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मैनपुरी से होती थी आगरा की नकली दवा की बिलिंग
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दवा
- फोटो : demo
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मैनपुरी। आगरा में चार फरवरी को पकड़ी गई नकली दवा की फैक्टरी के तार सीधे मैनपुरी से जुड़े हुए हैं। आगरा में बनने वाली नकली दवा की बिलिंग जिले के एक मेडिकल स्टोर के नाम पर की जाती थी। ऐसे में अब औषधि विभाग की टीम मैनपुरी में नकली दवाओं का कारोबार तलाशने में जुट गई है। आगरा के सिकंदरा में एक नकली दवा की फैक्टरी पकड़ी गई थी। यहां से औषधि विभाग की टीम ने कार्रवाई के दौरान आरोपी हरीबाबू को गिरफ्तार किया था। आरोपी मूलरूप से कुरावली का रहने वाला है। जांच के दौरान दवाओं की बिक्री के बिल भी मिले थे। ये बिल शंकर मेडिकल स्टोर कुरावली के नाम पर थे।
बिलों को देखकर टीम ने मैनपुरी का रुख किया। यहां पता चला कि इस मेडिकल स्टोर का लाइसेंस भी हरीबाबू के नाम पर ही है। जब औषधि निरीक्षक उर्मिला यादव ने कुरावली में जाकर इस मेडिकल की तलाश की तो उन्हें वहां मेडिकल नहीं मिला। जिस जगह का नक्शा औषधि विभाग की फाइल में लगा हुआ है वहां श्रीशंकर प्रोवीजन स्टोर संचालित हो रहा है। ऐसे में नकली दवाओं के जिले में कारोबार का शक भी गहरा गया है। औषधि निरीक्षक ने कुरावली में जाकर मेडिकल स्टोर व हरीबाबू के बारे में लोगों से पूछताछ की। अब विभाग इस मेडिकल का लाइसेंस निरस्त करने की तैयारी कर रहा है।
कैसे बन गया लाइसेंस
मेडिकल का लाइसेंस बनवाने के दौरान स्थान का नक्शा, मेडिकल का फोटो आदि की जरूरत होती है। जब मेडिकल स्टोर संचालित ही नहीं हुआ तो लाइसेंस कैसे जारी कर दिया गया। इस बारे में भी जानकारी की जा रही है। फिलहाल कार्रवाई को औषधि विभाग की टीम गोपनीय बनाए हुए है।
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जिले में तो नहीं बिक रहीं नकली दवाएं
औषधि विभाग को इस बात का भी डर सता रहा है कि कहीं मैनपुरी में भी तो नकली दवाओं का कारोबार नहीं हो रहा है। क्यों कि फर्जी बिल मिलने व आरोपी के पकड़े जाने के बाद ये बात तो साफ हो गई है कि नकली दवाओं का मैनपुरी से सीधा कनेक्शन है। ऐसे में जिले में भी इनकी बिक्री से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
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बिलों को देखकर टीम ने मैनपुरी का रुख किया। यहां पता चला कि इस मेडिकल स्टोर का लाइसेंस भी हरीबाबू के नाम पर ही है। जब औषधि निरीक्षक उर्मिला यादव ने कुरावली में जाकर इस मेडिकल की तलाश की तो उन्हें वहां मेडिकल नहीं मिला। जिस जगह का नक्शा औषधि विभाग की फाइल में लगा हुआ है वहां श्रीशंकर प्रोवीजन स्टोर संचालित हो रहा है। ऐसे में नकली दवाओं के जिले में कारोबार का शक भी गहरा गया है। औषधि निरीक्षक ने कुरावली में जाकर मेडिकल स्टोर व हरीबाबू के बारे में लोगों से पूछताछ की। अब विभाग इस मेडिकल का लाइसेंस निरस्त करने की तैयारी कर रहा है।
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कैसे बन गया लाइसेंस
मेडिकल का लाइसेंस बनवाने के दौरान स्थान का नक्शा, मेडिकल का फोटो आदि की जरूरत होती है। जब मेडिकल स्टोर संचालित ही नहीं हुआ तो लाइसेंस कैसे जारी कर दिया गया। इस बारे में भी जानकारी की जा रही है। फिलहाल कार्रवाई को औषधि विभाग की टीम गोपनीय बनाए हुए है।
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जिले में तो नहीं बिक रहीं नकली दवाएं
औषधि विभाग को इस बात का भी डर सता रहा है कि कहीं मैनपुरी में भी तो नकली दवाओं का कारोबार नहीं हो रहा है। क्यों कि फर्जी बिल मिलने व आरोपी के पकड़े जाने के बाद ये बात तो साफ हो गई है कि नकली दवाओं का मैनपुरी से सीधा कनेक्शन है। ऐसे में जिले में भी इनकी बिक्री से इन्कार नहीं किया जा सकता है।