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हाथिया से पूरे ब्रज में हथियारों की सप्लाई
हाथिया से पूरे ब्रज में हथियारों की सप्लाई
Updated Sat, 28 Jan 2017 01:08 AM IST
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डेरा अदमखेल जहां स्मार्टफोन से सस्ते दामों पर मिलती हैं बंदूकें
- फोटो : Dawn
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चुनाव आते ही अवैध असलहा की धरपकड़ के लिए पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। आगरा और फीरोजाबाद समेत ब्रज के सभी जनपदों में नाजायज हथियार बरामद किए गए हैं। पुलिस के शिकंजे में हथियार तस्कर भी फंसे हैं। इनसे पूछताछ में फिर यही जानकारी आई है कि अभी भी मथुरा के हाथिया गांव में ही अवैध असलहा के सबसे ज्यादा कारखाने हैं। यहां से पूरे ब्रज में इसकी सप्लाई की जा रही है। हथियारों के सौदागर इतने खतरनाक हैं कि गांव में पुलिस के आते ही गोलियां चलाना शुरू कर देते हैं।
गांव में भले लोग भी कम नहीं है लेकिन हथियारों के सैकड़ों सौदागरों के आगे उनकी नहीं चलती। पुलिस भी इस गांव में दबिश देने से डरती है। हथियार सौदागर कई बार पुलिस पर हमला कर चुके हैं। मई 2013 में दबिश के लिए गई पुलिस टीम का एक सिपाही फायरिंग में शहीद हो गया था। हरीपर्वत थाना पुलिस के हत्थे चढ़े विजय खाती से हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने बताया कि हाथिया में हथियारों की फैक्ट्री घरों में ही चल रही हैं। कई घरों में तो रिमोट से संचालित मजबूत गेट हैं। पुलिस अगर हिम्मत करके किसी घर तक पहुंच भी जाए तो गेट नहीं खुलता।
इस गांव की लोकेशन ऐसी है कि पुलिस के लिए कार्रवाई आसान नहीं। एक तरफ राजस्थान सीमा से सटा है तो दूसरी ओर हरियाणा के बेहद नजदीक है। हाथिया के अलावा मथुरा के दौसेरसर, मुरसेरस और लहचौरा मे भी हथियार बनाने की फैक्ट्री पकड़ी जा चुकी हैं।
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एक तमंचे पर 2500 की बचत
आगरा। पकड़े गए हथियारों के सौदागरों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने बताया कि एक तमंचे को बनाने में 500 रुपये का खर्च आता है। एक तमंचा 3000 रुपये में बेचा जा रहा है। तमंचे से आकार में कुछ बड़ी पौनी बनाने में सात सौ रुपये तक लगते हैं। इसे 4000 में बेचा जा रहा है।
गांव में भले लोग भी कम नहीं है लेकिन हथियारों के सैकड़ों सौदागरों के आगे उनकी नहीं चलती। पुलिस भी इस गांव में दबिश देने से डरती है। हथियार सौदागर कई बार पुलिस पर हमला कर चुके हैं। मई 2013 में दबिश के लिए गई पुलिस टीम का एक सिपाही फायरिंग में शहीद हो गया था। हरीपर्वत थाना पुलिस के हत्थे चढ़े विजय खाती से हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने बताया कि हाथिया में हथियारों की फैक्ट्री घरों में ही चल रही हैं। कई घरों में तो रिमोट से संचालित मजबूत गेट हैं। पुलिस अगर हिम्मत करके किसी घर तक पहुंच भी जाए तो गेट नहीं खुलता।
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इस गांव की लोकेशन ऐसी है कि पुलिस के लिए कार्रवाई आसान नहीं। एक तरफ राजस्थान सीमा से सटा है तो दूसरी ओर हरियाणा के बेहद नजदीक है। हाथिया के अलावा मथुरा के दौसेरसर, मुरसेरस और लहचौरा मे भी हथियार बनाने की फैक्ट्री पकड़ी जा चुकी हैं।
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एक तमंचे पर 2500 की बचत
आगरा। पकड़े गए हथियारों के सौदागरों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने बताया कि एक तमंचे को बनाने में 500 रुपये का खर्च आता है। एक तमंचा 3000 रुपये में बेचा जा रहा है। तमंचे से आकार में कुछ बड़ी पौनी बनाने में सात सौ रुपये तक लगते हैं। इसे 4000 में बेचा जा रहा है।