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दीवानी में कार्य बहिष्कार कर की नारेबाजी
Updated Mon, 02 Apr 2018 10:45 PM IST
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मैनपुरी। अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम 1989 के संशोधन के विरोध में दो अप्रैल को भारत बंद को वकीलों ने भी पूरा समर्थन दिया है। इस दौरान दीवानी में बैठक करके नारेबाजी करने के बाद केंद्र सरकार से पहल करने की मांग करते हुए कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया।
कोर्ट के फैसले पर वकीलों ने कार्य बहिष्कार करके दीवानी परिसर में सोमवार को नारेबाजी की। साथ ही केंद्र सरकार से अनुसूचित जाति -जनजाति के हितों को बचाए रखने के लिए पहल करने की मांग की। मैनपुरी बार एसोसिएशन के सभागार में डॉ. बीआर आंबेडकर बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट की पहल पर बैठक हुई। आंबेडकर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने कहा कि संसद द्वारा पारित अधिनियम के बाद दलितों के हित सुरक्षित हुए थे।
दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अधिनियम बेहद प्रभावशाली है। अधिनियम को कमजोर करके दलित हितों पर कुठाराघात किया है। पूर्व डीजीसी चतुर सिंह ने कहा अधिनियम निष्प्रभावी होने से दलित समाज में पनपा आक्रोश कभी भी फूट सकता है। अधिनियम लागू होने के बाद भी जब दलित समाज के लोग सुरक्षित नहीं हैं तो अधिनियम निष्प्रभावी होने के बाद दलितों पर अत्याचार और अधिक बढ़ जाएंगे। मैनपुरी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ यादव ने कहा कि इस अधिनियम को संसद द्वारा 1989 में संसद में पारित किया गया था।
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30 जनवरी 1990 को पूरे देश में लागू किया गया अधिनियम निष्प्रभावी करना उचित नहीं कहा जा सकता। मानसिंह सुमन, संतोष कुमार सिंह, वेदप्रकाश यादव, तरुण कुमार, प्रेमचंद्र, आरडी निगम, राहुल शाक्य, रवींद्र सिंह, मोहित शाक्य, विनीत निगम, शिवपूजन, रोहित निगम, अजय मौर्य, देवेंद्र कटारिया, ओमप्रकाश, इंद्रगोपाल मौजूद रहे। संचालन सचिव विश्व विमोहन जीतू राजपूत ने किया।
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कोर्ट के फैसले पर वकीलों ने कार्य बहिष्कार करके दीवानी परिसर में सोमवार को नारेबाजी की। साथ ही केंद्र सरकार से अनुसूचित जाति -जनजाति के हितों को बचाए रखने के लिए पहल करने की मांग की। मैनपुरी बार एसोसिएशन के सभागार में डॉ. बीआर आंबेडकर बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट की पहल पर बैठक हुई। आंबेडकर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने कहा कि संसद द्वारा पारित अधिनियम के बाद दलितों के हित सुरक्षित हुए थे।
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दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अधिनियम बेहद प्रभावशाली है। अधिनियम को कमजोर करके दलित हितों पर कुठाराघात किया है। पूर्व डीजीसी चतुर सिंह ने कहा अधिनियम निष्प्रभावी होने से दलित समाज में पनपा आक्रोश कभी भी फूट सकता है। अधिनियम लागू होने के बाद भी जब दलित समाज के लोग सुरक्षित नहीं हैं तो अधिनियम निष्प्रभावी होने के बाद दलितों पर अत्याचार और अधिक बढ़ जाएंगे। मैनपुरी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ यादव ने कहा कि इस अधिनियम को संसद द्वारा 1989 में संसद में पारित किया गया था।
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30 जनवरी 1990 को पूरे देश में लागू किया गया अधिनियम निष्प्रभावी करना उचित नहीं कहा जा सकता। मानसिंह सुमन, संतोष कुमार सिंह, वेदप्रकाश यादव, तरुण कुमार, प्रेमचंद्र, आरडी निगम, राहुल शाक्य, रवींद्र सिंह, मोहित शाक्य, विनीत निगम, शिवपूजन, रोहित निगम, अजय मौर्य, देवेंद्र कटारिया, ओमप्रकाश, इंद्रगोपाल मौजूद रहे। संचालन सचिव विश्व विमोहन जीतू राजपूत ने किया।