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मेरा बेटा था अनमोल, चंद रुपयों के लिए ले ली जान
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मैनपुरी। लूट के बाद किसान की हत्या से घर में कोहराम मचा हुआ है। बूढ़े माता-पिता बेसुध हैं। उनका बुढ़ापे का सहारा छिन गया है। वह रोते-बिलखते कह रहे थे कि मेरा बेटा तो अनमोल था, वह हमारे कलेजे का टुकड़ा था, लेकिन किसी ने चंद रुपयों के लिए उसकी हत्या कर दी। रुपये ले लेते, लेकिन उसे जिंदा छोड़ देते।
अब दूसरे बेटों ने सहारा नहीं दिया तो उनका बुढ़ापा कैसे कटेगा।
किसान राजू यादव पांच भाइयों में बीच का था। सबसे बड़े और सबसे छोटे भाई की शादी हो गई है। राजू की शादी नहीं हुई है। वह हिस्से में मिले पुराने घर में 75 वर्षीय पिता नवीचंद्र और 70 वर्षीय मां शांति देवी के साथ रहता था। खेतीबाड़ी और माता-पिता की सेवा में ही उसका वक्त गुजरता था। राजू की हत्या के बाद से उसके माता-पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
मां शांति देवी का कहना है कि अब वह किसके सहारे रहेगी। रुपये लेने थे तो ले लेते, लेकिन मेरे बेटे की हत्या तो न करते। इतना कहते ही शांति देवी बेसुध हो जाती है, परिवार की महिलाएं उन्हें पानी पिलाती हैं, होश में आने पर वह राजू का नाम लेकर फिर चिल्लाने लगतीं। पिता नवीचंद्र का कहना है कि मेरे बेटे ने किसी का क्या बिगाड़ा था, जो उसकी जान ले ली गई।
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कौन लगवाएगा घर में दरवाजा
राजू जिस मकान में रहता था, उसका दरवाजा टूटा हुआ था। आए दिन कुत्ते-बिल्ली घर में घुस जाते थे। परिजनों के अनुसार राजू रोजाना नया दरवाजा लगवाने के लिए कहता था। कभी रुपये नहीं होते, जब रुपये होते तो समय नहीं मिलता। इस कारण दरवाजा नहीं लग पा रहा था। बृहस्पतिवार को राजू घर से आठ हजार रुपये लेकर निकला और कहकर गया था कि अब दरवाजा लेकर ही लौटेगा। इसके बाद न तो गांव में दरवाजा ही पहुंचा और न ही राजू। पहुंची तो सिर्फ राजू के मरने की खबर।
हत्यारा जान-पहचान का तो नहीं
युवक की हत्या के बाद तरह-तरह की आशंका जताई जा रही हैं। परिजनों का कहना था कि हत्या लूट के लिए ही की गई है। आठ हजार रुपये लूटने वाले को राजू ने पहचान लिया होगा। इसी वजह से उसकी हत्या की है।
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अब दूसरे बेटों ने सहारा नहीं दिया तो उनका बुढ़ापा कैसे कटेगा।
किसान राजू यादव पांच भाइयों में बीच का था। सबसे बड़े और सबसे छोटे भाई की शादी हो गई है। राजू की शादी नहीं हुई है। वह हिस्से में मिले पुराने घर में 75 वर्षीय पिता नवीचंद्र और 70 वर्षीय मां शांति देवी के साथ रहता था। खेतीबाड़ी और माता-पिता की सेवा में ही उसका वक्त गुजरता था। राजू की हत्या के बाद से उसके माता-पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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मां शांति देवी का कहना है कि अब वह किसके सहारे रहेगी। रुपये लेने थे तो ले लेते, लेकिन मेरे बेटे की हत्या तो न करते। इतना कहते ही शांति देवी बेसुध हो जाती है, परिवार की महिलाएं उन्हें पानी पिलाती हैं, होश में आने पर वह राजू का नाम लेकर फिर चिल्लाने लगतीं। पिता नवीचंद्र का कहना है कि मेरे बेटे ने किसी का क्या बिगाड़ा था, जो उसकी जान ले ली गई।
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कौन लगवाएगा घर में दरवाजा
राजू जिस मकान में रहता था, उसका दरवाजा टूटा हुआ था। आए दिन कुत्ते-बिल्ली घर में घुस जाते थे। परिजनों के अनुसार राजू रोजाना नया दरवाजा लगवाने के लिए कहता था। कभी रुपये नहीं होते, जब रुपये होते तो समय नहीं मिलता। इस कारण दरवाजा नहीं लग पा रहा था। बृहस्पतिवार को राजू घर से आठ हजार रुपये लेकर निकला और कहकर गया था कि अब दरवाजा लेकर ही लौटेगा। इसके बाद न तो गांव में दरवाजा ही पहुंचा और न ही राजू। पहुंची तो सिर्फ राजू के मरने की खबर।
हत्यारा जान-पहचान का तो नहीं
युवक की हत्या के बाद तरह-तरह की आशंका जताई जा रही हैं। परिजनों का कहना था कि हत्या लूट के लिए ही की गई है। आठ हजार रुपये लूटने वाले को राजू ने पहचान लिया होगा। इसी वजह से उसकी हत्या की है।