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पहले खुद दर्ज की रिपोर्ट, फिर आरोपियों के पक्ष में दी गवाही, चौंकाने वाला है पुलिस का ये कारनामा

Fri, 17 May 2019 05:02 PM IST
मुकेश कुमार चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा
चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 17 May 2019 05:02 PM IST
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agra Police testified in favor of accused
प्रतीकात्मक तस्वीर
आगरा के बरहन क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने खुद केस दर्ज करने के बावजूद गवाही आरोपियों को सजा दिलाने के लिए नहीं, बल्कि उनके पक्ष में दी। पुलिस ने जो एफआईआर में दर्ज की उससे साफ मुकर गई। और तो और पुलिस ने कोर्ट में यह भी कहा कि राजनीतिक दबाव के कारण फरार आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। कोर्ट ने आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
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मामला 2015 का है। बरहन के गांव खाण्डा में झगड़े की सूचना पर पुलिस पहुंची थी। पुलिसकर्मी सुरेश चंद की ओर से एफआईआर दर्ज की गई। इसमें जानलेवा हमला, बलवा, सेवन क्रिमिनल ला एक्ट लगाए गए। पुलिस का कहना था कि दो पक्षों के बीच गोलियां चलीं। मौके से एक पक्ष के रवि यादव, धर्मेन्द्र यादव, दिवारीलाल यादव, सत्यवीर यादव को गिरफ्तार किया गया। दूसरा पक्ष हाथ नहीं आया।
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इन चारों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल की लेकिन मौके से फरार आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। पुलिस की ओर से हेड कांस्टेबल तेजपाल गौतम, सुघड़ सिंह, कांस्टेबल शैलेश कुमार, अवधेश कुमार, एचसीपी सुरेश चंद, राजकुमार और तत्कालीन एसओ अवधेश कुमार त्रिपाठी की गवाही हुई। यह केस अपर सत्र न्यायधीश की अदालत में चला।
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आरोपियों को पहचानने से इंकार

अधिवक्ता सुरेश सोनी का कहना है कि पुलिसकर्मियों ने गवाही में कहा, फायरिंग जान से मारने की नीयत से नहीं हुई, गिरफ्तार आरोपियों से लाठी, डंडा, सरिया, पिस्टल, कट्टा बरामद नहीं हुआ। आगे की गवाही तो हैरान करने वाली है।

पुलिस पार्टी ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों को वे पहचान नहीं पा रहे। फरार आरोपियों के न पकड़े जाने के सवाल पर कहा, राजनैतिक दबाव था और शांति भंग का खतरा भी, इस कारण नहीं पकड़ा। 

एफआईआर में फायरिंग की बात थी लेकिन मौके से कोई खोखा बरामद नहीं किया गया। पुलिस यहीं पर नहीं रुकी। कहा कि किन आरोपियों को चोट आई, इसकी जानकारी नहीं है। और तो और पुलिस ने मेडिकल परीक्षण करने वाले डॉक्टर को गवाह ही नहीं बनाया।

अधिवक्ता सुरेश चंद सोनी ने बताया कि साक्ष्य न मिलने के कारण अदालत ने आरोपी रवि यादव, धर्मेन्द्र यादव, दिवारीलाल यादव और सत्यवीर यादव को दोषमुक्त करार दिया। सोनी का कहना है कि वह इसी कोर्ट में पुलिसकर्मियों के खिलाफ वाद दायर करें।

एसपी देहात को नहीं बनाया गवाह 

एक पुलिसकर्मी ने गवाही में यह भी कहा कि तत्कालीन एसपी देहात मौके पर पहुंच गए थे लेकिन विवेचक ने उन्हें गवाह नहीं बनाया। इस कारण उनकी गवाही नहीं हुई।
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