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ओमेंद्र के सरेंडर के पीछे सेटिंग तो नहीं

Tue, 23 Feb 2016 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
अमर उजाला ब्यूरो आगरा Updated Tue, 23 Feb 2016 01:51 AM IST
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If the surrender is setting behind Omendra
जिस ओमेंद्र की तलाश में आगरा के पांच थानों की पुलिस लगी हो और सीओ से लेकर आईजी तक पांच आईपीएस टेंशन में हों, उसने भला सरेंडर कैसे कर दिया? यह सवाल विश्वविद्यालय में चल रहा है। कर्मचारी कह रहे हैं कि कहीं इसके पीछे कोई सेटिंग तो नहीं है।
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पुलिस सूत्रों की मानें तो सेटिंग एक सफेदपोश ने कराई है। उसने ओमेंद्र को भरोसा दिया कि लिखा पढ़ी में उसकी मदद की जाएगी। इसी के बाद वह सरेंडर करने पहुंचा। पुलिस को पहले से आशंका थी कि वह सरेंडर कर सकता है। इसलिए एक टीम मैनपुरी कचहरी में लगाई गई थी। लेकिन, सेटिंग के बाद सोमवार सुबह टीम हटा ली गई। इसके बाद उसने सरेंडर कर दिया। सतेेंद्र की हत्या से पहले वह मैनपुरी में ही सीओ का सिर फोड़ने के मामले में वांटेड चल रहा था। तब तो पुलिस ने उसकी तलाश तक करना जरूरी नहीं समझा। सतेंद्र की हत्या में भी आगरा पुलिस उसके पीछे इसलिए पड़ी क्योंकि विश्वविद्यालय कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर चले गए। इधर, पुलिस टेंशन में थी कि वह हाथ क्यों नहीं आ रहा? उधर, उस पर दबाव बढ़ रहा था। पुलिस कुर्की तक की तैयारी कर रही थी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि एक सफेदपोश ने मैनपुरी पुलिस से उसकी सेटिंग कराई। सरेंडर से पुलिस को फायदा यह है कि टेंशन दूर हो गई। लेकिन उसका ज्यादा फायदा है। एक तो पुलिस उससे सख्ती से पूछताछ नहीं कर पाएगी। दूसरा, उसके खिलाफ साक्ष्य जुटाना आसान नहीं होगा। अगर पुलिस उसे गिरफ्तार करती तो पूछताछ से लेकर  साक्ष्य जुटाना तक आसान होता।
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मुझे दो कालेज संचालकों ने फंसाया है
मैनपुरी। कोर्ट में सरेंडर करने के बाद जेल जाने से पहले ओमेंद्र ने मीडियाकर्मियों को देखते ही खुद को बेकसूर बताया। उसने कहा कि उसे दो कालेज संचालकों ने फंसाया है। इनमें से एक फीरोजाबाद के शिकोहाबाद का है। दूसरा मैनपुरी के ही किशनी का है। दोनों की पुलिस से सेटिंग है।
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एससी-एसटी एक्ट लगाया
सतेंद्र की हत्या के मामले में अज्ञात में मुकदमा दर्ज किया गया था। मगर, आरोपी ओमेंद्र का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने मुकदमे में एससी-एसटी एक्ट की धारा भी बढ़ा दी।
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