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मथुराः सराफा कारोबारियों के कत्ल में 100 पुलिस वाले जिम्मेदार

पुनीत शर्मा/ अमर उजाला मथुरा Updated Tue, 23 May 2017 04:04 PM IST
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मथुरा में कत्ल
मथुरा में कत्ल - फोटो : अमर उजाला

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो सराफा कारोबारियों की हत्या-लूटकांड में पुलिस वालों के शामिल होने और पुलिस और बदमाशों के बीच गठजोड़ की बात यूं ही नहीं कह दी है। पुख्ता रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री ने ये बयान दिया है। ये रिपोर्ट थी 28 फरवरी, 2015 को हुए तोलेबाबा हत्याकांड पर। इस हत्या में कुख्यात राकेश उर्फ रंगा, उसका भाई मुकेश उर्फ बिल्ला, नीरज और कामेश नामजद थे। लेकिन फिर भी खुलेआम अपने घर पर रह रहे थे। 
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व्यापारियों से चौथ वसूली की जा रही थी। पुलिस पर सूचनाएं पहुंच रही थीं। लेकिन वर्दी वालों ने कभी इन दोनों को गिरफ्तार नहीं किया। दबिश नहीं दी। अगर इन्हें तभी पकड़ लिया होता तो मथुरा में जो हत्याकांड हुआ वह न होता। सराफ मेघ अग्रवाल और विकास अग्रवाल की हत्या कर चार करोड़ का सोना लूटने के मामले में पुलिस पर आरोप लगने के कई कारण हैं। 


प्रकरण में पुलिस ने कदम-कदम पर लापरवाही बरती है। 15 मई की रात को करीब सवा आठ बजे जब बदमाश लूटपाट कर रहे थे तो पुलिस को सूचना दी गई थी लेकिन पुलिस पहुंची ही नहीं। होलीगेट पर तैनात दरोगा को भी जाकर एक व्यापारी ने बताया लेकिन वह भी नहीं हिला। अधिकारी घटना के करीब पौन घंटे बाद पहुंचे। 

सराफा की हत्या में गिरफ्तार तीन भाई राकेश उर्फ रंगा, नीरज और कामेश 28 फरवरी, 2015 को हुए तुलसीदास उर्फ तोले बाबा मर्डर में भी नामजद थे। लेकिन पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार नहीं किया। ये उस वक्त भी कहीं बाहर नहीं गए थे। सभी चौबियापाड़ा में अपने घर पर रह रहे थे। शहर में भी निकलते थे। बाजार में देखे जाते थे। कारोबारियों से चौथ वसूली कर रहे थे। बस, पुलिस को कभी नजर नहीं आए। इस दौरान कई अधिकारी तैनात रहे लेकिन किसी ने कार्रवाई नहीं की।
 
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डीजीपी और कैबिनेट मंत्री ने दी थी रिपोर्ट

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