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अनिल गुप्ता ने जान पर खेलकर पकड़े बदमाश
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Fri, 15 Jan 2016 02:12 AM IST
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बेखौफ बदमाश सराफ संजय वर्मा की हत्या कर चुके थे। तीन गोलियां चलाई थीं। आस-पास के लोग सहम गए थे। दो बदमाशों ने हाथ में तमंचे ले रखे थे। उनके नजदीक जाना जान जोखिम में डालना था। लेकिन सड़क किनारे बेड़ई की ठेल लगाने वाले युवक अनिल गुप्ता को इसकी परवाह कहां थी। उन्होंने तो बदमाशों को देखते ही उन्हें पकड़ने की ठान ली और बाइक के पीछे दौड़ लगा दी। एक बदमाश ने तमंचा भी ताना, लेकिन अनिल के कदम नहीं रुके। एक ही झटके में दो बदमाशों को बाइक से गिरा दिया।
इसके बाद तो आस-पास खड़े लोगों की हिम्मत भी बंध गई। तुरंत सैकड़ों पहुंच गए। दोनों बदमाशों को लात-घूंसों से पीटने लगे। उनकी आधा घंटा तक मार लगाई। लेकिन अनिल गुप्ता इतने भर से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें तो यह खटक रहा था कि तीसरा कैसे भाग रहा है। उन्होंने उसके पीछे भी दौड़ लगा दी।
काफी दूर तक भागे, लेकिन कदम बाइक से तेज नहीं दौड़ पाए। इतना ही नहीं। बदमाशों की पिटाई के बाद वही उन्हें लेकर चौकी पहुंचे। उनकी जेब की तलाशी लेकर कारतूस निकाले और पुलिस को सौंपे। उनसे मिले तमंचे भी पुलिस को दिए।
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तमाम लोग उसकी बहादुरी की प्रशंसा करते नहीं थक रहे। उनसे पूछा गया कि क्या उसे डर नहीं लगा? जवाब दिया, मैं कोई पुलिसवाला थोड़े ही हूं, जो डरूंगा, डर या तो भगवान से लगता है या फिर पिताजी से। अफसोस इस बात का है कि तीसरे बदमाश को नहीं पकड़ पाया।
मरते दम तक बदमाशों से जूझे संजय
संजय वर्मा ने भी बड़ी बहादुरी दिखाई। दो बदमाश तमंचे लेकर आए थे, लेकिन उनसे डरे नहीं। उनके कहने पर कैश और जेवरात से भरा थैला नहीं छोड़ा। बदमाशों ने हवा में फायर कर दिया। आस पास खड़े लोग बुरी तरह सहम गए और दूर भागने लगे, लेकिन संजय ने हिम्मत नहीं हारी। बदमाश ने फिर से थैला छीनने की कोशिश की लेकिन इस बार तो संजय ने और कसकर पकड़ लिया। इसके बाद बदमाशों ने दो गोलियां मारकर उनकी जान ले ली, लेकिन थैला नहीं लूट पाए। उनके भाई रवि ने बताया कि वे रात को दुकान में ज्यादा कैश और जेवरात नहीं रखते हैं।
घर में मचा कोहराम
संजय वर्मा मूलरूप से गोकुलपुरा के रहने वाले थे। करीब 20 साल पहले पृथ्वीनाथ पर मकान लिया था। यहीं पर बस गए। उनकी दुकान जय शिव ज्वेलर्स भी 20 सालों से हैं। दो भाइयों में वे बड़े थे। दो भाइयों में छोटे रवि भी इसी पर बैठते हैं। उनकी दो बेटियां और एक बेटा है। तीनों पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी हत्या से परिवार पर कहर टूट पड़ा है। घर में कोहराम मचा है।
हिस्ट्रीशीटर निकला पकड़ा गया लुटेरा
आगरा। सराफ संजय वर्मा की हत्या करने के बाद भागते समय पब्लिक के हत्थे चढ़े दोनों बदमाश बलदेव का वीरेंद्र उर्फ वीरू और सादाबाद का प्रमोद शातिर लुटेरे हैं। वीरू की तो बलदेव थाना में हिस्ट्रीशीट भी खुली है। वह तीन महीने पहले जमानत पर जेल से छूटा है। प्रमोद पहली बार पकड़ा गया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि उन्होंने पूछताछ के दौरान कई घटनाएं कुबूल की हैं। उन्होंने बताया है कि वे तैयारी के साथ आए थे। पृथ्वीनाथ पर पुलिस चौकी है। इसके अलावा शाम को काफी लोग सड़क किनारे खड़े रहते हैं। इसके चलते यह सोचकर आए थे कि अगर लूट का विरोध हुआ या पकड़े जाने का डर तो गोली चलाकर भाग निकलेंगे। उन्होंने बताया कि वे हाथरस और मथुरा में भी लूट कर चुकेहैं।
कड़ी सजा मिलनी चाहिए
आगरा। एसएन इमरजेंसी पहुंचे मृतक संजय वर्मा के छोटे भाई रवि का रो रोकर बुरा हाल था। बस यही कहे जा रहे थे कि बदमाशों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं है। कभी किसी के साथ झगड़ा भी नहीं हुआ।
नए साल में भी निशाने पर आ गए सराफ
आगरा। पहले से बदमाशों के निशाने पर रहे सराफा कारोबारियों को पृथ्वीनाथ फाटक की घटना ने और खौफजदा कर दिया है। पिछले साल कई वारदात हुई थी। सोचा था इस साल पुलिस कुछ ऐसे उपाय करेगी कि कारोबार सुरक्षित होगा लेकिन जैसे पहले घटनाएं हो रही थी, वैसे ही नए साल में भी हो गई।
शाम को सराफ अपनी दुकान और शोरूम बंद करके घर जाते हैं। पुलिस को मालूम है कि 90 फीसदी घटनाएं प्रतिष्ठान से घर के रास्ते पर होती हैं। इनमें ज्यादातर वे ही सराफ निशाना बन रहे हैं, जिनका प्रतिष्ठान के घर पास है।
बदमाश प्रतिष्ठान के पास खड़े रहते हैं। कारोबारी को रास्ते में लूट लेते हैं और ऐसा न कर पाएं तो जान ले लेते हैं। इसके बावजूद सराफा बाजारों में शाम के समय गश्त नहीं की जा रही है। अगर पुलिस पृथ्वीनाथ फाटक पर चेकिंग या गश्त कर रही होती तो बदमाश इतना दुस्साहस नहीं कर पाते।
डीजीपी का फरमान भी हवा में
पिछले साल आगरा में हुई घटनाओं तत्कालीन डीजीपी जगमोहन यादव ने निर्देश दिए थे कि सराफा बाजारों में शाम के समय गश्त बढ़ाई जाए, लेकिन इस पर अमल नहीं किया जा रहा है।
हमें यूपी छोड़ना पडे़गा
सराफा कमेटी के अध्यक्ष आनंद कुमार का कहना है कि जिस तरह सराफ निशाना बन रहे हैं, उससे लगता है कि सराफा कारोबारियों को यूपी छोड़कर राजस्थान या मध्य प्रदेश जाना होगा।
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इसके बाद तो आस-पास खड़े लोगों की हिम्मत भी बंध गई। तुरंत सैकड़ों पहुंच गए। दोनों बदमाशों को लात-घूंसों से पीटने लगे। उनकी आधा घंटा तक मार लगाई। लेकिन अनिल गुप्ता इतने भर से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें तो यह खटक रहा था कि तीसरा कैसे भाग रहा है। उन्होंने उसके पीछे भी दौड़ लगा दी।
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काफी दूर तक भागे, लेकिन कदम बाइक से तेज नहीं दौड़ पाए। इतना ही नहीं। बदमाशों की पिटाई के बाद वही उन्हें लेकर चौकी पहुंचे। उनकी जेब की तलाशी लेकर कारतूस निकाले और पुलिस को सौंपे। उनसे मिले तमंचे भी पुलिस को दिए।
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तमाम लोग उसकी बहादुरी की प्रशंसा करते नहीं थक रहे। उनसे पूछा गया कि क्या उसे डर नहीं लगा? जवाब दिया, मैं कोई पुलिसवाला थोड़े ही हूं, जो डरूंगा, डर या तो भगवान से लगता है या फिर पिताजी से। अफसोस इस बात का है कि तीसरे बदमाश को नहीं पकड़ पाया।
मरते दम तक बदमाशों से जूझे संजय
संजय वर्मा ने भी बड़ी बहादुरी दिखाई। दो बदमाश तमंचे लेकर आए थे, लेकिन उनसे डरे नहीं। उनके कहने पर कैश और जेवरात से भरा थैला नहीं छोड़ा। बदमाशों ने हवा में फायर कर दिया। आस पास खड़े लोग बुरी तरह सहम गए और दूर भागने लगे, लेकिन संजय ने हिम्मत नहीं हारी। बदमाश ने फिर से थैला छीनने की कोशिश की लेकिन इस बार तो संजय ने और कसकर पकड़ लिया। इसके बाद बदमाशों ने दो गोलियां मारकर उनकी जान ले ली, लेकिन थैला नहीं लूट पाए। उनके भाई रवि ने बताया कि वे रात को दुकान में ज्यादा कैश और जेवरात नहीं रखते हैं।
घर में मचा कोहराम
संजय वर्मा मूलरूप से गोकुलपुरा के रहने वाले थे। करीब 20 साल पहले पृथ्वीनाथ पर मकान लिया था। यहीं पर बस गए। उनकी दुकान जय शिव ज्वेलर्स भी 20 सालों से हैं। दो भाइयों में वे बड़े थे। दो भाइयों में छोटे रवि भी इसी पर बैठते हैं। उनकी दो बेटियां और एक बेटा है। तीनों पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी हत्या से परिवार पर कहर टूट पड़ा है। घर में कोहराम मचा है।
हिस्ट्रीशीटर निकला पकड़ा गया लुटेरा
आगरा। सराफ संजय वर्मा की हत्या करने के बाद भागते समय पब्लिक के हत्थे चढ़े दोनों बदमाश बलदेव का वीरेंद्र उर्फ वीरू और सादाबाद का प्रमोद शातिर लुटेरे हैं। वीरू की तो बलदेव थाना में हिस्ट्रीशीट भी खुली है। वह तीन महीने पहले जमानत पर जेल से छूटा है। प्रमोद पहली बार पकड़ा गया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि उन्होंने पूछताछ के दौरान कई घटनाएं कुबूल की हैं। उन्होंने बताया है कि वे तैयारी के साथ आए थे। पृथ्वीनाथ पर पुलिस चौकी है। इसके अलावा शाम को काफी लोग सड़क किनारे खड़े रहते हैं। इसके चलते यह सोचकर आए थे कि अगर लूट का विरोध हुआ या पकड़े जाने का डर तो गोली चलाकर भाग निकलेंगे। उन्होंने बताया कि वे हाथरस और मथुरा में भी लूट कर चुकेहैं।
कड़ी सजा मिलनी चाहिए
आगरा। एसएन इमरजेंसी पहुंचे मृतक संजय वर्मा के छोटे भाई रवि का रो रोकर बुरा हाल था। बस यही कहे जा रहे थे कि बदमाशों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं है। कभी किसी के साथ झगड़ा भी नहीं हुआ।
नए साल में भी निशाने पर आ गए सराफ
आगरा। पहले से बदमाशों के निशाने पर रहे सराफा कारोबारियों को पृथ्वीनाथ फाटक की घटना ने और खौफजदा कर दिया है। पिछले साल कई वारदात हुई थी। सोचा था इस साल पुलिस कुछ ऐसे उपाय करेगी कि कारोबार सुरक्षित होगा लेकिन जैसे पहले घटनाएं हो रही थी, वैसे ही नए साल में भी हो गई।
शाम को सराफ अपनी दुकान और शोरूम बंद करके घर जाते हैं। पुलिस को मालूम है कि 90 फीसदी घटनाएं प्रतिष्ठान से घर के रास्ते पर होती हैं। इनमें ज्यादातर वे ही सराफ निशाना बन रहे हैं, जिनका प्रतिष्ठान के घर पास है।
बदमाश प्रतिष्ठान के पास खड़े रहते हैं। कारोबारी को रास्ते में लूट लेते हैं और ऐसा न कर पाएं तो जान ले लेते हैं। इसके बावजूद सराफा बाजारों में शाम के समय गश्त नहीं की जा रही है। अगर पुलिस पृथ्वीनाथ फाटक पर चेकिंग या गश्त कर रही होती तो बदमाश इतना दुस्साहस नहीं कर पाते।
डीजीपी का फरमान भी हवा में
पिछले साल आगरा में हुई घटनाओं तत्कालीन डीजीपी जगमोहन यादव ने निर्देश दिए थे कि सराफा बाजारों में शाम के समय गश्त बढ़ाई जाए, लेकिन इस पर अमल नहीं किया जा रहा है।
हमें यूपी छोड़ना पडे़गा
सराफा कमेटी के अध्यक्ष आनंद कुमार का कहना है कि जिस तरह सराफ निशाना बन रहे हैं, उससे लगता है कि सराफा कारोबारियों को यूपी छोड़कर राजस्थान या मध्य प्रदेश जाना होगा।