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फायरिंग रेंज के बिना कहां निशाना लगाएं शूटर
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शूटर
- फोटो : demo
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मैनपुरी। देश में क्रिकेट के अलावा भी कई ऐसे खेल हैं, जिनकी अपनी रोचकता है। ऐसा ही एक खेल निशानेबाजी है। जिले में इस खेल का अस्तित्व ही नहीं है। यहां पिछले दस वर्षों से फायरिंग रेंज भी नहीं है। यही कारण है कि निशानेबाजी के क्षेत्र में एक भी खिलाड़ी जिले ने नहीं दिया है।
जिले में रायफल ट्रेनिंग क्लब तो है, लेकिन यह सिर्फ नाम का है। जिले में निशानेबाजी के लिए कोच की भी व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही फायरिंग रेंज भी नहीं है। अफसरों की उदासीनता से इस खेल का स्थानीय स्तर पर प्रचार प्रसार भी नहीं किया जाता है। रायफल क्लब के आजीवन सदस्य सतेंद्र चौहान का कहना है कि पिछले दस साल से जिले में फायरिंग रेंज ही नहीं है। पहले खिलाड़ी थे, लेकिन उन्हें संसाधन नहीं मिले तो वह भी शिथिल हो गए।
दूसरे जिलों से खेल रहे हैं कई खिलाड़ी
शूटरों को जिले में पर्याप्त संसाधन न मिलने से कई निशानेबाज दूसरे जिलों से खेल रहे हैं। कुछ निशानेबाज स्टेट एसोसिएशन से जुड़े हुए हैं। खेल प्रेमियों का कहना है कि क्रिकेट की तरह इस खेल को भी बढ़ावा मिले तो निश्चित ही जिले से बड़ी संख्या में खिलाड़ी निकलेंगे।
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जिले में शूटरों के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं। इस कारण इस खेल में रुचि रखने वाले दूसरे जिलों से खेल रहे हैं। मैं भी यूपी स्टेट एसोसिएशन से खेलता हूं। जिले में भी पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए।
-श्रीओम यादव, भोगांव
निशानेबाजी बेहतर खेल है। जिला स्तर पर खिलाड़ियों के लिए बेहतर इंतजाम होने चाहिए। अगर खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलें तो निश्चित तौर पर जिले से बड़ी संख्या में खिलाड़ी निकलेंगे। मैं भी यूपी स्टेट एसोसिएशन से खेलता हूं।
-संजीव यादव, भोगांव
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जिले में रायफल ट्रेनिंग क्लब तो है, लेकिन यह सिर्फ नाम का है। जिले में निशानेबाजी के लिए कोच की भी व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही फायरिंग रेंज भी नहीं है। अफसरों की उदासीनता से इस खेल का स्थानीय स्तर पर प्रचार प्रसार भी नहीं किया जाता है। रायफल क्लब के आजीवन सदस्य सतेंद्र चौहान का कहना है कि पिछले दस साल से जिले में फायरिंग रेंज ही नहीं है। पहले खिलाड़ी थे, लेकिन उन्हें संसाधन नहीं मिले तो वह भी शिथिल हो गए।
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दूसरे जिलों से खेल रहे हैं कई खिलाड़ी
शूटरों को जिले में पर्याप्त संसाधन न मिलने से कई निशानेबाज दूसरे जिलों से खेल रहे हैं। कुछ निशानेबाज स्टेट एसोसिएशन से जुड़े हुए हैं। खेल प्रेमियों का कहना है कि क्रिकेट की तरह इस खेल को भी बढ़ावा मिले तो निश्चित ही जिले से बड़ी संख्या में खिलाड़ी निकलेंगे।
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जिले में शूटरों के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं। इस कारण इस खेल में रुचि रखने वाले दूसरे जिलों से खेल रहे हैं। मैं भी यूपी स्टेट एसोसिएशन से खेलता हूं। जिले में भी पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए।
-श्रीओम यादव, भोगांव
निशानेबाजी बेहतर खेल है। जिला स्तर पर खिलाड़ियों के लिए बेहतर इंतजाम होने चाहिए। अगर खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलें तो निश्चित तौर पर जिले से बड़ी संख्या में खिलाड़ी निकलेंगे। मैं भी यूपी स्टेट एसोसिएशन से खेलता हूं।
-संजीव यादव, भोगांव