{"_id":"59302ae54f1c1bcb63bda881","slug":"agra-nari-niketan-superintendent-arrested-for-human-trafficking","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानव तस्करी के शक में नारी निकेतन की अधीक्षक गिरफ्तार ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मानव तस्करी के शक में नारी निकेतन की अधीक्षक गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Thu, 01 Jun 2017 08:53 PM IST
विज्ञापन
राजकीय महिला संरक्षण गृह
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा के एत्माद्दौला में कालिंदी विहार स्थित राजकीय महिला संरक्षण गृह से 43 संवासनियों और उनके नौ बच्चों को बिना किसी आदेश के छोड़ दिया गया। पता चलने पर गुरुवार को संरक्षण गृह की अधीक्षक गीता राकेश के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
आशंका है कि संवासनियों और बच्चों को देह व्यापार कराने के लिए मानव तस्कर ले गए हैं। गीता ने उनकी सुपुदर्गी लेने वालों के पहचान पत्र भी नहीं लिए। सबसे हैरानी की बात यह कि 33 के बारे में तो संरक्षण गृह में अभिलेख ही नहीं मिले हैं।
इन महिलाओं को पिछले साल मई में इलाहाबाद में देह व्यापार के दलदल से निकाला गया था। इलाहाबाद के एसडीएम सदर के 20 मई 2016 केआदेश पर इन्हें एक साल के लिए आगरा के नारी संरक्षण गृह में रखा गया था। एक वर्ष पूरा होने से पूर्व ही 18 मई को एसडीएम ने दो साल की अवधि और बढ़ा दी।
विज्ञापन
इसके बावजूद गीता राकेश ने 21, 22 और 23 मई को 43 संवासनियों और नौ बच्चों को छोड़ दिया। इसके लिए न तो प्रार्थनापत्र लिए गए, न पहचान पत्र और न ही बंधनपत्र भरवाए गए। इलाहाबाद एसडीएम सदर को सामाजिक संस्था गुड़िया के सुनील ने शिकायत की। इस पर जांच महिला कल्याण विभाग के उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी पुनीत कुमार मिश्र ने रिपोर्ट दर्ज कराई।
इस पर गीता राकेश को गिरफ्तार कर लिया गया। एफआईआर में आशंका जाहिर की गई है कि संवासनियों को मानव तस्कर न ले गए हों। इन्हें देह व्यापार में झोंके जाने की भी आशंका है।
एसएसपी दिनेश चंद दुबे ने बताया कि इलाहाबाद से 20 मई 2016 को 67 महिलाएं और 37 बच्चे नारी संरक्षण गृह में निरुद्ध कराए गए थे। इनमें से 22 महिलाओं को अलग-अलग कोर्ट के आदेश पर उनके परिवारीजनों के सुपुर्द किया गया। शेष 45 में से 43 को बगैर आदेश के प्रक्रिया पूरी किए छोड़ दिया गया। दो अभी निरुद्ध हैं।
43 में से पांच संवासनियां आगरा की भी हैं। इनमें से तीन जगनेर क्षेत्र की हैं और दो शहर के हरीपर्वत क्षेत्र की। एक बस्ती जिले की है, चार धौलपुर, दो अलवर, दो पश्चिमी बंगाल, एक दिल्ली, एक पुणे की है जबकि शेष अन्य इलाहाबाद की हैं।
विज्ञापन
आशंका है कि संवासनियों और बच्चों को देह व्यापार कराने के लिए मानव तस्कर ले गए हैं। गीता ने उनकी सुपुदर्गी लेने वालों के पहचान पत्र भी नहीं लिए। सबसे हैरानी की बात यह कि 33 के बारे में तो संरक्षण गृह में अभिलेख ही नहीं मिले हैं।
विज्ञापन
इन महिलाओं को पिछले साल मई में इलाहाबाद में देह व्यापार के दलदल से निकाला गया था। इलाहाबाद के एसडीएम सदर के 20 मई 2016 केआदेश पर इन्हें एक साल के लिए आगरा के नारी संरक्षण गृह में रखा गया था। एक वर्ष पूरा होने से पूर्व ही 18 मई को एसडीएम ने दो साल की अवधि और बढ़ा दी।
विज्ञापन
इसके बावजूद गीता राकेश ने 21, 22 और 23 मई को 43 संवासनियों और नौ बच्चों को छोड़ दिया। इसके लिए न तो प्रार्थनापत्र लिए गए, न पहचान पत्र और न ही बंधनपत्र भरवाए गए। इलाहाबाद एसडीएम सदर को सामाजिक संस्था गुड़िया के सुनील ने शिकायत की। इस पर जांच महिला कल्याण विभाग के उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी पुनीत कुमार मिश्र ने रिपोर्ट दर्ज कराई।
इस पर गीता राकेश को गिरफ्तार कर लिया गया। एफआईआर में आशंका जाहिर की गई है कि संवासनियों को मानव तस्कर न ले गए हों। इन्हें देह व्यापार में झोंके जाने की भी आशंका है।
एसएसपी दिनेश चंद दुबे ने बताया कि इलाहाबाद से 20 मई 2016 को 67 महिलाएं और 37 बच्चे नारी संरक्षण गृह में निरुद्ध कराए गए थे। इनमें से 22 महिलाओं को अलग-अलग कोर्ट के आदेश पर उनके परिवारीजनों के सुपुर्द किया गया। शेष 45 में से 43 को बगैर आदेश के प्रक्रिया पूरी किए छोड़ दिया गया। दो अभी निरुद्ध हैं।