीव लोचन मेहरोत्रा ने उनकी पत्नी और बेटों को उनके प्रार्थना पर दोपहर तीन बजे से रात नौ बजे तक का पैरोल मंजूर किया। प्रदीप का शव पोस्टमार्टम के बाद घर लाया गया तो कोहराम के बीच परिवारीजन दी गई तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने की मांग करने लगे। बाद में प्रदीप की पत्नी और बेटों की पैरोल के समय को देखते हुए परिवार वालों ने अंतिम संस्कार तो कर दिया पर रिपोर्ट दर्ज करने की मंाग के साथ वे गुरुवार को एसएसपी आफिस पर धरना शुरू कर सकते हैं।
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