{"_id":"597b274e4f1c1bc84d8b4bc8","slug":"devendra-jat-of-mathura-have-made-gang-of-goons","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आगरा की जेल में बंद इस बर्खास्त सिपाही ने बाहर खड़ी कर दी अपराधियों की फौज","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
आगरा की जेल में बंद इस बर्खास्त सिपाही ने बाहर खड़ी कर दी अपराधियों की फौज
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 28 Jul 2017 05:30 PM IST
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देवेंद्र जाट
- फोटो : अमर उजाला
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झांसी के सराफ राजेंद्र अग्रवाल और राहुल के अपहरण की साजिश में नाम आया है आगरा जेल में बंद बर्खास्त सिपाही देवेंद्र जाट का। उसके प्लान पर ही विनोद जाट ने अपने गैंग के साथ वारदात की। विनोद भी बर्खास्त सिपाही है। अब वह भी देवेंद्र के नक्शे कदम पर चल रहा है। पुलिस की वर्दी पहनकर अपराध करता है, ताकि उस पर शक न होने पाए।
देवेंद्र मथुरा के मांट का रहने वाला है। 10वीं तक पढ़ा है। 1997 में पुलिस में भर्ती हुआ था बरेली से। 1998 में उसकी तैनाती आगरा के फतेहाबाद थाना में हुई। यहीं पर तैनाती के दौरान उसने वर्ष 2000 में मथुरा के मुरसान में व्यापारी से तीन लाख की लूट की। उसे जेल भेज दिया गया। उसके साथ मथुरा के ही दलवीर और राजू थे। यहीं से देवेंद्र ने गिरोह खड़ा किया। इसमें लगातार नई भर्ती करता रहा।
2001 में जेल से आने के बाद 2002 में उसने वाहन चोरों का गैंग बनाया। इसमें उसके साथ रहा उस समय का कुख्यात वाहन चोर विपिन। दोनों आगरा से गाड़ियां चोरी करके कोलकाता में बेचते थे। वर्ष 2003 में वाहन चोरों का यह गिरोह वाहन लुटेरा बन गया। इसमें आगरा के असौरा गांव का मुन्ना और कापसहेड़ा दिल्ली के हरजीत और काके मिल गए। इनसे मुलाकात अलीगढ़ जेल में हुई थी। इन्होंने मथुरा के फरह में ट्रक लूटा और 2.5 लाख में कोलकाता में बेचा। एसटीएफ के पास देवेंद्र और विनोद के जुर्म की पूरी कुंडली है। ट्रक लूट में देवेंद्र एक साल जेल में रहा।
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जेल से आते ही 2004 में उसने गिरोह में कई और लोग जोड़ लिए। इनमें सादाबाद के बिसावर का हरकेश, मथुरा के दाऊजी के लोकनवाला का धर्मेंद्र, हरिओम और डब्बू पंडित शामिल रहे। अब देवेंद्र ने वाहन लूट छोड़कर चांदी और सोने की लूट शुरू की। 2008-09 में इस गिरोह ने ब्रज के सराफों पर कहर बरपा दिया। हाथरस, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद में दस से ज्यादा वारदात कीं।
इनमें सबसे बड़ी घटना रही आगरा के व्यापारी से फिरोजाबाद के सिरसागंज में 550 किलो चांदी की लूट। इसी घटना के बाद देवेंद्र को पुलिस से बर्खास्त किया गया। इसके बाद 2008 में ही देवेंद्र के गिरोह ने मथुरा के महावन में सराफ से 350 ग्राम सोना लूटा। 2009 में आगरा के सूर्यनगर में व्यापारी से 50 किलो चांदी लूटी। इसके बाद 2010 से 2011 तक उसने लूट और हत्या की कई वारदात कीं। इनमें नए अपराधी उसके साथ जुड़ते चले गए। 2014 में उसने विनोद जाट को अपने साथ शामिल किया।
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देवेंद्र मथुरा के मांट का रहने वाला है। 10वीं तक पढ़ा है। 1997 में पुलिस में भर्ती हुआ था बरेली से। 1998 में उसकी तैनाती आगरा के फतेहाबाद थाना में हुई। यहीं पर तैनाती के दौरान उसने वर्ष 2000 में मथुरा के मुरसान में व्यापारी से तीन लाख की लूट की। उसे जेल भेज दिया गया। उसके साथ मथुरा के ही दलवीर और राजू थे। यहीं से देवेंद्र ने गिरोह खड़ा किया। इसमें लगातार नई भर्ती करता रहा।
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2001 में जेल से आने के बाद 2002 में उसने वाहन चोरों का गैंग बनाया। इसमें उसके साथ रहा उस समय का कुख्यात वाहन चोर विपिन। दोनों आगरा से गाड़ियां चोरी करके कोलकाता में बेचते थे। वर्ष 2003 में वाहन चोरों का यह गिरोह वाहन लुटेरा बन गया। इसमें आगरा के असौरा गांव का मुन्ना और कापसहेड़ा दिल्ली के हरजीत और काके मिल गए। इनसे मुलाकात अलीगढ़ जेल में हुई थी। इन्होंने मथुरा के फरह में ट्रक लूटा और 2.5 लाख में कोलकाता में बेचा। एसटीएफ के पास देवेंद्र और विनोद के जुर्म की पूरी कुंडली है। ट्रक लूट में देवेंद्र एक साल जेल में रहा।
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जेल से आते ही 2004 में उसने गिरोह में कई और लोग जोड़ लिए। इनमें सादाबाद के बिसावर का हरकेश, मथुरा के दाऊजी के लोकनवाला का धर्मेंद्र, हरिओम और डब्बू पंडित शामिल रहे। अब देवेंद्र ने वाहन लूट छोड़कर चांदी और सोने की लूट शुरू की। 2008-09 में इस गिरोह ने ब्रज के सराफों पर कहर बरपा दिया। हाथरस, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद में दस से ज्यादा वारदात कीं।
इनमें सबसे बड़ी घटना रही आगरा के व्यापारी से फिरोजाबाद के सिरसागंज में 550 किलो चांदी की लूट। इसी घटना के बाद देवेंद्र को पुलिस से बर्खास्त किया गया। इसके बाद 2008 में ही देवेंद्र के गिरोह ने मथुरा के महावन में सराफ से 350 ग्राम सोना लूटा। 2009 में आगरा के सूर्यनगर में व्यापारी से 50 किलो चांदी लूटी। इसके बाद 2010 से 2011 तक उसने लूट और हत्या की कई वारदात कीं। इनमें नए अपराधी उसके साथ जुड़ते चले गए। 2014 में उसने विनोद जाट को अपने साथ शामिल किया।
विनोद जाट पर एक लाख का ईनाम करने की तैयारी
अपहरण
- फोटो : अमर उजाला
झांसी से सराफ राजेंद्र अग्रवाल और राहुल का अपहरण करने वाले बर्खास्त सिपाही विनोद जाट पर पुलिस ईनाम बढ़ाने की तैयारी कर रही है। उसके पूरे गिरोह पर पहले से 50 हजार का ईनाम है। अब इसे बढ़ाकर एक लाख किया जा सकता है। इसके लिए फाइल तैयार की जा रही है। इसे डीजीपी आफिस भेजा जाएगा। तमाम कोशिश करके भी पुलिस उसका कुछ सुराग नहीं लग पा रहा है। वह एसटीएफ के साथ मुठभेड़ के बाद भाग गया था। उसकी तलाश में 125 पुलिसकर्मी लगाए गए। इसके बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया था।
सराफ ही रहते हैं विनोद के निशाने पर
अपहरण
- फोटो : अमर उजाला
विनोद हाथरस के सादाबाद के गांव महामुनि थाना मुरसल का रहने वाला है। 2006 बैच का सिपाही है। पुलिस में भर्ती होने के बाद ही अपराध करने लगा था। देवेंद्र जाट से उसकी मुलाकात 2014 में हुई। उसे उसके रिश्तेदार संतोष ने मिलवाया। संतोष पहले से देवेंद्र गैंग में था। इससे पहले ही विनोद लूट कर चुका है। उसे 2015 में बर्खास्त किया गया।
जैसे देवेंद्र गैंग सराफों को निशाने पर रखता था, वैसे ही विनोद का टारगेट भी सराफा कारोबारी ही हैं। पहले लूट कर रहे थे। अब सराफों का अपहरण भी शुरू कर दिया है। उसने देवेंद्र के साथ 2014 में हाथरस के सिकंदराराऊ में बर्तन व्यापारी से 44 लाख की लूट की। इस लूट में इस्तेमाल अर्टिगा गाड़ी सिकंदरा से लूटी गई थी। इसके बाद विनोद ने अपना गैंग अलग बना लिया। वह तभी से लूट, अपहरण कर रहा है।
जैसे देवेंद्र गैंग सराफों को निशाने पर रखता था, वैसे ही विनोद का टारगेट भी सराफा कारोबारी ही हैं। पहले लूट कर रहे थे। अब सराफों का अपहरण भी शुरू कर दिया है। उसने देवेंद्र के साथ 2014 में हाथरस के सिकंदराराऊ में बर्तन व्यापारी से 44 लाख की लूट की। इस लूट में इस्तेमाल अर्टिगा गाड़ी सिकंदरा से लूटी गई थी। इसके बाद विनोद ने अपना गैंग अलग बना लिया। वह तभी से लूट, अपहरण कर रहा है।
सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया देवेंद्र
झांसी के सराफा कारोबारियों के अपहरण की साजिश में नाम आने पर देवेंद्र जाट को जिला जेल से सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। उस पर निगरानी भी बढ़ा दी गई है। उससे मिलने वाले हर शख्स का पूरा रिकार्ड रखा जाएगा। वह जेल से ही वारदात कराता रहा है। कई बार उसके साथी नाम बदलकर उससे मुलाकात कर आते हैं। इसके मद्देनजर अब सतर्कता बरती जा रही है।