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लाठी चलते ही हालात बेकाबू

Fri, 26 Feb 2016 02:12 AM IST
अागरा ब्यूूराे
अागरा ब्यूूराे Updated Fri, 26 Feb 2016 02:12 AM IST
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condition uncontroled after police misbehave
दोपहर के 11 बजे थे। विहिप नेता अरुण माहौर का शव एसएन लाया जा चुका था। भाजपाइयों और विहिप कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा थी। धार्मिक नारे लगाए जा रहे थे। तभी भीड़ के बीच से आवाज आई, ‘ऐसे कुछ नहीं होगा, जाम लगाओ, तब हत्यारे पकड़े जाएंगे।’ बस फिर क्या था। एसएन के सामने जाम लगा दिया गया। वहां से गुजर रहे दूसरे समुदाय के दो युवक ों को पकड कर प्रदर्शनकारी पीटने लगे। उन्हें बचाने के लिए पुलिस ने लाठी चला दी। यहीं से हालात और बिगड़ गए। स्थिति संभालने में अफसरों के पसीने छूट गए।
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एक बार पुलिस ने लाठी के जोर से आक्रोशित भीड़ को खदेड़ तो दिया लेकिन थोड़ी ही देर में लोग फिर जमा हो गए। इस बार निशाने पर पुलिस थी। पहले सिपाही के साथ मारपीट हुई फिर प्रदर्शनकारी थानाध्यक्ष एत्माद्दौला को खींचकर दूर ले गए। वहां उनके साथ हाथापाई की गई। तभी वाहनों में तोड़फोड़ शुरू हो गई। कम से कम 10 गाड़ियों के शीशे तोड़े गए। सीओ दफ्तर की गाड़ी को भी नहीं छोड़ा। इसके बाद पुलिस ने फिर लाठी चलाई। एमजी रोड पर अफरा-तफरी मच गई। वाहनों को जहां का तहां रोक दिया गया। रोड जाम हो गई। थोड़ी देर बाद लोग फिर से इकट्ठा हुए। दोपहर 12 बजे शव को पोस्टमार्टम हाउस ले जाया गया। प्रर्दशनकारी वहां पहुंच गए।
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नारेबाजी से फैल गया तनाव
पोस्टमार्टम हाउस पर आपत्तिजनक नारे लगाए गए। इसका पास के मोहल्ले में रहने वाले दूसरे समुदाय के लोगों ने विरोध किया। छतों पर उनकी भीड़ जमा हो गई। दोपहर लगभग एक बजे वहां तनाव का माहौल बन गया। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से टकराव टाला। छत पर जमा लोगों को वहां से हटाया गया।
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शाम को पथराव, एसपी ट्रैफिक से झड़प
पोस्टमार्टम के बाद भी अरुण माहौर के शव को परिवारीजनों को नहीं सौंपा जा रहा था। माना जा रहा था, प्रशासन माहौल शांत होने के इंतजार में देरी करा रहा है। इस पर हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता भड़क गए। उन्होंने पोस्टमार्टम हाउस पर पथराव शुरू कर दिया। एसपी ट्रैफिक आरके सिंह के साथ उनकी झड़प भी हुई। इस दौरान डीएम और एसएसपी भी मौजूद थे। शव मिलने के बाद ही कार्यकर्ता शांत हुए।
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