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आगरा से पकड़ी गई जाली करेंसी की महिला सप्लायर
आगरा से पकड़ी गई जाली करेंसी की महिला सप्लायर
Updated Fri, 17 Feb 2017 12:33 AM IST
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आगरा से पकड़ी गई जाली करेंसी की महिला सप्लायर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एत्माद्दौला के सुशील नगर की मस्जिद वाली गली में रहने वाले शेर अली की पत्नी फातिमा उर्फ लीची (41) को गुरुवार सुबह जाली करेंसी की सप्लाई के संगीन आरोप में गिरफ्तार कर लिया। नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की कोलकाता ब्रांच और एंटी टेरेरिस्ट स्कवैड (एटीएस) की आगरा इकाई ने उसे उसके घर से पकड़ा है। वह जाली करेंसी को सब्जी मंडी में खपाती थी। इसके अलावा अन्य सप्लायरों के पास इसकी खेप भी पहुंचाती थी। उससे पूछताछ के बाद कई और लोग पकड़े जा सकते हैं।
लीची का मायका बांग्लादेश के चापई नवाबगंज जिले के शिवगंज में है। उसके पड़ोसी अनवार उल इस्लाम (50) को 18 जनवरी 2016 को बांग्लादेश बार्डर पार करते समय पश्चिम बंगाल पुलिस ने दो लाख की जाली करेंसी के साथ पकड़ा था। उससे पूछताछ में ही लीची का नाम सामने आया था। 25 फरवरी को यह केस एनआईए के सुपुर्द कर दिया गया। अनवार उल की गिरफ्तारी के बाद जाली करेंसी की सप्लाई का काम नवाबगंज के अपल शेख उर्फ एप्पल ने संभाल लिया। भारत सरकार के कहने पर शेख को बांग्लादेश पुलिस ने दस दिन पहले आठ फरवरी को गिरफ्तार किया है। वह ढाका जेल में बंद है। इसके बाद एनआईए की कोलकाता शाखा के डिप्टी एसपी कंचन मित्रा से मिले इनपुट पर आगरा एटीएस के इंस्पेक्टर आलोक कुमार ने फातिमा के बारे में जानकारी की। उसके फोटो और वीडियो भेजे। एनआईए ने अनवार को इन्हें दिखाया। उसने फोटो फातिमा के बताए। इसके बाद गुरुवार सुबह एनआईए और एटीएस की टीम ने फातिमा को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास बंद किए जा चुके 1000-1000 के दो नोट मिले। यह गिरोह नोटबंदी के बाद नई करेंसी नहीं छाप पाया था। फातिमा सब्जी बेचती है। वह जाली करेंसी को सब्जी मंडी में खपाती थी। उसे 2700 रुपये असली के बदले एक हजार के दस नकली नोट मिलते थे।
खाते में मिले तीन लाख
आगरा। लीची का खाता एत्माद्दौला क्षेत्र की एक बैंक शाखा में है। इसमें तीन लाख रुपये जमा मिले हैं। इसके अलावा 50 हजार, 30 हजार, एक लाख रुपये जमा किए जाने के वाउचर उसके पास मिले हैं। खाते से हर महीने लाखों का ट्रांजेक्शन हुआ है।
लीची का मायका बांग्लादेश के चापई नवाबगंज जिले के शिवगंज में है। उसके पड़ोसी अनवार उल इस्लाम (50) को 18 जनवरी 2016 को बांग्लादेश बार्डर पार करते समय पश्चिम बंगाल पुलिस ने दो लाख की जाली करेंसी के साथ पकड़ा था। उससे पूछताछ में ही लीची का नाम सामने आया था। 25 फरवरी को यह केस एनआईए के सुपुर्द कर दिया गया। अनवार उल की गिरफ्तारी के बाद जाली करेंसी की सप्लाई का काम नवाबगंज के अपल शेख उर्फ एप्पल ने संभाल लिया। भारत सरकार के कहने पर शेख को बांग्लादेश पुलिस ने दस दिन पहले आठ फरवरी को गिरफ्तार किया है। वह ढाका जेल में बंद है। इसके बाद एनआईए की कोलकाता शाखा के डिप्टी एसपी कंचन मित्रा से मिले इनपुट पर आगरा एटीएस के इंस्पेक्टर आलोक कुमार ने फातिमा के बारे में जानकारी की। उसके फोटो और वीडियो भेजे। एनआईए ने अनवार को इन्हें दिखाया। उसने फोटो फातिमा के बताए। इसके बाद गुरुवार सुबह एनआईए और एटीएस की टीम ने फातिमा को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास बंद किए जा चुके 1000-1000 के दो नोट मिले। यह गिरोह नोटबंदी के बाद नई करेंसी नहीं छाप पाया था। फातिमा सब्जी बेचती है। वह जाली करेंसी को सब्जी मंडी में खपाती थी। उसे 2700 रुपये असली के बदले एक हजार के दस नकली नोट मिलते थे।
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खाते में मिले तीन लाख
आगरा। लीची का खाता एत्माद्दौला क्षेत्र की एक बैंक शाखा में है। इसमें तीन लाख रुपये जमा मिले हैं। इसके अलावा 50 हजार, 30 हजार, एक लाख रुपये जमा किए जाने के वाउचर उसके पास मिले हैं। खाते से हर महीने लाखों का ट्रांजेक्शन हुआ है।
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